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Kaushambi News: स्वच्छता से विकास तक...सड़क निर्माण के काम आएगा प्लास्टिक कचरा
Thu, 11 Jun 2026 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 11 Jun 2026 12:06 AM IST
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नेवादा ब्लॉक के पुरखास में लगा प्लांट। संवाद
प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में प्लास्टिक यूनिट मैनेजमेंट प्लान के तहत अभिनव पहल की जा रही है। प्लास्टिक कचरे को प्रॉसेस कर सड़क निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। नेवादा ब्लॉक के पुरखास स्थित प्लांट में काम शुरू हो गया है।
स्वच्छता से विकास तक की सोच को आगे बढ़ाते हुए ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों में चल रहे सफाई अभियानों के दौरान एकत्र सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे को अलग कर शटरिंग मशीन की मदद से छोटे टुकड़ों में काटा जा रहा है। अब तक करीब सात कुंतल प्लास्टिक एकत्र किया जा चुका है। जैसे ही 10 टन प्लास्टिक इकट्ठा हो जाएगा, इसकी प्रॉसेसिंग शुरू कर दी जाएगी। प्लास्टिक को पिघलाकर सड़क निर्माण सामग्री में मिलाया जाएगा। कोलतार के विकल्प के तौर पर इसका इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे पारंपरिक निर्माण सामग्री पर निर्भरता कम होगी। इस तकनीक को पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जहां एक ओर प्लास्टिक कचरे का प्रभावी निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन में भी सुधार आने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार सिल्वर कोटेड पॉलिथीन को रिसाइकल नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे अलग रखा जा रहा है।
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यह योजना ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे के पुन: उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लक्ष्य पूरा होने के बाद इससे बनी सड़कें अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल साबित होंगी।- अनिल कुमार, डीपीआरओ।
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स्वच्छता से विकास तक की सोच को आगे बढ़ाते हुए ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों में चल रहे सफाई अभियानों के दौरान एकत्र सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे को अलग कर शटरिंग मशीन की मदद से छोटे टुकड़ों में काटा जा रहा है। अब तक करीब सात कुंतल प्लास्टिक एकत्र किया जा चुका है। जैसे ही 10 टन प्लास्टिक इकट्ठा हो जाएगा, इसकी प्रॉसेसिंग शुरू कर दी जाएगी। प्लास्टिक को पिघलाकर सड़क निर्माण सामग्री में मिलाया जाएगा। कोलतार के विकल्प के तौर पर इसका इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
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इससे पारंपरिक निर्माण सामग्री पर निर्भरता कम होगी। इस तकनीक को पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जहां एक ओर प्लास्टिक कचरे का प्रभावी निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन में भी सुधार आने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार सिल्वर कोटेड पॉलिथीन को रिसाइकल नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे अलग रखा जा रहा है।
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यह योजना ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे के पुन: उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लक्ष्य पूरा होने के बाद इससे बनी सड़कें अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल साबित होंगी।- अनिल कुमार, डीपीआरओ।

नेवादा ब्लॉक के पुरखास में लगा प्लांट। संवाद