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Kaushambi News: 10-10 हजार दीयों के मिले ऑर्डर... दिन-रात चाक चला रहे कुम्हार
Fri, 16 Oct 2026 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 16 Oct 2026 12:15 AM IST
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मुकीमपुर में दीवाली बनाते कुम्हार -संवाद
शारदीय नवरात्र और दिवाली के त्योहार के कारण मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने लगी है। कुम्हार परिवार दिन-रात चाक चलाकर दीये, खिलौने और देवी-देवताओं की मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं। कई कुम्हारों को 10-10 हजार से अधिक दीये बनाने के ऑर्डर मिले हैं। इससे कारोबारियों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
भैला मकदूमपुर, नेवारी, मुकीमपुर और गुवारा तैयबपुर समेत आसपास के गांवों में कुम्हार दिवाली की तैयारी में जुटे हैं। मुकीमपुर के देशराज प्रजापति ने बताया कि त्योहार पर गणेश-लक्ष्मी के साथ हनुमान जी की मूर्तियों की भी मांग रहती है।
भैला मकदूमपुर के पृथ्वी प्रजापति और पप्पू प्रजापति ने बताया कि उन्हें 10-10 हजार से अधिक दीये बनाने के ऑर्डर मिले हैं। एक सैकड़ा दीये 60 से 70 रुपये में बिक रहे हैं। गुवारा तैयबपुर के भगवानदीन प्रजापति प्रतिदिन करीब एक हजार से 1200 दीये बनाते हैं। तैयार दीयों को भट्ठी में पकाया जा रहा है। कुम्हारों का कहना है कि चाइनीज झालरों के चलन के बावजूद मिट्टी के दीयों की परंपरा कायम है।
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-- -- इनसेट-- -- -- -- -- -
मोमबत्ती और विद्युत झालरों ने बनाई जगह
समय के साथ मिट्टी के बने सामान का प्रयोग काफी कम हो गया है। भैला मकदूमपुर के पृथ्वी प्रजापति और पप्पू प्रजापति ने बताया कि चार दशक पहले मिट्टी से बने सामान का काफी प्रयोग होता था। पहले ज्यादातर कच्चा घर होता था। खपरैल से छप्पर बनाया जाता था। अनाज भरने के लिए लोहे और प्लास्टिक के ड्रम आ गए हैं। घड़े में पानी की जगह फ्रिज का प्रयोग किया जा रहा है। इसी तरह दीये की जगह मोमबत्ती और झालरों ने ले लिया है।
-- -- -- -- -वर्जन-- -- -- -
कुम्हारों को विभाग से सभी सहूलियत उपलब्ध कराई जाती है। इलेक्ट्रिक चाक, प्रदूषण रहित मिट्टी बर्तन पकाने की यूनिट पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। मिट्टी प्रचुर मात्रा में मिल सके इसके लिए शासन मई-जून में क्षेत्र के जलाशयों की सफाई और उपयोग लायक मिट्टी प्राप्त करने की सहूलियत उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे जल संचयन के लिए बारिश से पहले तालाब न सिर्फ बेहतर बनेंगे।
अशोक कुमार, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी
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भैला मकदूमपुर, नेवारी, मुकीमपुर और गुवारा तैयबपुर समेत आसपास के गांवों में कुम्हार दिवाली की तैयारी में जुटे हैं। मुकीमपुर के देशराज प्रजापति ने बताया कि त्योहार पर गणेश-लक्ष्मी के साथ हनुमान जी की मूर्तियों की भी मांग रहती है।
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भैला मकदूमपुर के पृथ्वी प्रजापति और पप्पू प्रजापति ने बताया कि उन्हें 10-10 हजार से अधिक दीये बनाने के ऑर्डर मिले हैं। एक सैकड़ा दीये 60 से 70 रुपये में बिक रहे हैं। गुवारा तैयबपुर के भगवानदीन प्रजापति प्रतिदिन करीब एक हजार से 1200 दीये बनाते हैं। तैयार दीयों को भट्ठी में पकाया जा रहा है। कुम्हारों का कहना है कि चाइनीज झालरों के चलन के बावजूद मिट्टी के दीयों की परंपरा कायम है।
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मोमबत्ती और विद्युत झालरों ने बनाई जगह
समय के साथ मिट्टी के बने सामान का प्रयोग काफी कम हो गया है। भैला मकदूमपुर के पृथ्वी प्रजापति और पप्पू प्रजापति ने बताया कि चार दशक पहले मिट्टी से बने सामान का काफी प्रयोग होता था। पहले ज्यादातर कच्चा घर होता था। खपरैल से छप्पर बनाया जाता था। अनाज भरने के लिए लोहे और प्लास्टिक के ड्रम आ गए हैं। घड़े में पानी की जगह फ्रिज का प्रयोग किया जा रहा है। इसी तरह दीये की जगह मोमबत्ती और झालरों ने ले लिया है।
कुम्हारों को विभाग से सभी सहूलियत उपलब्ध कराई जाती है। इलेक्ट्रिक चाक, प्रदूषण रहित मिट्टी बर्तन पकाने की यूनिट पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। मिट्टी प्रचुर मात्रा में मिल सके इसके लिए शासन मई-जून में क्षेत्र के जलाशयों की सफाई और उपयोग लायक मिट्टी प्राप्त करने की सहूलियत उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे जल संचयन के लिए बारिश से पहले तालाब न सिर्फ बेहतर बनेंगे।
अशोक कुमार, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी

मुकीमपुर में दीवाली बनाते कुम्हार -संवाद