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कलियुग में राम महामंत्र व तारक मंत्र है : मोरारी बापू
Thu, 11 Apr 2019 12:14 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Thu, 11 Apr 2019 12:14 AM IST
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मंझनपुर। गोस्वामी तुलसीदास की पत्नी रत्नावली के गांव महेवा में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के पांचवें दिन संत मोरारी बापू ने कहा कि कलियुग में राम महामंत्र व तारक मंत्र है। जो जगत को तार रहा और तैरना सिखा रहा है। नाम के प्रभाव से ही जिसको विश्राम मिले वो राम है। राम तत्व आदि अनादि है। जब कोई नहीं था तब भी राम थे और आज भी राम हैं। मेरे पास राम नाम है जो बीज मंत्र भी है। राम के नाम से बड़ा कोई भजन नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास की पूरी साधना हरि नाम पर आधारित है। प्रभु का नाम जाप करने से ध्यान, यज्ञ, पूजा और अर्चना हो जाती हैं। प्रेम के बिना ना तो राम का और ना ही रामचरित मानस प्रकट होता है। तुलसी होने के लिए श्रुति जरूरी है।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा श्रवण के लिए उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए बापू ने कहा कि सदाचारी व्यक्ति सदा सुखी रहता है। दुखी वही होता है जो दूसरों की प्रगति को देखकर ईर्ष्या करता है। बताया कि ब्रह्म ही निर्दोष है और बाकी सब दोषी हैं। इतिहास में तथ्यों को मिलाना पड़ता है। अध्यात्म में सत्य को मिलाना पड़ता है। इसलिए सत्य को समझना आवश्यक है। संसार में विचार बहुत होते हैं। लेकिन स्वीकार बहुत कम होते हैं। सत्य को स्वीकारना सत्संग है। कान्ता की आशक्ति भक्ति का एक प्रकार है। राम नाम जपने वालों के लिए नाम मंत्र जरूरी है। परम तत्व की प्राप्ति हो जाए तब भी हमें यज्ञ, तप और दान को कभी नही़ छोड़ना चाहिए। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा के दर्शन का द्वार है। भरत वही है जो सबका पोषण करे और किसी का शोषण नहीं करे। ऐसा नहीं करने वाले पर मंत्र काम नहीं करेगा। किसी से शत्रुता या कटुता ना रखे वो शत्रुघ्न है।
लक्ष्मण के रूप में हम जितने का आधार बन पाएं बनना चाहिए। तभी नाम मंत्र की सार्थकता है। इस दौरान बुधवार को मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, रविन्द्र जोषी, रूपेष व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल, प्रकाश पुरोहित सहित तमाम लोगों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
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जीवन बड़ा मूल्यवान है और विश्वास कभी निराश नहीं होता है। कोई किसी के पास बिना काम के नहीं जाता है। संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसने भूल नही की हो। संत को कोई पापी दिखाई ही नही देता है। कई प्रकार की मृत्यु ने हमें घेर रखा है लेकिन कोई रत्ना मिल जाए तो जीवन का उद्धार हो जाता है। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा दर्शन का द्वार है। संशय मौत है और विश्वास जीवन है।
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संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा श्रवण के लिए उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए बापू ने कहा कि सदाचारी व्यक्ति सदा सुखी रहता है। दुखी वही होता है जो दूसरों की प्रगति को देखकर ईर्ष्या करता है। बताया कि ब्रह्म ही निर्दोष है और बाकी सब दोषी हैं। इतिहास में तथ्यों को मिलाना पड़ता है। अध्यात्म में सत्य को मिलाना पड़ता है। इसलिए सत्य को समझना आवश्यक है। संसार में विचार बहुत होते हैं। लेकिन स्वीकार बहुत कम होते हैं। सत्य को स्वीकारना सत्संग है। कान्ता की आशक्ति भक्ति का एक प्रकार है। राम नाम जपने वालों के लिए नाम मंत्र जरूरी है। परम तत्व की प्राप्ति हो जाए तब भी हमें यज्ञ, तप और दान को कभी नही़ छोड़ना चाहिए। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा के दर्शन का द्वार है। भरत वही है जो सबका पोषण करे और किसी का शोषण नहीं करे। ऐसा नहीं करने वाले पर मंत्र काम नहीं करेगा। किसी से शत्रुता या कटुता ना रखे वो शत्रुघ्न है।
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लक्ष्मण के रूप में हम जितने का आधार बन पाएं बनना चाहिए। तभी नाम मंत्र की सार्थकता है। इस दौरान बुधवार को मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, रविन्द्र जोषी, रूपेष व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल, प्रकाश पुरोहित सहित तमाम लोगों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
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जीवन बड़ा मूल्यवान है और विश्वास कभी निराश नहीं होता है। कोई किसी के पास बिना काम के नहीं जाता है। संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसने भूल नही की हो। संत को कोई पापी दिखाई ही नही देता है। कई प्रकार की मृत्यु ने हमें घेर रखा है लेकिन कोई रत्ना मिल जाए तो जीवन का उद्धार हो जाता है। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा दर्शन का द्वार है। संशय मौत है और विश्वास जीवन है।