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हड़ताल ने रोकी राजस्व कार्य की रफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 16 Sep 2016 12:46 AM IST
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लेखपालों की हड़ताल से भूमि खरीद से लेकर उसकी पैमाइश, हिस्सा फाट आदि का कार्य तहसील में ठप हो गया है। इसके अलावा खसरा, खतौनी का सत्यापन का काम भी बंद है। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदक तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। उधर लेखपाल हैं कि वह छह सूत्री मांगों को पूरा कराने की जिद पर 23 दिन से अड़े हुए हैं।
जिले की तीनों तहसीलों के लेखपाल 23 अगस्त से कलमबंद हड़ताल पर हैं। लेखपालों की मांगे फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही हैं। वहीं लेखपाल भी किसी कीमत पर हड़ताल वापस लेने का नाम नहीं ले रहे हैं। 23 दिन से कलमबंद हड़ताल होने से लेखपालों से जुड़े सारे काम काज ठप हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति भूमि संबंधी मामलों की है। हड़ताल के चलते लोगों को भूमि संबंधी दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। दस्तावेज और पैमाइश के अभाव में खरीद का कामकाज भी ठप है। इससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। जिनकी नौकरी लग गई है उनका सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है।
सत्यापन बगैर बंदियों की नहीं हो पा रही जमानत
लेखपालों की कलमबंद हड़ताल होने से जमानत मिलने के बाद भी कई बंदी जेल से रिहा नहीं हो पा रहे हैं। पचास हजार से अधिक की जमानत में लगाए गए भूमि संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। दस्तावेज प्रमाणित होने के अभाव में बंदियों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में न्यायालय से जमानत पा चुके कैदियों पर एक-एक दिन जेल में भारी पड़ रहा है।
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वहीं लेखपाल संघ के अध्यक्ष रोशन लाल यादव का कहना है कि जिले का लेखपाल तभी हड़ताल से वापस लौटेगा जब सूबे की सरकार उनकी मांगों पर गहनता से विचार करे।
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जिले की तीनों तहसीलों के लेखपाल 23 अगस्त से कलमबंद हड़ताल पर हैं। लेखपालों की मांगे फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही हैं। वहीं लेखपाल भी किसी कीमत पर हड़ताल वापस लेने का नाम नहीं ले रहे हैं। 23 दिन से कलमबंद हड़ताल होने से लेखपालों से जुड़े सारे काम काज ठप हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति भूमि संबंधी मामलों की है। हड़ताल के चलते लोगों को भूमि संबंधी दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। दस्तावेज और पैमाइश के अभाव में खरीद का कामकाज भी ठप है। इससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। जिनकी नौकरी लग गई है उनका सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है।
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सत्यापन बगैर बंदियों की नहीं हो पा रही जमानत
लेखपालों की कलमबंद हड़ताल होने से जमानत मिलने के बाद भी कई बंदी जेल से रिहा नहीं हो पा रहे हैं। पचास हजार से अधिक की जमानत में लगाए गए भूमि संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। दस्तावेज प्रमाणित होने के अभाव में बंदियों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में न्यायालय से जमानत पा चुके कैदियों पर एक-एक दिन जेल में भारी पड़ रहा है।
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वहीं लेखपाल संघ के अध्यक्ष रोशन लाल यादव का कहना है कि जिले का लेखपाल तभी हड़ताल से वापस लौटेगा जब सूबे की सरकार उनकी मांगों पर गहनता से विचार करे।