{"_id":"6aca9424f3843e95aa0e8b64","slug":"two-sisters-share-the-same-dream-to-serve-as-doctors-kaushambi-news-c-3-1-ald1070-995027-2026-10-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: दो बहनों का एक ही सपना...डॉक्टर बन करेंगी सेवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: दो बहनों का एक ही सपना...डॉक्टर बन करेंगी सेवा
Sun, 11 Oct 2026 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:08 AM IST
विज्ञापन
डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना और अपने जिले में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना। अजुहा की सगी बहनें स्वरांजलि अग्रहरि और जाह्नवी अग्रहरि इसी सपने को पूरा करने की राह पर हैं। स्वरांजलि ने नीट में 585 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 15,604 प्राप्त की, जबकि जाह्नवी ने 551 अंक के साथ 36,361वीं रैंक पाई।
अजुहा के वार्ड नंबर 12 निवासी स्वरांजलि (19) ने बताया कि दूसरी कक्षा में ही डॉक्टर बनने की इच्छा जागी थी। नानाजी और माता-पिता भी उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। समाज की सेवा करने की चाह ने उनके सपने को और मजबूत किया। जाह्नवी (18) ने भी बचपन से डॉक्टर बनने का लक्ष्य बनाया था।
कम अंकों से निराशा, फिर की मेहनत
स्वरांजलि ने बताया कि मॉक टेस्ट में कम अंक आने पर कई बार आत्मविश्वास डगमगाता था। पहले प्रयास में उन्हें 492 अंक मिले तो निराशा हुई, लेकिन उन्होंने दोबारा कोशिश की और सफलता हासिल की। जाह्नवी ने भी तीसरे प्रयास में नीट पास किया।
विज्ञापन
12 से 13 घंटे तक की पढ़ाई
स्वरांजलि रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक ऑनलाइन कक्षाएं चलती थीं। इसके बाद वह नोट्स पढ़ने और दोहराव में समय देती थीं। स्कूल के शिक्षकों ने भी उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया। अब उन्हें रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा में प्रवेश मिला है। वह आगे सर्जरी के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं।
जाह्नवी ने कक्षा 12 तक घर पर रहकर पढ़ाई की। इसके बाद एक साल ऑनलाइन तैयारी की और फिर कोचिंग के लिए कानपुर में रहना पड़ा। घर से दूर रहना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। उन्हें छत्तीसगढ़ के रायपुर में डेंटल कॉलेज आवंटित हुआ है।
बेटियों को मिलें बराबर अवसर
स्वरांजलि के पिता संतोष कुमार सरकारी शिक्षक हैं। उन्होंने गणित और भौतिक विज्ञान में मदद की। मां अमिता अग्रहरि ने घर के कामों से दूर रखकर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। स्वरांजलि का मानना है कि बेटियों को भी लड़कों की तरह शिक्षा और करियर के बराबर अवसर मिलने चाहिए।
जिले में अस्पताल खोलने का सपना
जाह्नवी का सपना अपने जिले में ऐसा अस्पताल खोलने का है, जहां कम कीमत पर इलाज मिल सके। दोनों बहनों का संदेश है कि बेटियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए। जाह्नवी कहती हैं, ” लड़कियो, तुमको झुकना नहीं है, बस आगे बढ़ना है। एक बार करके दिखा दो, लोग भी सहयोग करने लगेंगे।”
विज्ञापन
अजुहा के वार्ड नंबर 12 निवासी स्वरांजलि (19) ने बताया कि दूसरी कक्षा में ही डॉक्टर बनने की इच्छा जागी थी। नानाजी और माता-पिता भी उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। समाज की सेवा करने की चाह ने उनके सपने को और मजबूत किया। जाह्नवी (18) ने भी बचपन से डॉक्टर बनने का लक्ष्य बनाया था।
विज्ञापन
कम अंकों से निराशा, फिर की मेहनत
स्वरांजलि ने बताया कि मॉक टेस्ट में कम अंक आने पर कई बार आत्मविश्वास डगमगाता था। पहले प्रयास में उन्हें 492 अंक मिले तो निराशा हुई, लेकिन उन्होंने दोबारा कोशिश की और सफलता हासिल की। जाह्नवी ने भी तीसरे प्रयास में नीट पास किया।
विज्ञापन
12 से 13 घंटे तक की पढ़ाई
स्वरांजलि रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक ऑनलाइन कक्षाएं चलती थीं। इसके बाद वह नोट्स पढ़ने और दोहराव में समय देती थीं। स्कूल के शिक्षकों ने भी उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया। अब उन्हें रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा में प्रवेश मिला है। वह आगे सर्जरी के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं।
जाह्नवी ने कक्षा 12 तक घर पर रहकर पढ़ाई की। इसके बाद एक साल ऑनलाइन तैयारी की और फिर कोचिंग के लिए कानपुर में रहना पड़ा। घर से दूर रहना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। उन्हें छत्तीसगढ़ के रायपुर में डेंटल कॉलेज आवंटित हुआ है।
बेटियों को मिलें बराबर अवसर
स्वरांजलि के पिता संतोष कुमार सरकारी शिक्षक हैं। उन्होंने गणित और भौतिक विज्ञान में मदद की। मां अमिता अग्रहरि ने घर के कामों से दूर रखकर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। स्वरांजलि का मानना है कि बेटियों को भी लड़कों की तरह शिक्षा और करियर के बराबर अवसर मिलने चाहिए।
जिले में अस्पताल खोलने का सपना
जाह्नवी का सपना अपने जिले में ऐसा अस्पताल खोलने का है, जहां कम कीमत पर इलाज मिल सके। दोनों बहनों का संदेश है कि बेटियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए। जाह्नवी कहती हैं, ” लड़कियो, तुमको झुकना नहीं है, बस आगे बढ़ना है। एक बार करके दिखा दो, लोग भी सहयोग करने लगेंगे।”