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Kaushambi News: सहूलियत ने बढ़ाई ऑनलाइन खरीदारी, घटी दुकानों की कमाई
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मधु वर्मा
डिजिटल जमाने में लोग अब ऑनलाइन शॉपिंग का विकल्प चुन रहे हैं। इससे फुटकर व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं, सात दिन में सामान की वापसी और रिफंड की सुविधा से लोगों का रुझान ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ा है। व्यापारियों के मुताबिक, हर रोज जिले में तकरीबन 15 से 20 लाख रुपये से ज्यादा का ऑनलाइन कारोबार हो रहा है।
जिला मुख्यालय के अलावा प्रमुख कस्बों व गांवों में व्यापारी लाखों की पूंजी लगाकर दुकान और बड़े शोरूम खोल रहे हैं। व्यापारियों की उम्मीद होती है कि उनके शोरूम और दुकानों पर ग्राहकों की आमद होगी तो रोजगार को गति मिलेगी लेकिन ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन ने व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
करारी के झल्लर कुशवाहा, गनेश वर्मा, हंसराज सिंह आदि का कहना है कि बाजार में सामान वापस करने में काफी दिक्कतें होती हैं। ऑनलाइन शापिंग करने और सामान वापस करने में सात दिन तक समय मिल जाता है। ऐसे में ऑनलाइन कारोबारी ज्यादा सहूलियत देते हैं।
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व्यापारियों ने मांग की है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानीय वेंडरों को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाए ताकि जिले के व्यापार को भी मजबूती मिल सके। साथ ही सरकार को प्राप्त होने वाला राजस्व स्थानीय स्तर पर दर्ज हो सके।
पहले महिलाओं को खरीदारी करने के लिए साथ में पुरुष को लेकर बाजार जाना पड़ता था। कई बार सामान लेकर घर आने के बाद पसंद न आने पर वापस भी करने जाना पड़ता था। ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ने से लोगों को बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। ऑनलाइन कंपनियों से ही उनकी शॉपिंग हो जाती है। पसंद करने के लिए भी कई विकल्प मिल जाते हैं। इससे महिलाएं अब बाजार जाने से परहेज कर रही हैं।
- सुषमा शानवी
ऑनलाइन सामान मंगाने के बाद यदि पसंद नहीं है तो बदलने की भी सुविधा दी जाती है। वहीं, दुकान से लिया सामान वापस करने जाओ तो कई बार दुकानदार झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में महिलाएं अपने को असहज महसूस करती हैं। वहीं, ऑनलाइन शॉपिंग में पसंद न होने पर खरीदे गए सामान की वापसी हो जाती है और रुपये भी वापस मिल जाते हैं। इससे ऑनलाइन शॉपिंग सबसे ज्यादा पसंद आ रही है।
- मधु वर्मा
ऑनलाइन बिजनेस ऐसी समस्या है जिसके साथ हमें चलना पड़ेगा। राजस्व के दृष्टिकोण से यदि हम देखें तो यह सरकार के लिए बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है जिसकी कोई भी अनदेखा नहीं कर सकता। इसलिए इसमें स्थानीय व्यापारियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- उमेश केसरवानी, नगर अध्यक्ष, राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन
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जिला मुख्यालय के अलावा प्रमुख कस्बों व गांवों में व्यापारी लाखों की पूंजी लगाकर दुकान और बड़े शोरूम खोल रहे हैं। व्यापारियों की उम्मीद होती है कि उनके शोरूम और दुकानों पर ग्राहकों की आमद होगी तो रोजगार को गति मिलेगी लेकिन ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन ने व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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करारी के झल्लर कुशवाहा, गनेश वर्मा, हंसराज सिंह आदि का कहना है कि बाजार में सामान वापस करने में काफी दिक्कतें होती हैं। ऑनलाइन शापिंग करने और सामान वापस करने में सात दिन तक समय मिल जाता है। ऐसे में ऑनलाइन कारोबारी ज्यादा सहूलियत देते हैं।
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व्यापारियों ने मांग की है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानीय वेंडरों को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाए ताकि जिले के व्यापार को भी मजबूती मिल सके। साथ ही सरकार को प्राप्त होने वाला राजस्व स्थानीय स्तर पर दर्ज हो सके।
पहले महिलाओं को खरीदारी करने के लिए साथ में पुरुष को लेकर बाजार जाना पड़ता था। कई बार सामान लेकर घर आने के बाद पसंद न आने पर वापस भी करने जाना पड़ता था। ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ने से लोगों को बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। ऑनलाइन कंपनियों से ही उनकी शॉपिंग हो जाती है। पसंद करने के लिए भी कई विकल्प मिल जाते हैं। इससे महिलाएं अब बाजार जाने से परहेज कर रही हैं।
- सुषमा शानवी
ऑनलाइन सामान मंगाने के बाद यदि पसंद नहीं है तो बदलने की भी सुविधा दी जाती है। वहीं, दुकान से लिया सामान वापस करने जाओ तो कई बार दुकानदार झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में महिलाएं अपने को असहज महसूस करती हैं। वहीं, ऑनलाइन शॉपिंग में पसंद न होने पर खरीदे गए सामान की वापसी हो जाती है और रुपये भी वापस मिल जाते हैं। इससे ऑनलाइन शॉपिंग सबसे ज्यादा पसंद आ रही है।
- मधु वर्मा
ऑनलाइन बिजनेस ऐसी समस्या है जिसके साथ हमें चलना पड़ेगा। राजस्व के दृष्टिकोण से यदि हम देखें तो यह सरकार के लिए बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है जिसकी कोई भी अनदेखा नहीं कर सकता। इसलिए इसमें स्थानीय व्यापारियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- उमेश केसरवानी, नगर अध्यक्ष, राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन