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वर्ष 1998 के मध्याविधि चुनाव में दूसरे पायदान में पहुंच गई थी पार्टी
Sun, 07 Apr 2019 12:55 AM IST
shailendra Kumar
kaushambi bureau
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Published by: shailendra Kumar
Updated Sun, 07 Apr 2019 12:55 AM IST
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मंझनपुर। आजादी के बाद हुए दस लोक सभा चुनावों मे पहली बार भाजपा ने वर्ष 1991 के चुनाव में अपने सिम्बल पर जिले की सक्रिय राजनीति में कदम रखा। हालांकि इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मंजू चंद्र को हार का समाना करना पड़ा। लेकिन वर्ष 1996 का पहला ऐसा चुनाव था, जिसमें राम मंदिर लहर ने भाजपा को फतह दिलाई। यह सत्ता का सुख पार्टी के लिए महज दो साल रहा और वर्ष 1998 के चुनाव में निवर्तमान सांसद रहे अमृतलाल भारतीय को दूसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा।
90 के दशक में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद राम मंदिर आंदोलन ने धार पकड़ी। यह वह दौर था जब भाजपा इसे पूरी तरह से कैश कराने में जुटी थी। भाजपा के पास सिर्फ अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का मुद्दा था। हिन्दु मतों को एकजुट करने के लिए भाजपा का यह प्रयास वर्ष 1996 के लोक सभा चुनाव में काफी हद तक कारगर साबित हुआ। उस चुनाव में इलाहाबाद और फतेहपुर जिले की एक-एक विधान सभाओं को मिलाकर चायल संसदीय सीट थी।
भाजपा ने यहां अमृत लाल भारतीय को प्रत्याशी बनाया। भाजपा को रोकने के लिए सपा ने सुरेश पासी और बसपा ने शशि प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा। कांग्रेस ने भी सिराथू से विधायक रहे पुरुषोत्तम लाल को प्रत्याशी बनाया। इसके अलावा भाजपा को रोकने के लिए अपना दल सहित 21 निर्दल प्रत्याशियों ने पर्चा भरा। इस सारी खेमेबंदी के बीच भाजपा के अमृतलाल भारतीय 131839 मत पाकर विजई हुए। दूसरे स्थान पर रही सपा को 100260 व तीसरे पर रही बसपा को 99847 मत मिला। कांग्रेस प्रत्याशी को महज 2.66 प्रतिशत वोट से ही संतोष करना पड़ा।
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वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए या फिर वोट काटने के लिए उतरे 18 प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। इन प्रत्याशियों को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिला था।
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90 के दशक में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद राम मंदिर आंदोलन ने धार पकड़ी। यह वह दौर था जब भाजपा इसे पूरी तरह से कैश कराने में जुटी थी। भाजपा के पास सिर्फ अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का मुद्दा था। हिन्दु मतों को एकजुट करने के लिए भाजपा का यह प्रयास वर्ष 1996 के लोक सभा चुनाव में काफी हद तक कारगर साबित हुआ। उस चुनाव में इलाहाबाद और फतेहपुर जिले की एक-एक विधान सभाओं को मिलाकर चायल संसदीय सीट थी।
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भाजपा ने यहां अमृत लाल भारतीय को प्रत्याशी बनाया। भाजपा को रोकने के लिए सपा ने सुरेश पासी और बसपा ने शशि प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा। कांग्रेस ने भी सिराथू से विधायक रहे पुरुषोत्तम लाल को प्रत्याशी बनाया। इसके अलावा भाजपा को रोकने के लिए अपना दल सहित 21 निर्दल प्रत्याशियों ने पर्चा भरा। इस सारी खेमेबंदी के बीच भाजपा के अमृतलाल भारतीय 131839 मत पाकर विजई हुए। दूसरे स्थान पर रही सपा को 100260 व तीसरे पर रही बसपा को 99847 मत मिला। कांग्रेस प्रत्याशी को महज 2.66 प्रतिशत वोट से ही संतोष करना पड़ा।
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वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए या फिर वोट काटने के लिए उतरे 18 प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। इन प्रत्याशियों को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिला था।