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आसमान में फिर छाए बर्बादी के बादल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:11 PM IST
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किसान और परिवार के सभी सदस्य अधपकी फसल ही काटने में जुट गए हैं
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आसामान में छाए बादलों ने किसानों के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है। रविवार की सुबह से आसमान में छाए बादलों को देख किसानों को पिछले साल की बर्बादी याद आ गई। मौसम का मिजाज देख अन्नदाताओं का दम फूलने लगा है। काले बादलों के जमावड़े और हवा के झोकों ने किसानों को पिछले साल मार्च, अप्रैल महीने में आसमान से बरसी बर्बादी का मंजर याद दिला दिया है। अन्नदाताओं का मानना है कि यदि बारिश हुई या ओले गिरे तो खेतों में पक रही गेहूं समेत रबी की सभी फसलें तबाह हो जाएंगी।
दोआबा के किसान दो साल से मौसम की मार से जूझ रहे हैं। पिछले साल मार्च, अप्रैल के महीने में बेमौसम बारिश, भीषण ओलावृष्टि और तूफानी हवाओं ने गेहूं, अरहर, सरसों, चना समेत सभी फसलों को बर्बाद कर दिया था। आसमान से बरसी आफत से जनपद के 4 लाख किसान बर्बाद हुए थे। बारिश, ओलावृष्टि से करीब 70 करोड़ रुपये की फसलों का नुकसान हुआ था। इसके बाद मानसून के मौसम में बरसात नहीं हुई। धान की फसल सूखे की भेंट चढ़ गईं। खून-पसीना बहाकर अन्नदाताओं ने किसी तरह गेहूं, चना, मटर, सरसों की खेती की। पर, जैसे ही फसल पकने लगी। मौसम का रौद्ररूप उन्हें फिर से डराने लगा है। अभी 10 दिन पहले तेज हवाओं के साथ बारिश हुई थी। उस दौरान फसलें गिरने से करीब 20 से 30 फीसदी नुकसान हुआ है। हालांकि बाद में धूप खिलने से किसानों ने राहत महसूस की थी। पर, रविवार की सुबह से ही फिर मौसम बदल गया। तेज हवाओं के साथ आसमान में काले बादलों ने डेरा जमा रखा है। आकाश में छाई काली घटाएं देखकर किसानों का कलेजा कांप गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में गेहूं की करीब 80 फीसदी फसल पकने वाली है। ऐसे में यदि तेज हवाओं के साथ बारिश हुई या ओले गिरे तो बर्बादी पक्की है।
...तो दाने-दाने को मोहताज होंगे किसान
खेतों में इस समय गेहूं समेत रबी सीजन की ज्यादातर फसलें लगभग पक रही हैं। जौ, चना, सरसों आदि फसलों की कटाई भी किसानों ने शुरू कर दी है। खलिहान में कटी हुई फसल मड़ाई के लिए रखी है। इसी बीच रविवार की सुबह मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया। जिसे देख किसान डरे हुए हैं। किसानों का कहना है कि पिछले साल इसी मौसम में बारिश, ओलावृष्टि हुई थी। मौसम का रूख फिर से वैसा ही हो रहा है। यदि फिर से पिछले साल की तरह बारिश, ओलावृष्टि होती है तो किसान मर जाएंगे। उनका परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज होगा। कारण, बारिश अथवा ओले गिरने से खेतों में पक रही गेहूं समेत सभी फसलें गिरकर नष्ट हो जाएगी।
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अधपकी फसल काटने में जुटे अन्नदाता
तमाम गांवों में मौसम का बिगड़ा मिजाज देख सहमे किसानों का पूरा कुनबा रविवार की भोर से ही खेतों में नजर आया। किसान और परिवार के सभी सदस्य अधपकी फसल ही काटने में जुट गए हैं। सिराथू ब्लॉक के कोर्रों गांव के किसान रामकुमार, रामबाबू, बसोहनी गांव के मेवालाल, रोशनलाल, लालचंद्र, इचौली गांव के राजकुमार पांडेय, रामस्वरूप, धर्मराज पासी, राम नारायण पाल, कौशाम्बी ब्लॉक के शिवसरन सिंह, बब्बू, अंशुमान सिंह, बरईन का पुरा गांव के उमेश कुमार, दुर्गा प्रसाद आदि ने बताया कि पिछले साल इसी मौसम में बारिश, ओलावृष्टि में सारी कमाई मिट्टी में मिल गई थी। ऐसे में खेतों में अधपकी ही फसल काट लेने से कुछ न कुछ पैदावार तो हाथ लग जाएगी।
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दोआबा के किसान दो साल से मौसम की मार से जूझ रहे हैं। पिछले साल मार्च, अप्रैल के महीने में बेमौसम बारिश, भीषण ओलावृष्टि और तूफानी हवाओं ने गेहूं, अरहर, सरसों, चना समेत सभी फसलों को बर्बाद कर दिया था। आसमान से बरसी आफत से जनपद के 4 लाख किसान बर्बाद हुए थे। बारिश, ओलावृष्टि से करीब 70 करोड़ रुपये की फसलों का नुकसान हुआ था। इसके बाद मानसून के मौसम में बरसात नहीं हुई। धान की फसल सूखे की भेंट चढ़ गईं। खून-पसीना बहाकर अन्नदाताओं ने किसी तरह गेहूं, चना, मटर, सरसों की खेती की। पर, जैसे ही फसल पकने लगी। मौसम का रौद्ररूप उन्हें फिर से डराने लगा है। अभी 10 दिन पहले तेज हवाओं के साथ बारिश हुई थी। उस दौरान फसलें गिरने से करीब 20 से 30 फीसदी नुकसान हुआ है। हालांकि बाद में धूप खिलने से किसानों ने राहत महसूस की थी। पर, रविवार की सुबह से ही फिर मौसम बदल गया। तेज हवाओं के साथ आसमान में काले बादलों ने डेरा जमा रखा है। आकाश में छाई काली घटाएं देखकर किसानों का कलेजा कांप गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में गेहूं की करीब 80 फीसदी फसल पकने वाली है। ऐसे में यदि तेज हवाओं के साथ बारिश हुई या ओले गिरे तो बर्बादी पक्की है।
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...तो दाने-दाने को मोहताज होंगे किसान
खेतों में इस समय गेहूं समेत रबी सीजन की ज्यादातर फसलें लगभग पक रही हैं। जौ, चना, सरसों आदि फसलों की कटाई भी किसानों ने शुरू कर दी है। खलिहान में कटी हुई फसल मड़ाई के लिए रखी है। इसी बीच रविवार की सुबह मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया। जिसे देख किसान डरे हुए हैं। किसानों का कहना है कि पिछले साल इसी मौसम में बारिश, ओलावृष्टि हुई थी। मौसम का रूख फिर से वैसा ही हो रहा है। यदि फिर से पिछले साल की तरह बारिश, ओलावृष्टि होती है तो किसान मर जाएंगे। उनका परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज होगा। कारण, बारिश अथवा ओले गिरने से खेतों में पक रही गेहूं समेत सभी फसलें गिरकर नष्ट हो जाएगी।
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अधपकी फसल काटने में जुटे अन्नदाता
तमाम गांवों में मौसम का बिगड़ा मिजाज देख सहमे किसानों का पूरा कुनबा रविवार की भोर से ही खेतों में नजर आया। किसान और परिवार के सभी सदस्य अधपकी फसल ही काटने में जुट गए हैं। सिराथू ब्लॉक के कोर्रों गांव के किसान रामकुमार, रामबाबू, बसोहनी गांव के मेवालाल, रोशनलाल, लालचंद्र, इचौली गांव के राजकुमार पांडेय, रामस्वरूप, धर्मराज पासी, राम नारायण पाल, कौशाम्बी ब्लॉक के शिवसरन सिंह, बब्बू, अंशुमान सिंह, बरईन का पुरा गांव के उमेश कुमार, दुर्गा प्रसाद आदि ने बताया कि पिछले साल इसी मौसम में बारिश, ओलावृष्टि में सारी कमाई मिट्टी में मिल गई थी। ऐसे में खेतों में अधपकी ही फसल काट लेने से कुछ न कुछ पैदावार तो हाथ लग जाएगी।