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Kaushambi News: यूट्यूब से सीखा अपहरण का तरीका
Mon, 07 Apr 2025 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 07 Apr 2025 01:14 AM IST
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पुलिस की गिरफ्त में आए अपहर्ताओं ने पूछताछ के दौरान बताया कि उन्होंने अपहरण के लिए यूट्यूब देखकर तैयारी की थी। जिससे कि वह पुलिस की पकड़ में ना आ सकें। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट व यूट्यूब से एक दर्जन से अधिक अपहरण करने के तरीके खोजे। सबसे सटीक तरीका अपहरण के बाद गाड़ी बदलने, नींद की गोली खिलाने और फिर किस्तों में फिरौती मांगना लगा। इस पर इन्होंने योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया, लेकिन पुलिस की सक्रियता से पकड़े गए। जिले में एक दशक से अपहरण जैसी घटना नहीं हुई। इससे पूर्व करारी के खोजवापुर से एक युवक का अपहरण किया गया था। बाद में मंझनपुर के खोजवापुर में उसका शव मिला था।
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नींद की गोली खिलाकर किशोर को कर दिया था अचेत
अपहृत किशोर दिव्यांग है। इसलिए अपहर्ताओं ने उसे निशाना बनाया। अपहरण के बाद प्रतीक को नींद की गोली खिला दी। दवा के प्रभाव से प्रतीक सोता रहा। इससे अपहर्ताओं को उसे कहीं भी ले जाने में कोई परेशानी नहीं हुई।
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पुलिस को चकमा देने के लिए बदली थीं गाड़ियां
अपहर्ताओं ने जब प्रतीक को लेकर भागे। इसी दौरान गांव के दो लोगों ने उनको देख लिया। फिर थोड़ी दूर खड़ी सफेद अपाचे में बैठक वे भागे थे। जिन लोगों ने उन्हें देखा उनसे मिली जानकारी के बाद पुलिस को अंदेशा था कि अपहर्ता गाड़ी बदल सकते हैं। पुलिस का यह अंदाजा सटीक निकला। अपहर्ताओं ने कुछ दूर जाने के बाद अपाचे छोड़ दी और चार पहिया वाहन से लेकर आगे बढ़े। पुलिस की नाकाबंदी की वजह से उनको कड़क शाह की दरगाह के पास रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा और वे पकड़े गए।
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सुनने व बोलने की कम थी क्षमता
प्रतीक विशेष बच्चा था। ऐसे में उसका परिवार के लोग खास ख्याल रखते थे। वह कक्षा पांच का विद्यार्थी था। उसका नामांकन गांव के प्राथमिक विद्यालय में कराया गया था। पिता भारत के मुताबिक प्रतीक स्पष्ट बोल भी नहीं पाता था। उसके सुनने की क्षमता भी कम थी। तीन भाई-बहन में प्रतीक मझला था। बड़ा भाई आर्यन कक्षा सात और छोटी बहन महक चौथी कक्षा में पढ़ती है।
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दो माह पहले लगा था सीसीटीवी
भारतलाल ने बताया कि उनका छोटा भाई मुंबई में रहता है। दो माह पहले घर पर सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाया गया था। घटना के दौरान सीसीटीवी का मुंह दूसरी तरह घूमा था। ऐसे में घटना रिकार्ड नहीं हो सकी।
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नींद की गोली खिलाकर किशोर को कर दिया था अचेत
अपहृत किशोर दिव्यांग है। इसलिए अपहर्ताओं ने उसे निशाना बनाया। अपहरण के बाद प्रतीक को नींद की गोली खिला दी। दवा के प्रभाव से प्रतीक सोता रहा। इससे अपहर्ताओं को उसे कहीं भी ले जाने में कोई परेशानी नहीं हुई।
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पुलिस को चकमा देने के लिए बदली थीं गाड़ियां
अपहर्ताओं ने जब प्रतीक को लेकर भागे। इसी दौरान गांव के दो लोगों ने उनको देख लिया। फिर थोड़ी दूर खड़ी सफेद अपाचे में बैठक वे भागे थे। जिन लोगों ने उन्हें देखा उनसे मिली जानकारी के बाद पुलिस को अंदेशा था कि अपहर्ता गाड़ी बदल सकते हैं। पुलिस का यह अंदाजा सटीक निकला। अपहर्ताओं ने कुछ दूर जाने के बाद अपाचे छोड़ दी और चार पहिया वाहन से लेकर आगे बढ़े। पुलिस की नाकाबंदी की वजह से उनको कड़क शाह की दरगाह के पास रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा और वे पकड़े गए।
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सुनने व बोलने की कम थी क्षमता
प्रतीक विशेष बच्चा था। ऐसे में उसका परिवार के लोग खास ख्याल रखते थे। वह कक्षा पांच का विद्यार्थी था। उसका नामांकन गांव के प्राथमिक विद्यालय में कराया गया था। पिता भारत के मुताबिक प्रतीक स्पष्ट बोल भी नहीं पाता था। उसके सुनने की क्षमता भी कम थी। तीन भाई-बहन में प्रतीक मझला था। बड़ा भाई आर्यन कक्षा सात और छोटी बहन महक चौथी कक्षा में पढ़ती है।
दो माह पहले लगा था सीसीटीवी
भारतलाल ने बताया कि उनका छोटा भाई मुंबई में रहता है। दो माह पहले घर पर सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाया गया था। घटना के दौरान सीसीटीवी का मुंह दूसरी तरह घूमा था। ऐसे में घटना रिकार्ड नहीं हो सकी।