{"_id":"5ca65217bdec221425447513","slug":"one-board-and-different-books","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक ही बोर्ड के स्कूलों में दी जा रहीं अलग-अलग किताबें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक ही बोर्ड के स्कूलों में दी जा रहीं अलग-अलग किताबें
Fri, 05 Apr 2019 12:24 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Fri, 05 Apr 2019 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के पाठ्यक्रमों और उनके दामों में भारी अंतर है। केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों को कक्षा एक से लेकर 12 तक का कोर्स 700 से लेकर 2500 रुपये के बीच मिलता है। वहीं, इसी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की किताबें तीन से छह हजार रुपये में मिल रही हैं। जबकि, सीबीएसई के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाए जाने का प्रावधान है।
प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम स्कूल-कॉलेज में पढ़ाना चाहते हैं। अभिभावकों की इस चाहत को निजी स्कूल संचालक खूब भुना रहे हैं। जनपद में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त कई छोटे-बडे़ स्कूल हैं, जिनमें पढ़ाए जाने वाले कोर्स काफी महंगे और निजी प्रकाशनों से हैं। निजी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किसी भी किताब की कीमत लगभग डेढ़-दो सौ रुपये से कम नहीं है। कई किताब तो 700 से 1000 रुपये तक में हैं। जबकि सीबीएसई के स्कूलों खासकर केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले कोर्स में शामिल प्रति किताब की कीमत 40 से 150 रुपये के बीच ही हैं। दरअसल केंद्रीय विद्यालय में अधिकांश पुस्तकें एनसीईआरटी की पढ़ाई जाती हैं।
पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा एक का कोर्स पांच से लेकर सात सौ रुपये तक है। इसी प्रकार से कक्षा पांच की 600 से 800 रुपये तक, कक्षा छह की 630 से 800 रुपये तक के बीच है। जबकि इसी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों का कोर्स कक्षा एक का दो-तीन हजार रुपये तक है। कक्षा पांच में यह कोर्स 2000 रुपये से 4000 रुपये और कक्षा छह से आठ तक में 3000 हजार रुपये से छह हजार रुपये तक में है। बोर्ड एक और स्कूलों की किताबें व रेट अलग-अलग हैं। पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार एनसीईआरटी का पाठ्यक्त्रस्म उन्हें आगरा, ग्वालियर, दिल्ली और कानपुर से लाना पड़ता है। वहां इनके डिपो हैं। मुनाफे में उन्हें प्रति किताब दस प्रतिशत प्राप्त होता है। भाड़ा उन्हें लगाना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम स्कूल-कॉलेज में पढ़ाना चाहते हैं। अभिभावकों की इस चाहत को निजी स्कूल संचालक खूब भुना रहे हैं। जनपद में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त कई छोटे-बडे़ स्कूल हैं, जिनमें पढ़ाए जाने वाले कोर्स काफी महंगे और निजी प्रकाशनों से हैं। निजी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किसी भी किताब की कीमत लगभग डेढ़-दो सौ रुपये से कम नहीं है। कई किताब तो 700 से 1000 रुपये तक में हैं। जबकि सीबीएसई के स्कूलों खासकर केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले कोर्स में शामिल प्रति किताब की कीमत 40 से 150 रुपये के बीच ही हैं। दरअसल केंद्रीय विद्यालय में अधिकांश पुस्तकें एनसीईआरटी की पढ़ाई जाती हैं।
विज्ञापन
पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा एक का कोर्स पांच से लेकर सात सौ रुपये तक है। इसी प्रकार से कक्षा पांच की 600 से 800 रुपये तक, कक्षा छह की 630 से 800 रुपये तक के बीच है। जबकि इसी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों का कोर्स कक्षा एक का दो-तीन हजार रुपये तक है। कक्षा पांच में यह कोर्स 2000 रुपये से 4000 रुपये और कक्षा छह से आठ तक में 3000 हजार रुपये से छह हजार रुपये तक में है। बोर्ड एक और स्कूलों की किताबें व रेट अलग-अलग हैं। पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार एनसीईआरटी का पाठ्यक्त्रस्म उन्हें आगरा, ग्वालियर, दिल्ली और कानपुर से लाना पड़ता है। वहां इनके डिपो हैं। मुनाफे में उन्हें प्रति किताब दस प्रतिशत प्राप्त होता है। भाड़ा उन्हें लगाना पड़ता है।
विज्ञापन