कौशांबी : मां क्या था मेरा गुनाह, जो तूने कर दिया बेसहारा, दुष्कर्म पीड़िता ने बच्चे को अपनाने से किया इन्कार
नवजात के लिए अमृत कहे जाने वाले दूध का एक बूंद भी नहीं पिलाया। एसएनसीयू वार्ड में नियुक्त स्टॉफ नवजात को मां का प्यार व बाप को प्यार दे रहे हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक बाल कल्याण समिति बच्चे को लेकर कोई फैसला नहीं लेती।
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जिला अस्पताल के न्यू सिक बार्न यूनिट में भर्ती एक नवजात कभी हंसता तो कभी तो कभी अचानक ने रोने लगता है। मां के स्पर्श का अहसास उससे कोसों दूर है। यहीं नहीं बच्चे को अपनी मां का दूध तक नसीब नहीं हो सका। फिलहाल अस्पताल के कर्मचारी ही बच्चे के माता-पिता की भूमिका निभा रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड में भर्ती तीन दिन का बच्चा देश-दुनिया से बेखबर है। उसे यह भी नहीं पता कि जिस मां ने उसे अपनी कोख से जन्म दिया वह अब उससे मुंह मोड़ चुकी है।
नवजात के लिए अमृत कहे जाने वाले दूध का एक बूंद भी नहीं पिलाया। एसएनसीयू वार्ड में नियुक्त स्टॉफ नवजात को मां का प्यार व बाप को प्यार दे रहे हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक बाल कल्याण समिति बच्चे को लेकर कोई फैसला नहीं लेती। अस्पताल के स्टॉफ के अलावा भर्ती अन्य बच्चों के तीमारदार भी बच्चे की देखभाल कर रहे हैं।
बता दें कि चरवा कोतवाली इलाके के एक गांवं में रहने वाली एक किशोरी के साथ उसके रिश्ते के चाचा ने दुष्कर्म किया था। अगस्त माह में किशोरी के पेट में दर्द होने पर पिता इलाज के लिए अस्पताल ले गया तो बेटी के गर्भवती होने की जानकारी हुई। इस मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपी को पुलिस ने जेल भी भेजा। इसके बाद अब किशोरी ने बुधवार देर रात बेटे को जन्म दिया था।
अस्पताल में भर्ती नवजात की सेवा में एसएनसीयू का स्टॉफ पूरी शिद्दत से कर रहा है। वार्ड में स्टॉफ नर्स रीता, भूपेंद्र, रामनरेश आदि का कहना है बच्चा अगर रोेने लगता है तो तत्काल मौके पर पहुंचा जाता है। कभी डायपर बदलना हो या उसे फीडिंग कराना। यह सारा काम स्टॉफ ही करता है।
किशोरी के पिता ने गर्भपात की मांगी थी अनुमति
किशोरी के पिता का कहना है वह मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाता है। अगस्त में जब उसे बेटी के गर्भवती होने की जानकारी मिली तो उसने पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि चचेरे भाई ने दुष्कर्म किया था। इसके बाद उसने अदालत में अर्जी देकर गर्भपात कराने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से गर्भ समापन की रिपोर्ट तलब की। इसके बाद बोर्ड ने रिपोर्ट दिया कि गर्भपात नहीं कराया जा सकता है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त गुजर गया और बेटी के पेट में पल रहा बच्चा छह माह का हो गया। मजबूरी में उसे बेटी का प्रसव कराना पड़ा।
दुष्कर्म पीड़िता का बच्चा प्री-मेच्योर हुआ है। प्रसव होने में करीब एक महीने का वक्त बाकी था। इस वजह से बच्चे को मेच्योर होने तक एक महीने तक जिला अस्पताल में रखा जा सकता है। मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति को भी दे दी गई थी। आगे जैसा भी समिति फैसला लेगी, उस हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस