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घनी आबादी के बीच पटाखा बनाने और बेचने की दे दी इजाजत

Mon, 04 May 2020 11:54 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2020 11:54 PM IST
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Permission granted to make and sell cracker among dense population
Permission granted to make and sell cracker among dense population - फोटो : KAUSHAMBI
घनी आबादी के बीच पटाखा बनाने और बेचने की दे दी इजाजत
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परिवार की महिला के नाम बनाने और हैदर के नाम बेचने का है लाइसेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। भरवारी में दिल दहला देने वाली घटना के बाद प्रशासनिक अफसरों की अनदेखी सामने आ गई है। अधिकारियों ने घनी आबादी के बीच पटाखा बनाने और बेचने का लाइसेंस जारी किया था।
बताया जाता है कि अधिकारियों ने पटाखा बेचने का लाइसेंस हैदर अली को दिया था। जबकि पटाखा बनाने का लाइसेंस उसके परिवार की तरन्नुुम परवीन के नाम है। बताया जाता है कि हैदर अली का पूरा परिवार पटाखा बनाने-बेचने का काम करता है। घनी आबादी में इन लोगों के एक नहीं तीन-तीन गोदाम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सभी गोदाम पटाखे से भरे हैं। यह बात अलग है कि अफसरों ने अब गोदामों को सील कर दिया है। सील करने से पहले यह भी नहीं देखा गया कि गोदाम में कितना बारूद और पटाखा भरा है। नियमानुसार आबादी से दूर पटाखा बनाने व बेचने दोनों का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। फिर व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण भरवारी जैसे कस्बे में पुलिस चौकी के पास घनी आबादी के बीच आखिर किन परिस्थितियों में मौत का कारखाना खोलने की इजाजत दी गई ? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। अधिकारी यह भी बताने को तैयार नहीं हैं कि लाइसेंस किस वर्ष में जारी किया गया है और उस वक्त सक्षम अफसर कौन था। कस्बे के लोगों का कहना है कि लाइसेंस जारी करने वाले अफसर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। साठगांठ करके ही लाइसेंस जारी किया होगा। चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिला अग्निशमन अधिकारी राधेमोहन मिश्रा का कहना है कि उन्होंने कई बार निरीक्षण किया है। तब पटाखा बस्ती के बाहर ही बनाया जा रहा था। फिर साफ है कि फैक्ट्री संचालक ने अग्निशमन विभाग की आंख में भी धूल झोंकने का काम किया है। क्योंकि सोमवार सुबह तो वह पटाखा घनी आबादी में ही बना रहा था।
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इनके खिलाफ दर्ज हुई है एफआईआर
मंझनपुर। दर्दनाक हादसे के मामले में मृतका गीता के भाई की तहरीर पर हैदर अली उर्फ पप्पू, उसके बेटे वैश, सैफ, पत्नी, परिवार के ही मुन्ना पुत्र शराफत अली, चांद पुत्र सफी अली व पिंटू पुत्र शौकत अली आदि के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। फिलहाल कोई भी गिरफ्तार नहीं है। गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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