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बुलावे के इंतजार में घर बैठे हैं 26 हजार मजदूर
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:27 AM IST
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नवंबर माह में ईंट-भट्ठों में पथाई का काम शुरू हो जाता है। पुरानी नोट बंद होने से 26 हजार से ज्यादा मजदूर घर पर बैठे हैं। वह बुलावे का इंतजार का रहे हैं, लेकिन ईट-भट्ठा मालिक इसकी हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। मजदूरों के फोन के बाद भी उन्हें आज-कल में स्थिति सुधरने का हवाला देकर टाला जा रहा है।
जिले में 216 ईट भट्ठे हैं। एक भट्ठे में औसतन सवा सौ से मजदूर काम करते हैं। इस आंकड़े के हिसाब से भट्ठों में 26 हजार से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। जिले में दस फीसदी ही मजदूर गैर प्रांत से आते हैं। नवंबर माह की शुरूआत होते ही भट्ठों में मजदूर बुला लिए जाते हैं और पथाई तेज हो जाती है। 20 दिन बीत गए, लेकिन अभी ईंट-भट्ठों में मजदूरों को नहीं बुलाया गया। घरों में बैठे मजदूर अब फोन कर मालिक व मुंशी से यह पूछ रहे हैं कि वह कब अपने कुनबेे के साथ आए। भट्ठा मुंशी व मालिक की ओर से अभी फिलहाल कभी कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। मजदूर अब रुपया न होने पर काम पर आने के लिए छटपटा रहे हैं। भट्ठा मालिकों को आशंका है कि यदि हालात न सुधरे तो वह पथाई नहीं करा पाएंगे। ऐसे में उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। इसको लेकर भट्ठा मालिक चिंतित हैं।
दो सौ करोड़ का है कारोबार
जिले में दो सौ से ज्यादा ईंट-भट्ठा हैं। इनमें करीब सवा सौ ईट-भट्ठा चायल तहसील क्षेत्र में हैं। एक ईट भट्ठे का औसतन कारोबार एक करोड़ के आसपास होता है। इस लिहाज से दो सौ करोड़ का कारोबार होता है। नोट बंदी के कारण अबकी यह कारोबार चौपट होने होने के कगार पर है।
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बैठक में भट्ठा मालिक नहीं ले सके फैसला
ईंट-भट्ठा बाल कल्याण समिति की बैठक रविवार को पूरामुफ्ती में हुई। बैठक में भट्ठा मालिक केशरवानी, इब्बन, धीरेंद्र केशरवानी, चंचल केशरवानी, प्रमोद, घनश्याम केशरवानी आदि रहे। संरक्षक मिस्बाहुल ऐन ने बताया कि ईंट भट्ठा मालिक ही निर्णय नहीं ले सके कि आखिर मजदूर बुलाएं जाएं या नहीं। इस पर कोई बात नहीं बन सकी। कहा कि अभी एक हफ्ते का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद मजदूर बुलाएं जाएंगे या नहीं इस पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
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जिले में 216 ईट भट्ठे हैं। एक भट्ठे में औसतन सवा सौ से मजदूर काम करते हैं। इस आंकड़े के हिसाब से भट्ठों में 26 हजार से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। जिले में दस फीसदी ही मजदूर गैर प्रांत से आते हैं। नवंबर माह की शुरूआत होते ही भट्ठों में मजदूर बुला लिए जाते हैं और पथाई तेज हो जाती है। 20 दिन बीत गए, लेकिन अभी ईंट-भट्ठों में मजदूरों को नहीं बुलाया गया। घरों में बैठे मजदूर अब फोन कर मालिक व मुंशी से यह पूछ रहे हैं कि वह कब अपने कुनबेे के साथ आए। भट्ठा मुंशी व मालिक की ओर से अभी फिलहाल कभी कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। मजदूर अब रुपया न होने पर काम पर आने के लिए छटपटा रहे हैं। भट्ठा मालिकों को आशंका है कि यदि हालात न सुधरे तो वह पथाई नहीं करा पाएंगे। ऐसे में उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। इसको लेकर भट्ठा मालिक चिंतित हैं।
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दो सौ करोड़ का है कारोबार
जिले में दो सौ से ज्यादा ईंट-भट्ठा हैं। इनमें करीब सवा सौ ईट-भट्ठा चायल तहसील क्षेत्र में हैं। एक ईट भट्ठे का औसतन कारोबार एक करोड़ के आसपास होता है। इस लिहाज से दो सौ करोड़ का कारोबार होता है। नोट बंदी के कारण अबकी यह कारोबार चौपट होने होने के कगार पर है।
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बैठक में भट्ठा मालिक नहीं ले सके फैसला
ईंट-भट्ठा बाल कल्याण समिति की बैठक रविवार को पूरामुफ्ती में हुई। बैठक में भट्ठा मालिक केशरवानी, इब्बन, धीरेंद्र केशरवानी, चंचल केशरवानी, प्रमोद, घनश्याम केशरवानी आदि रहे। संरक्षक मिस्बाहुल ऐन ने बताया कि ईंट भट्ठा मालिक ही निर्णय नहीं ले सके कि आखिर मजदूर बुलाएं जाएं या नहीं। इस पर कोई बात नहीं बन सकी। कहा कि अभी एक हफ्ते का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद मजदूर बुलाएं जाएंगे या नहीं इस पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।