{"_id":"58cad6384f1c1ba30c32a4aa","slug":"manerega-job-card","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढाई लाख मजदूरों को मिलेगा काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ढाई लाख मजदूरों को मिलेगा काम
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Thu, 16 Mar 2017 11:45 PM IST
विज्ञापन
kaushambi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के पौने दो लाख जॉबकार्ड धारकों को जल्द ही रोजगार मिलेगा। आठ महीने से इन मजदूरों को काम नहीं मिल रहा था। मजदूरी अटकने की वजह से काम प्रभावित हुआ था। मजदूरों को भुगतान हो चुका है। मजदूरों को दिहाड़ी बांटने के बाद डीसी मनरेगा ने सभी कार्ड धारक मजदूरों को घर बैठे काम देने की तैयारी एक बार फिर तेज कर दी है। इसके लिए उन्होंने बीडीओ व एडीओ के साथ बैठक भी की है। रणनीति बनाई गई है कि एक हफ्ते के भीतर मनरेगा का काम शुरू करा दिया जाए।
मनरेगा मस्टर रोल फीडिंग व जॉबकार्ड धारक मजदूरों के खाते में मजदूरी भेजने का काम ऑनलाइन हो गया है। मनरेगा में हो रही गड़बड़ी रोकने के लिए शासन द्वारा उठाए गए इस कदम से काम करने वाले मजदूरों की समस्या बढ़ गई थी। वर्ष 2015-16 व 16-17 में काम करने वाले लगभग 25 हजार मजदूरों का भुगतान मनरेगा के तहत समय पर नहीं हो सका। इसके चलते गांवों के मजदूरों का विश्वास उठा गया था और उन्होंने काम करना बंद कर दिया था। हालात यह हो गए थे कि मनरेगा में काम करने के लिए प्रधान व सचिवों को मजदूर ढूढ़े नहीं मिल रहे थे। आठ माह बाद वर्ष 2017 में जब मजदूरों के खाते में भुगतान आया तो उन्होंने राहत की सांस ली। बकाए का भुगतान कराने के बाद अब गांव-गांव मनरेगा के अन्तर्गत काम शुरू कराने की कवायद तेज हो गई है। बुधवार की शाम डीसी मनरेगा गजेंद्र तिवारी ने सभी ब्लॉकों के बीडीओ व एडीओ पंचायत के साथ बैठक कर गांवों में सक्रिय मजदूरों को रोजगार देने का निर्देश दिया है। इससे साफ हो गया है कि अब मनरेगा मजदूरों को काम के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
7152 मजदूर कर रहे काम
मनरेगा अन्तर्गत लगभग पौने दो लाख जॉब कार्ड धारक हैं। मौजूदा समय में 286 ग्राम सभाओं में 1315 जगहों पर कुल 7152 मजदूर काम पर लगे हैं। बाकी की 212 ग्राम सभाओं में काम ही नहीं शुरू हो सका है। यहां के मजदूरों को रोजगार देने की कवायद तेज कर दी गई है।
विज्ञापन
13 दिन में पूरा करना है 25 फीसदी लक्ष्य
मनरेगा अन्तर्गत साल भर में 11 लाख 63 हजार मानव दिवस पूरा करने का लक्ष्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया था। साल के आखिरी महीने में महज 13 दिन शेष बचे हैं और महज आठ लाख 70 हजार मानव दिवस सृजित हो सके हैं। ऐसे में जिले के जिम्मेदारों के सामने 25 फीसदी लक्ष्य 13 दिन के भीतर पूरा कराने की चुनौती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा का लक्ष्य पूरा हो पाता है या फिर अधूरा ही रह जाएगा?
मनरेगा का भुगतान देर से आने के चलते काम में कुछ बाधा आई है। लक्ष्य पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं है। इसके लिए सभी बीडीओ व एडीओ पंचायत को निर्देशित कर दिया गया है। माह के अंत तक हर हाल में लक्ष्यपूर्ति कर ली जाएगी।
गजेंद्र तिवारी, डीसी मनरेगा
विज्ञापन
मनरेगा मस्टर रोल फीडिंग व जॉबकार्ड धारक मजदूरों के खाते में मजदूरी भेजने का काम ऑनलाइन हो गया है। मनरेगा में हो रही गड़बड़ी रोकने के लिए शासन द्वारा उठाए गए इस कदम से काम करने वाले मजदूरों की समस्या बढ़ गई थी। वर्ष 2015-16 व 16-17 में काम करने वाले लगभग 25 हजार मजदूरों का भुगतान मनरेगा के तहत समय पर नहीं हो सका। इसके चलते गांवों के मजदूरों का विश्वास उठा गया था और उन्होंने काम करना बंद कर दिया था। हालात यह हो गए थे कि मनरेगा में काम करने के लिए प्रधान व सचिवों को मजदूर ढूढ़े नहीं मिल रहे थे। आठ माह बाद वर्ष 2017 में जब मजदूरों के खाते में भुगतान आया तो उन्होंने राहत की सांस ली। बकाए का भुगतान कराने के बाद अब गांव-गांव मनरेगा के अन्तर्गत काम शुरू कराने की कवायद तेज हो गई है। बुधवार की शाम डीसी मनरेगा गजेंद्र तिवारी ने सभी ब्लॉकों के बीडीओ व एडीओ पंचायत के साथ बैठक कर गांवों में सक्रिय मजदूरों को रोजगार देने का निर्देश दिया है। इससे साफ हो गया है कि अब मनरेगा मजदूरों को काम के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
विज्ञापन
7152 मजदूर कर रहे काम
मनरेगा अन्तर्गत लगभग पौने दो लाख जॉब कार्ड धारक हैं। मौजूदा समय में 286 ग्राम सभाओं में 1315 जगहों पर कुल 7152 मजदूर काम पर लगे हैं। बाकी की 212 ग्राम सभाओं में काम ही नहीं शुरू हो सका है। यहां के मजदूरों को रोजगार देने की कवायद तेज कर दी गई है।
विज्ञापन
13 दिन में पूरा करना है 25 फीसदी लक्ष्य
मनरेगा अन्तर्गत साल भर में 11 लाख 63 हजार मानव दिवस पूरा करने का लक्ष्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया था। साल के आखिरी महीने में महज 13 दिन शेष बचे हैं और महज आठ लाख 70 हजार मानव दिवस सृजित हो सके हैं। ऐसे में जिले के जिम्मेदारों के सामने 25 फीसदी लक्ष्य 13 दिन के भीतर पूरा कराने की चुनौती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा का लक्ष्य पूरा हो पाता है या फिर अधूरा ही रह जाएगा?
मनरेगा का भुगतान देर से आने के चलते काम में कुछ बाधा आई है। लक्ष्य पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं है। इसके लिए सभी बीडीओ व एडीओ पंचायत को निर्देशित कर दिया गया है। माह के अंत तक हर हाल में लक्ष्यपूर्ति कर ली जाएगी।
गजेंद्र तिवारी, डीसी मनरेगा