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ओडीएफ की तरह चलेे कुपोषण भगाओ अभियान
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 09 Aug 2017 01:47 AM IST
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कौशाम्बी
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कुपोषण से हुई तमन्ना की मौत के बाद शासन नींद से जाग गया है। जिले की भयावह स्थिति से अधिकारी रूबरू हुए तो कुपोषण भगाने के लिए ओडीएफ की तरह अभियान चलाने का फरमान जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं शासन स्तर के अधिकारियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की जमकर खिंचाई भी की। हिदायत दी है कि इसमें अब किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। यह कार्रवाई अमर उजाला में सात मई को प्रकाशित खबर को हाईकोर्ट के संज्ञान में लेने के बाद शासन स्तर से शुरू हुई है।
जिले के 28 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें आंशिक कुपोषित बच्चों की संख्या दोगुनी है। छह मई को असाढ़ा गांव की तमन्ना (11 माह) पुत्री गुलाम वारिस की कुपोषण से मौत हो गई थी। इस खबर को अमर उजाला ने सात मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाजसेवियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 28 जुलाई को हाईकोर्ट ने मामले में डीएम से रिपोर्ट तलब करते हुए डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। अदालत के कड़ा रुख अख्तियार करते ही जिले में हड़कंप मच गया। शासन ने भी इसे गंभीरता से लिया। तीन अगस्त को मुख्य सचिव ने जिले के अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी। इसमें कुपोषण से हुई मौत का ही मामला छाया था।
शासन ने गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की तरह कुपोषण भगाओ अभियान चलाएं। इस अभियान के तहत पंचायती राज, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम्य विकास और बेसिक शिक्षा विभाग समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करेंगे। इसके अलावा जहां आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं वहां आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे। फरमान जारी होते ही सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने डीपीओ राकेश मिश्र को सभी बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश जारी कर दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अब इस मामले में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
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जिले के 28 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें आंशिक कुपोषित बच्चों की संख्या दोगुनी है। छह मई को असाढ़ा गांव की तमन्ना (11 माह) पुत्री गुलाम वारिस की कुपोषण से मौत हो गई थी। इस खबर को अमर उजाला ने सात मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाजसेवियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 28 जुलाई को हाईकोर्ट ने मामले में डीएम से रिपोर्ट तलब करते हुए डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। अदालत के कड़ा रुख अख्तियार करते ही जिले में हड़कंप मच गया। शासन ने भी इसे गंभीरता से लिया। तीन अगस्त को मुख्य सचिव ने जिले के अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी। इसमें कुपोषण से हुई मौत का ही मामला छाया था।
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शासन ने गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की तरह कुपोषण भगाओ अभियान चलाएं। इस अभियान के तहत पंचायती राज, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम्य विकास और बेसिक शिक्षा विभाग समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करेंगे। इसके अलावा जहां आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं वहां आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे। फरमान जारी होते ही सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने डीपीओ राकेश मिश्र को सभी बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश जारी कर दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अब इस मामले में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
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