{"_id":"586953c34f1c1bd606eecc5a","slug":"water-drinking","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठप है पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठप है पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 02 Jan 2017 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकास खंड कौशाम्बी के म्योहर गांव में पौने तीन करोड़ की लागत से बनी पेयजल परियोजना पंप आपरेटर की मनमानी का शिकार हो गई है। देखरेख के अभाव में समय से आपूर्ति तो मिल ही नहीं रही, आए दिन मोटर भी फाल्ट बता रही है। सप्ताह भर से पंप की मोटर में आई खराबी को ठीक नहीं कराया जा सका। इससे ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के संकट से जूझना पड़ रहा है।
म्योहर गांव में पौने तीन करोड़ की लागत से बनवाई गई पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी साबित हो रही है। पंप पर तैनात आपरेटरों के नहीं आने से लोगों को समय से आपूर्ति नहीं मिल पाती और आए दिन मोटर, स्टार्टर में कुछ न कुछ खराबी बनी रहती है। बानगी के तौर पर दिसंबर माह की आपूर्ति को लिया जा सकता है। दिसंबर माह में ग्रामीणों को मुश्किल से पांच दिन ही जलापूर्ति मिल सकी है। 15 दिसंबर को वर्कशॉप से बनकर आई मोटर से जलापूर्ति 18 दिसंबर को शुरू कराई गई। पांच दिन चलने के बाद मोटर में पुन: खराबी आ गई। इस पर पहुंचे मैकेनिक ने मोटर चलाने से मना कर दिया।
इसके चलते 23 दिसंबर से ग्रामीणों को जलापूर्ति नहीं हो सकी। सप्ताह भर बीतने को हैं पर पंप की मोटर की खराबी दूर कराकर उसे लाया तक नहीं गया। उधर सप्ताह भर से ठप जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों और मजरों में रहने वालों को बूंद-बूंद पानी के लिए हैंडपंपों की शरण लेनी पड़ रही है। गांव के पुष्पराज त्रिपाठी, अनिल गुप्ता आदि का आरोप है कि पंप में तैनात आपरेटर के न आने से आपूर्ति में मनमानी तो की ही जा रही है आए दिन खराबी भी आ रही है। मामले की शिकायत ग्रामीणों ने चार दिन पहले डीडीओ डीके दोहरे से की पर आपूर्ति बहाल करना तो दूर वर्कशॉप से मोटर तक नहीं लाई जा सकी। ठप जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों ने महकमे के प्रति नाराजगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
म्योहर गांव में पौने तीन करोड़ की लागत से बनवाई गई पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी साबित हो रही है। पंप पर तैनात आपरेटरों के नहीं आने से लोगों को समय से आपूर्ति नहीं मिल पाती और आए दिन मोटर, स्टार्टर में कुछ न कुछ खराबी बनी रहती है। बानगी के तौर पर दिसंबर माह की आपूर्ति को लिया जा सकता है। दिसंबर माह में ग्रामीणों को मुश्किल से पांच दिन ही जलापूर्ति मिल सकी है। 15 दिसंबर को वर्कशॉप से बनकर आई मोटर से जलापूर्ति 18 दिसंबर को शुरू कराई गई। पांच दिन चलने के बाद मोटर में पुन: खराबी आ गई। इस पर पहुंचे मैकेनिक ने मोटर चलाने से मना कर दिया।
विज्ञापन
इसके चलते 23 दिसंबर से ग्रामीणों को जलापूर्ति नहीं हो सकी। सप्ताह भर बीतने को हैं पर पंप की मोटर की खराबी दूर कराकर उसे लाया तक नहीं गया। उधर सप्ताह भर से ठप जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों और मजरों में रहने वालों को बूंद-बूंद पानी के लिए हैंडपंपों की शरण लेनी पड़ रही है। गांव के पुष्पराज त्रिपाठी, अनिल गुप्ता आदि का आरोप है कि पंप में तैनात आपरेटर के न आने से आपूर्ति में मनमानी तो की ही जा रही है आए दिन खराबी भी आ रही है। मामले की शिकायत ग्रामीणों ने चार दिन पहले डीडीओ डीके दोहरे से की पर आपूर्ति बहाल करना तो दूर वर्कशॉप से मोटर तक नहीं लाई जा सकी। ठप जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों ने महकमे के प्रति नाराजगी है।
विज्ञापन