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Kaushambi News: एक डॉक्टर के भरोसे तीन पशु अस्पताल, झोलाछाप काट रहे जेब
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चायल क्षेत्र के तीन पशु अस्पताल का संचालन सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे है। ऐसे में चिकित्सक को कान्हा गोशाला समेत अन्य दर्जन भर गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित दो हजार मवेशियों से ही फुरसत नहीं मिलती। मजबूरन पशुपालकों को झोलाछाप से मवेशियों का इलाज कराना पड़ता है। वह पशुपालकों से मनमाना पैसा वसूल रहे हैं।
ब्लॉक परिसर स्थित पशु चिकित्सालय में तैनात रहे डाॅ. अरुण गुप्ता को इसी साल फरवरी में पदोन्नति देते हुए बस्ती का सीवीओ बना दिया गया। इसके बाद चरवा पशु चिकित्सालय में तैनात चिकित्साधिकारी डाॅ. वंदना सिंह को चायल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
वहीं, मूरतगंज पशु चिकित्सालय में तैनात रहे डाॅ. प्रदीप कुमार को प्रयागराज महाकुंभ मेला में तैनाती दे दे गई थी। इसके बाद से मूरतगंज का भी प्रभार चरवा चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना ही संभाल रही हैं। अब एक ही पशु चिकित्साधिकारी के जिम्मे तीन अस्पताल और दर्जन भर गो-आश्रय स्थल हैं।
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इससे चायल कस्बा स्थित कान्हा गोशाला, शेखपुर रसूलपुर, हरदुआ, गिरिया खालसा समेत दर्जन भर से अधिक गो-आश्रय स्थलों पर मवेशियों के इलाज की जिम्मेदारी भी उनके भरोसे हैं। ऐसे में क्षेत्र के पशुपालक बीमार मवेशियों का इलाज झोलाछाप से कराने को मजबूर हैं।
पशुपालक उमेश कुमार, फूलचंद्र, रमेश कुमार आदि ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलने के कारण उन लोगों को अपने मवेशियों का इलाज और गर्भाधान पैरावेट, झोलाछाप से ही कराना पड़ता है। मक्खन पाल, विनोद कुमार, नंदलाल ने बताया कि अस्पताल में चिकित्साधिकारी की तैनाती थी तो गांव में शिविर लगते थे, लेकिन अब तो वह भी नहीं लग रहा है।
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-- गोशाला में संरक्षित व अस्पतालों में आने वाले पशुपालकों के मवेशियों का इलाज किया जाता है। तीन-तीन चिकित्सालय संभालने के कारण किसी विशेष अस्पताल या क्षेत्र में समय देना मुश्किल रहता है। - डॉ. वंदना सिंह, पशु चिकित्साधिकारी
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-- चिकित्सक के अभाव में समस्या हो रही है। महाकुंभ मेला में भेजे गए चिकित्सक को वहीं रिलीव करने के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही उनके जिले में आने की उम्मीद है। इसके अलावा इसी माह कुछ नए डॉक्टरों के आने की संभावना है। -डॉ.अशोक गंगवार,सीवीओ
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ब्लॉक परिसर स्थित पशु चिकित्सालय में तैनात रहे डाॅ. अरुण गुप्ता को इसी साल फरवरी में पदोन्नति देते हुए बस्ती का सीवीओ बना दिया गया। इसके बाद चरवा पशु चिकित्सालय में तैनात चिकित्साधिकारी डाॅ. वंदना सिंह को चायल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
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वहीं, मूरतगंज पशु चिकित्सालय में तैनात रहे डाॅ. प्रदीप कुमार को प्रयागराज महाकुंभ मेला में तैनाती दे दे गई थी। इसके बाद से मूरतगंज का भी प्रभार चरवा चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना ही संभाल रही हैं। अब एक ही पशु चिकित्साधिकारी के जिम्मे तीन अस्पताल और दर्जन भर गो-आश्रय स्थल हैं।
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इससे चायल कस्बा स्थित कान्हा गोशाला, शेखपुर रसूलपुर, हरदुआ, गिरिया खालसा समेत दर्जन भर से अधिक गो-आश्रय स्थलों पर मवेशियों के इलाज की जिम्मेदारी भी उनके भरोसे हैं। ऐसे में क्षेत्र के पशुपालक बीमार मवेशियों का इलाज झोलाछाप से कराने को मजबूर हैं।
पशुपालक उमेश कुमार, फूलचंद्र, रमेश कुमार आदि ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलने के कारण उन लोगों को अपने मवेशियों का इलाज और गर्भाधान पैरावेट, झोलाछाप से ही कराना पड़ता है। मक्खन पाल, विनोद कुमार, नंदलाल ने बताया कि अस्पताल में चिकित्साधिकारी की तैनाती थी तो गांव में शिविर लगते थे, लेकिन अब तो वह भी नहीं लग रहा है।