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मुख्यालय समेत गांवों में आपूर्ति का रोस्टर हुआ धड़ाम
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 15 Jul 2016 12:51 AM IST
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पखवारे भर से दोआबा की बिजली व्यवस्था एक्सईएन विहीन चल रही है। एक्सईएन के कार्यालय नहीं आने से उपकेंद्रों में तैनात जेई मनमानी पर उतारू हो चुके हैं। जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि उपभोक्ताओं को 24 से 48 घंटे तक बगैर बिजली के रहना पड़ता है।
जिले के एक्सईएन पखवारे भर से कार्यालय नहीं आ रहे हैं। उनका जिले में न आना देख मातहत बेलगाम हो गए हैं। जिसका खामियाजा मुख्यालय मंझनपुर से लेकर जिले के गांवों और कस्बों के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। मंझनपुर मुख्यालय में बुधवार और बृहस्पतिवार को बिजली आपूर्ति दिनभर रुलाती रही। दोपहर दो बजे से चार बजे तक दो घंटे में बिजली दस बार आई और गई। यही हाल रात में भी रहा। गांवों की स्थिति तो और भी दयनीय है।
सराय अकिल पावर हाउस से जुड़े गांवों को बुधवार की सुबह से लेकर बृहस्पतिवार की शाम तक आपूर्ति नहीं मिली। बगैर बिजली के परेशान उपभोक्ताओं ने कई बार जिम्मेदारों से बात करने की कोशिश की पर फोन ही रिसीव नहीं हो सका। यही हाल जिले के करारी, भरवारी, कमालपुर आदि उपकेंद्रों का है। यहां रोस्टर के मुताबिक बिजली न मिलने से उपभोक्ताओं में त्राहि-त्राहि मची रहती है।
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फॉल्ट और तार टूटने का करते हैं बहाना
दोआबा में पहले तो गर्मी के कारण तार गलकर गिर रहे थे। यह बहाना विभागीय जिम्मेदारों का था लेकिन जब बारिश के बाद तापमान डाउन हुआ तो बारिश से फॉल्ट की समस्या उत्पन्न होने का बहाना बनाया जाने लगा। किसी भी कस्बे और गांव की आपूर्ति बाधित रहने पर संबंधित जिम्मेदार का यही जवाब रहता है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या दोआबा के बाशिंदों को चरमराई विद्युत आपूर्ति व्यवस्था से छुटकारा नहीं मिलेगा लेकिन उपभोक्ताओं के इन सवालों का जवाब देने वाला जिले में कोई आला अफसर आता ही नहीं। ऐसे में उपभोक्ता अपनी शिकायत भी नहीं दर्ज करा पाते।
रातभर जागते रहते हैं किसान
दोआबा में इन दिनों खरीफ की प्रमुख खेती धान की रोपाई का काम चरम पर है। ऐसे में किसान खेतों में पानी भरने के लिए नलकूप पर ही नजर आ रहा है। रोस्टर के मुताबिक आपूर्ति आने के इंतजार में किसान समय से पहले ही नलकूप पर पहुंच जाता है लेकिन चरमराई आपूर्ति व्यवस्था के चलते किसानों को रात-रात भर जाग कर बिताना पड़ता है। बिजली न आने पर किसान मायूस होकर सुबह घर चला आता है। यह हाल जिले के लगभग सभी पावर हाउस का है। ऐसे में धान की रोपाई का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। उपकेंद्रों के जिम्मेदार हैं कि उन पर उपभोक्ताओं की शिकायत का तनिक भी असर नहीं पड़ रहा है।
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जिले के एक्सईएन पखवारे भर से कार्यालय नहीं आ रहे हैं। उनका जिले में न आना देख मातहत बेलगाम हो गए हैं। जिसका खामियाजा मुख्यालय मंझनपुर से लेकर जिले के गांवों और कस्बों के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। मंझनपुर मुख्यालय में बुधवार और बृहस्पतिवार को बिजली आपूर्ति दिनभर रुलाती रही। दोपहर दो बजे से चार बजे तक दो घंटे में बिजली दस बार आई और गई। यही हाल रात में भी रहा। गांवों की स्थिति तो और भी दयनीय है।
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सराय अकिल पावर हाउस से जुड़े गांवों को बुधवार की सुबह से लेकर बृहस्पतिवार की शाम तक आपूर्ति नहीं मिली। बगैर बिजली के परेशान उपभोक्ताओं ने कई बार जिम्मेदारों से बात करने की कोशिश की पर फोन ही रिसीव नहीं हो सका। यही हाल जिले के करारी, भरवारी, कमालपुर आदि उपकेंद्रों का है। यहां रोस्टर के मुताबिक बिजली न मिलने से उपभोक्ताओं में त्राहि-त्राहि मची रहती है।
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फॉल्ट और तार टूटने का करते हैं बहाना
दोआबा में पहले तो गर्मी के कारण तार गलकर गिर रहे थे। यह बहाना विभागीय जिम्मेदारों का था लेकिन जब बारिश के बाद तापमान डाउन हुआ तो बारिश से फॉल्ट की समस्या उत्पन्न होने का बहाना बनाया जाने लगा। किसी भी कस्बे और गांव की आपूर्ति बाधित रहने पर संबंधित जिम्मेदार का यही जवाब रहता है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या दोआबा के बाशिंदों को चरमराई विद्युत आपूर्ति व्यवस्था से छुटकारा नहीं मिलेगा लेकिन उपभोक्ताओं के इन सवालों का जवाब देने वाला जिले में कोई आला अफसर आता ही नहीं। ऐसे में उपभोक्ता अपनी शिकायत भी नहीं दर्ज करा पाते।
रातभर जागते रहते हैं किसान
दोआबा में इन दिनों खरीफ की प्रमुख खेती धान की रोपाई का काम चरम पर है। ऐसे में किसान खेतों में पानी भरने के लिए नलकूप पर ही नजर आ रहा है। रोस्टर के मुताबिक आपूर्ति आने के इंतजार में किसान समय से पहले ही नलकूप पर पहुंच जाता है लेकिन चरमराई आपूर्ति व्यवस्था के चलते किसानों को रात-रात भर जाग कर बिताना पड़ता है। बिजली न आने पर किसान मायूस होकर सुबह घर चला आता है। यह हाल जिले के लगभग सभी पावर हाउस का है। ऐसे में धान की रोपाई का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। उपकेंद्रों के जिम्मेदार हैं कि उन पर उपभोक्ताओं की शिकायत का तनिक भी असर नहीं पड़ रहा है।