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Kaushambi News: ड्रैगन फ्रूट की खेती से आत्मनिर्भर बनीं नीता देवी
Sat, 10 Oct 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:22 AM IST
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सीमित जमीन और कम संसाधनों के बावजूद नई सोच के साथ खेती कर नीता देवी ने आजीविका का नया रास्ता तैयार किया है। कौशाम्बी ब्लॉक की भटवरिया गांव की रहने वाली नीता देवी ने पारंपरिक धान-गेहूं की खेती से हटकर डेढ़ बिस्वा जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। वह आय बताने से गुरेज करती रहीं, कहा- हम सभी इतना कमा लेते हैं कि किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता।
नीता देवी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत आजीविका सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं को आजीविका बढ़ाने और उन्नत खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
नीता देवी ने बताया कि उन्होंने ड्रैगन फ्रूट को इसलिए चुना क्योंकि इसमें कम पानी की जरूरत होती है और बाजार में इसकी मांग व कीमत अच्छी है। यह कैक्टस प्रजाति का पौधा है। एक बार लगाने के बाद करीब 20 से 25 वर्ष तक फल देता है। सीमित भूमि के वैज्ञानिक उपयोग से उन्होंने नकदी फसल को आजीविका का माध्यम बनाने की पहल की है।
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महिलाओं को खेती से जोड़ने का लक्ष्य
शारदा आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी नीता देवी अपने अनुभव के जरिए पंचायत की अन्य महिलाओं को आधुनिक और जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका लक्ष्य महिलाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर आय बढ़ाना है। भविष्य में खेती का क्षेत्र बढ़ाने, ड्रैगन फ्रूट का जैविक प्रमाणीकरण कराने और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से बड़े बाजारों में सामूहिक विपणन करने की योजना है।
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नीता देवी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत आजीविका सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं को आजीविका बढ़ाने और उन्नत खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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नीता देवी ने बताया कि उन्होंने ड्रैगन फ्रूट को इसलिए चुना क्योंकि इसमें कम पानी की जरूरत होती है और बाजार में इसकी मांग व कीमत अच्छी है। यह कैक्टस प्रजाति का पौधा है। एक बार लगाने के बाद करीब 20 से 25 वर्ष तक फल देता है। सीमित भूमि के वैज्ञानिक उपयोग से उन्होंने नकदी फसल को आजीविका का माध्यम बनाने की पहल की है।
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महिलाओं को खेती से जोड़ने का लक्ष्य
शारदा आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी नीता देवी अपने अनुभव के जरिए पंचायत की अन्य महिलाओं को आधुनिक और जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका लक्ष्य महिलाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर आय बढ़ाना है। भविष्य में खेती का क्षेत्र बढ़ाने, ड्रैगन फ्रूट का जैविक प्रमाणीकरण कराने और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से बड़े बाजारों में सामूहिक विपणन करने की योजना है।