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27 दिन में हत्या की आठ वारदातों से दहला दोआबा
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27 दिन में हत्या की आठ वारदातों से दहला दोआबा
चुनावी दौर में बेखौफ हुए बदमाश, खुलासा करने में छूट रहा खाकी का पसीना
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दोआबा में बदमाश पूरी तरह से बेखौफ हो गए हैं। वह खुलेआम खून की होली खेल रहे हैं। 27 दिन के भीतर तीन महिलाओं सहित आठ लोगों को मौत की नींद सुला चुके हैं। सनसनीखेज वारदातों का खुलासा करने में पुलिस को पसीना छूट रहा है।
पूरामुफ्ती कोतवाली क्षेत्र के उजिहिनी खालसा गांव निवासी इमरान जाफरी की सोमवार रात घर में घुसकर बदमाशों ने हत्या कर दी थी। इस वारदात का खुलासा नहीं हो पाया और शुक्रवार रात पइंसा के कइमा गांव में निंबूलाल को मौत के घाट उतार दिया गया। इससे पहले चार अप्रैल को सरायअकिल इलाके के नंदा का पूरा गांव में बालू घाट से पिता को खाना देकर लौटते वक्त ललित कुमार को ट्रक से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया था। छह अप्रैल को सैनी इलाके के दरियापुरजीता निवासी प्रमोद कुमार पुत्र श्यामबिहारी की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसका शव इलाके के ही कोरियों गांव में पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका दिया गया था। सात अप्रैल को ट्रेन पर सवार होकर झारखंड से दिल्ली जा रहे बिहार के नवादा निवासी अमन पुत्र दिग्विजय की भरवारी में चलती ट्रेन से फेंककर हत्या कर दी गई थी। 12 अप्रैल को सरायअकिल के तिल्हापुर में ब्याही प्रियंका को ससुराल वालों ने ही मौत की नींद सुला दिया था। 13 अप्रैल को एक अज्ञात महिला की हत्या कर उसकी लाश चरवा के पकसराई गांव में नहर किनारे फेंक दी गई थी। मृतका की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। 23 अप्रैल को करारी के अरका महावीरपुर गांव की शीलू को उसके ससुराल वालों ने गला घोटकर मार डाला था। इन घटनाओं ने जिले के लोगों को भयभीत करके रख दिया है। उधर, पुलिस अफसर अपनी पीठ खुद से थपथपाने में मस्त हैं।
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चुनावी दौर में बेखौफ हुए बदमाश, खुलासा करने में छूट रहा खाकी का पसीना
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दोआबा में बदमाश पूरी तरह से बेखौफ हो गए हैं। वह खुलेआम खून की होली खेल रहे हैं। 27 दिन के भीतर तीन महिलाओं सहित आठ लोगों को मौत की नींद सुला चुके हैं। सनसनीखेज वारदातों का खुलासा करने में पुलिस को पसीना छूट रहा है।
पूरामुफ्ती कोतवाली क्षेत्र के उजिहिनी खालसा गांव निवासी इमरान जाफरी की सोमवार रात घर में घुसकर बदमाशों ने हत्या कर दी थी। इस वारदात का खुलासा नहीं हो पाया और शुक्रवार रात पइंसा के कइमा गांव में निंबूलाल को मौत के घाट उतार दिया गया। इससे पहले चार अप्रैल को सरायअकिल इलाके के नंदा का पूरा गांव में बालू घाट से पिता को खाना देकर लौटते वक्त ललित कुमार को ट्रक से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया था। छह अप्रैल को सैनी इलाके के दरियापुरजीता निवासी प्रमोद कुमार पुत्र श्यामबिहारी की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसका शव इलाके के ही कोरियों गांव में पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका दिया गया था। सात अप्रैल को ट्रेन पर सवार होकर झारखंड से दिल्ली जा रहे बिहार के नवादा निवासी अमन पुत्र दिग्विजय की भरवारी में चलती ट्रेन से फेंककर हत्या कर दी गई थी। 12 अप्रैल को सरायअकिल के तिल्हापुर में ब्याही प्रियंका को ससुराल वालों ने ही मौत की नींद सुला दिया था। 13 अप्रैल को एक अज्ञात महिला की हत्या कर उसकी लाश चरवा के पकसराई गांव में नहर किनारे फेंक दी गई थी। मृतका की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। 23 अप्रैल को करारी के अरका महावीरपुर गांव की शीलू को उसके ससुराल वालों ने गला घोटकर मार डाला था। इन घटनाओं ने जिले के लोगों को भयभीत करके रख दिया है। उधर, पुलिस अफसर अपनी पीठ खुद से थपथपाने में मस्त हैं।
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