{"_id":"fb0c9c78aad91a0e4cd93aec4708e30e","slug":"kaushambi-news-hindi-news-129","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘हमसे का भूूल हुई जो ये सजा हमका मिली...’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘हमसे का भूूल हुई जो ये सजा हमका मिली...’
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 23 Aug 2015 11:34 PM IST
विज्ञापन
हिंदी फिल्म जनता हवलदार का गीत ‘हमसे का भूल हुई जो ये सजा हमका मिली, अब तो चारों तरफ बंद है दुनिया की गली...’ सैनी के अफजलपुर सातों गांव के समीप झाड़ी में मिली एक नवजात बच्ची पर बिलकुल सटीक है। नौ माह तक कोख में रखने के बाद कठोर बनी ममता के आंचल ने उसे दूर फेंक दिया। झाड़ी में बच्ची की सिसकियां और चीख सुन आस-पास के लोग मौके पर पहुंचे। तमाशबीन बनी भीड़ के बीच खड़ी एक औरत की ममता चीख पड़ी। बच्ची को उठाकर वह कपडे़ में लपेट कर अस्पताल ले गई और उसका उपचार कराया। उसने बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी ली है।
सैनी कोतवाली क्षेत्र के अफजलपुर सातो गांव के समीप शनिवार की शाम झाड़ी से एकाएक बच्ची की किलकारी निकल पड़ी। किलकारी सुन आस-पास खेतों से लौट रहे गांव के लोग मौके पर पहुंचे।
जन्म देने के तुरंत बाद नवजात बच्ची को किसने झाड़ी में फेंका, इसे लेकर लोग घंटों चर्चा करते रहे। लावारिस बच्ची का सहारा बनने के लिए लोग एक दूसरे को निहारते रहे। लोगों की इस चुप्पी पर शायद नवजात बच्ची अपनी किलकारी के माध्यम से समाज के लोगों से यह सवाल कर रही थी, ‘हमसे का भूल हुई जो यह सजा हमका मिली, अब तो चारों तरफ बंद है दुनिया की गली’। मगर बच्ची के सवाल का जवाब वहां मौजूद भीड़ के पास नहीं था। सब चुप थे। चर्चा सिर्फ इस पर हो रही थी कि नौ माह तक कोख में रखने और जन्म देने के बाद उसे क्यों झाड़ी में फेंका गया। सब अपनी तरह से जवाब भी दे रहे थे। कोई कह रहा था कि शायद पाप छुपाने के लिए किसी ने बच्ची को यहां फेंक दिया। मगर बच्ची को उठाने कोई आगे नहीं बढ़ रहा था। अचानक भीड़ से निकली गांव की सुरजा देवी पत्नी सूरज पाल यादव ने बच्ची को गोद में उठा लिया। उसे उपचार के लिए वह नजदीकी अस्पताल ले गई। मामले की जानकारी पुलिस को देते हुए सुरजा देवी बच्ची के लिए मां बन गई। बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसने ले ली है।
विज्ञापन
‘ ’
विज्ञापन
सैनी कोतवाली क्षेत्र के अफजलपुर सातो गांव के समीप शनिवार की शाम झाड़ी से एकाएक बच्ची की किलकारी निकल पड़ी। किलकारी सुन आस-पास खेतों से लौट रहे गांव के लोग मौके पर पहुंचे।
विज्ञापन
जन्म देने के तुरंत बाद नवजात बच्ची को किसने झाड़ी में फेंका, इसे लेकर लोग घंटों चर्चा करते रहे। लावारिस बच्ची का सहारा बनने के लिए लोग एक दूसरे को निहारते रहे। लोगों की इस चुप्पी पर शायद नवजात बच्ची अपनी किलकारी के माध्यम से समाज के लोगों से यह सवाल कर रही थी, ‘हमसे का भूल हुई जो यह सजा हमका मिली, अब तो चारों तरफ बंद है दुनिया की गली’। मगर बच्ची के सवाल का जवाब वहां मौजूद भीड़ के पास नहीं था। सब चुप थे। चर्चा सिर्फ इस पर हो रही थी कि नौ माह तक कोख में रखने और जन्म देने के बाद उसे क्यों झाड़ी में फेंका गया। सब अपनी तरह से जवाब भी दे रहे थे। कोई कह रहा था कि शायद पाप छुपाने के लिए किसी ने बच्ची को यहां फेंक दिया। मगर बच्ची को उठाने कोई आगे नहीं बढ़ रहा था। अचानक भीड़ से निकली गांव की सुरजा देवी पत्नी सूरज पाल यादव ने बच्ची को गोद में उठा लिया। उसे उपचार के लिए वह नजदीकी अस्पताल ले गई। मामले की जानकारी पुलिस को देते हुए सुरजा देवी बच्ची के लिए मां बन गई। बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसने ले ली है।
विज्ञापन
‘ ’