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नागपंचमी पर पूजे गए नाग देवता
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:25 AM IST
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नागपंचमी का पर्व रविवार को जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर जगह-जगह शिवभक्तों ने नागदेवता को दूध पिलाकर पुण्य अर्जित किया। शाम को निर्धारित स्थलों पर बहनों द्वारा फेंकी गई गुड़िया की भाइयों ने पिटाई कर पर्व की परंपरा को कायम रखा। इसके बाद देर रात तक झूले पर गाए गए कजरी गीतों से गांव गुलजार रहे।
भगवान भोले नाथ की गले की शोभा बढ़ाने वाले नाग के पूजन का पर्व नागपंचमी रविवार को जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। सुबह शिवभक्तों ने स्नान करने के बाद घरों, शिवालयों में भगवान भोलेनाथ की भक्ति भाव से पूजा की। इसके बाद घर, खेत या नागों के दिखने वाले स्थानों पर गाय का दूध पीने के लिए रखते हुए मनवांछित फल की कामना की। इसके अलावा दरवाजे पर पहुंचने वाले सपेरों के सर्प का दर्शन भी किया।
शाम को लगभग छह बजे पर्व की परंपरा को कायम रखते हुए बहन-बेटियों ने घर के कपड़ों से बनाई गई गुड़िया को निर्धारित स्थलों पर फेंककर अपने-अपने भाइयों को पान का बीड़ा खिलाया और उनके दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने बहनों द्वारा फेंकी गई गुड़िया को परंपरागत तरीके से हरे डंडों से पीटा। गुड़िया फेंकने के बाद घर के दरवाजों, पड़ोस में स्थित नीम, पीपल की डालों में पड़े झूलों में महिलाएं देर रात तक झूलीं।
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खेतों में दूध छिड़ककर की कामना
नागपंचमी पर्व के दिन नागों को दूध पिलाने, भगवान शिव को दुग्ध स्नान कराने के अलावा खेतों में दूब से दूध छिड़कने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस परंपरा का निर्वहन रविवार को भी लोगों ने किया। सुबह स्नान कर नाग देवता को दूध पिलाने के बाद लोग शुद्ध स्थान की दूब और गाय का दूध लेकर अपने सभी खेतों पर गए। खेतों में दूब से दूध छिड़कर लोगों ने भरपूर पैदावार की कामना की।
कजलिया के आज खोदेंगी मिट्टी
नागपंचमी पर्व के ठीक दूसरे दिन सुबह कजलिया की बुवाई करने के लिए खेतों और तालाबों से मिट्टी खोदी जाती है। इसमें बोई गई कजलिया को रक्षा बंधन के दिन भाइयों के कान में खोसकर बहनें उनके दीर्घायु की कामना करती हैं। कजलिया की मिट्टी खोदे जाने के लिए बहन-बेटियां आज कजरी गीत गाते हुए खेत से मिट्टी लाने के लिए जाएंगी।
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भगवान भोले नाथ की गले की शोभा बढ़ाने वाले नाग के पूजन का पर्व नागपंचमी रविवार को जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। सुबह शिवभक्तों ने स्नान करने के बाद घरों, शिवालयों में भगवान भोलेनाथ की भक्ति भाव से पूजा की। इसके बाद घर, खेत या नागों के दिखने वाले स्थानों पर गाय का दूध पीने के लिए रखते हुए मनवांछित फल की कामना की। इसके अलावा दरवाजे पर पहुंचने वाले सपेरों के सर्प का दर्शन भी किया।
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शाम को लगभग छह बजे पर्व की परंपरा को कायम रखते हुए बहन-बेटियों ने घर के कपड़ों से बनाई गई गुड़िया को निर्धारित स्थलों पर फेंककर अपने-अपने भाइयों को पान का बीड़ा खिलाया और उनके दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने बहनों द्वारा फेंकी गई गुड़िया को परंपरागत तरीके से हरे डंडों से पीटा। गुड़िया फेंकने के बाद घर के दरवाजों, पड़ोस में स्थित नीम, पीपल की डालों में पड़े झूलों में महिलाएं देर रात तक झूलीं।
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खेतों में दूध छिड़ककर की कामना
नागपंचमी पर्व के दिन नागों को दूध पिलाने, भगवान शिव को दुग्ध स्नान कराने के अलावा खेतों में दूब से दूध छिड़कने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस परंपरा का निर्वहन रविवार को भी लोगों ने किया। सुबह स्नान कर नाग देवता को दूध पिलाने के बाद लोग शुद्ध स्थान की दूब और गाय का दूध लेकर अपने सभी खेतों पर गए। खेतों में दूब से दूध छिड़कर लोगों ने भरपूर पैदावार की कामना की।
कजलिया के आज खोदेंगी मिट्टी
नागपंचमी पर्व के ठीक दूसरे दिन सुबह कजलिया की बुवाई करने के लिए खेतों और तालाबों से मिट्टी खोदी जाती है। इसमें बोई गई कजलिया को रक्षा बंधन के दिन भाइयों के कान में खोसकर बहनें उनके दीर्घायु की कामना करती हैं। कजलिया की मिट्टी खोदे जाने के लिए बहन-बेटियां आज कजरी गीत गाते हुए खेत से मिट्टी लाने के लिए जाएंगी।