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Kaushambi News: बदलते मौसम में बढ़े हाई ग्रेड बुखार के मरीज, घट रही प्लेटलेट्स
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में लगी मरीज की भीड़। संवाद
अचानक मौसम में बदलाव के साथ कभी तेज धूप तो कभी रुक-रुक कर होने वाली बारिश से संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। इन दिनों वायरल और टायफाइड जैसे रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हाई ग्रेड बुखार के मामले चिंताजनक हैं। कई मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार कम हो रही है। शनिवार को मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन विभाग की ओपीडी में 140 से अधिक मरीजों ने इलाज कराया। जिनमें 35 से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित रहे।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। इससे लोग जल्दी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हाई ग्रेड बुखार के मरीजों में ज्यादातर सिरदर्द, ठंड लगने, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिख रहे हैं।
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बुखार के कई मरीजों का तापमान 102 डिग्री से अधिक पाया गया है। डॉक्टरों ने कहा कि हाई ग्रेड बुखार से पीड़ित मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी सबसे बड़ा खतरा है। रक्त में प्लेटलेट्स कम होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। डॉक्टरों ने कहा है कि यदि किसी मरीज को तेज बुखार तीन दिन से अधिक बना रहे तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
वहीं, सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी बुखार के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने मरीजों को अधिक से अधिक तरल पदार्थ और स्वच्छ पानी पीने की सलाह दी है। साथ ही गंदगी से बचाव और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है।
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. रंजीत लहरी का कहना है कि जिन मरीजों को प्लेटलेट्स की कमी हो रही है, उन्हें समय पर इलाज और उचित निगरानी की जरूरत है। अनदेखी करने पर स्थिति गंभीर साबित हो सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने बुखार के मरीजों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
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हाई ग्रेड बुखार के मामले चिंताजनक हैं। कई मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार कम हो रही है। शनिवार को मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन विभाग की ओपीडी में 140 से अधिक मरीजों ने इलाज कराया। जिनमें 35 से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित रहे।
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मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। इससे लोग जल्दी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हाई ग्रेड बुखार के मरीजों में ज्यादातर सिरदर्द, ठंड लगने, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिख रहे हैं।
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बुखार के कई मरीजों का तापमान 102 डिग्री से अधिक पाया गया है। डॉक्टरों ने कहा कि हाई ग्रेड बुखार से पीड़ित मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी सबसे बड़ा खतरा है। रक्त में प्लेटलेट्स कम होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। डॉक्टरों ने कहा है कि यदि किसी मरीज को तेज बुखार तीन दिन से अधिक बना रहे तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
वहीं, सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी बुखार के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने मरीजों को अधिक से अधिक तरल पदार्थ और स्वच्छ पानी पीने की सलाह दी है। साथ ही गंदगी से बचाव और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है।
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. रंजीत लहरी का कहना है कि जिन मरीजों को प्लेटलेट्स की कमी हो रही है, उन्हें समय पर इलाज और उचित निगरानी की जरूरत है। अनदेखी करने पर स्थिति गंभीर साबित हो सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने बुखार के मरीजों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।