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छोटका गढ़वा का स्कूल शिक्षामित्र के भरोसे
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:30 AM IST
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कौशाम्बी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय छोटका गढ़वा में शिक्षा का स्तर कैसा है। इसे समझने के लिए फिलहाल वहीं जाना होगा। यहां शिक्षक समय से स्कूल नहीं पहुंचते हैं। बच्चों की संख्या आधी भी नहीं रहती है। सभी बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ते हैं। शिक्षामित्र बच्चों को पढ़ाता है और शिक्षक नदारद रहते हैं। ऐसे में सरकारी शिक्षा के बेहतर होने का दावा खोखला साबित हो रहा है। मगर बीएसए और एबीएसए को जानने की फुरसत ही नहीं है।
कागजी कोरम के चलते शिक्षकों की मनमानी की बानगी भर है प्राथमिक विद्यालय छोटका गढ़वा। यहां पर प्रधानाध्यापक मनीष कुमार, सहायक अध्यापक शिवनरेश सिंह, सहायक अध्यापक इरशाद अहमद और शिक्षा मित्र चंद्रप्रकाश पांडेय की तैनाती है। विद्यालय में कक्षा एक से लेकर पांच तक में 84 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल आठ बजे से शुरू होता है। शनिवार को अमर उजाला टीम करीब आठ बजकर दस मिनट पर विद्यालय पहुंची। स्कूल शुरू हो चुका था।
शिक्षा मित्र चंद्रप्रकाश पांडेय बच्चों को पढ़ा रहे थे। बच्चों की संख्या केवल 25 थी। आधे बच्चे भी स्कूल में नहीं थे। अन्य शिक्षक भी स्कूल में नहीं थे। कुछ देर बाद करीब आठ बजकर बीस मिनट पर सहायक अध्यापक शिवनरेश सिंह पहुंचे। इसके बाद टीम वहां पर करीब आधा घंटा रही। मगर इस बीच में प्रधानाध्यापक और दूसरे सहायक अध्यापक नहीं पहुंचे थे। हाल ये है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक शिकायत करते हैं। मगर शिकायत का कोई असर नहीं होता है।
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चूल्हे पर बनता है खाना
प्राथमिक विद्यालय छोटका गढ़वा में गैस सिलेंडर की व्यवस्था नहीं है। यहां पर चूल्हे पर खाना बनता है। विद्यालय में रसोइयां मालती देवी स्कूल खुलने के बाद झाड़ू लगा रही थी। करीब पौने नौ बजे तक मिड डे मील बनने की तैयारी नहीं थी। टीम ने जब गैस सिलेंडर की बावत पूछा तो उसने बताया कि साहब, खाना तो यहां चूल्हे पर बनता है। इसके लिए उसे लकड़ी इकट्ठा करनी पड़ती है।
तो कहां निरीक्षण करते हैं एबीएसए
बीएसएस दलसिंगार यादव ने सभी एबीएसए को विद्यालयों का निरीक्षण करने का आदेश दे रखा है। ऐसे में अगर एबीएसए निरीक्षण करते हैं तो फिर विद्यालयों में अव्यवस्था का माहौल कैसे है, इसे आसानी से समझा जा सकता है। जाहिर है कि एबीएसए का दबाव शिक्षकों पर नहीं है।
ग्राम प्रधान भी बने लापरवाह
ग्राम पंचायत का मुखिया प्रधान होता है। औपचारिक रूप से प्रधान की उसकी ग्राम पंचायत में शिक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही होनी चाहिए। मगर प्रधान खुद ही लापरवाही करते हैं। नतीजा है कि शिक्षक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्राम प्रधान को शिक्षकों की मनमानी की शिकायत एबीएसए और बीएसए से करनी चाहिए। मगर ऐसा हो नहीं रहा है।
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कागजी कोरम के चलते शिक्षकों की मनमानी की बानगी भर है प्राथमिक विद्यालय छोटका गढ़वा। यहां पर प्रधानाध्यापक मनीष कुमार, सहायक अध्यापक शिवनरेश सिंह, सहायक अध्यापक इरशाद अहमद और शिक्षा मित्र चंद्रप्रकाश पांडेय की तैनाती है। विद्यालय में कक्षा एक से लेकर पांच तक में 84 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल आठ बजे से शुरू होता है। शनिवार को अमर उजाला टीम करीब आठ बजकर दस मिनट पर विद्यालय पहुंची। स्कूल शुरू हो चुका था।
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शिक्षा मित्र चंद्रप्रकाश पांडेय बच्चों को पढ़ा रहे थे। बच्चों की संख्या केवल 25 थी। आधे बच्चे भी स्कूल में नहीं थे। अन्य शिक्षक भी स्कूल में नहीं थे। कुछ देर बाद करीब आठ बजकर बीस मिनट पर सहायक अध्यापक शिवनरेश सिंह पहुंचे। इसके बाद टीम वहां पर करीब आधा घंटा रही। मगर इस बीच में प्रधानाध्यापक और दूसरे सहायक अध्यापक नहीं पहुंचे थे। हाल ये है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक शिकायत करते हैं। मगर शिकायत का कोई असर नहीं होता है।
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चूल्हे पर बनता है खाना
प्राथमिक विद्यालय छोटका गढ़वा में गैस सिलेंडर की व्यवस्था नहीं है। यहां पर चूल्हे पर खाना बनता है। विद्यालय में रसोइयां मालती देवी स्कूल खुलने के बाद झाड़ू लगा रही थी। करीब पौने नौ बजे तक मिड डे मील बनने की तैयारी नहीं थी। टीम ने जब गैस सिलेंडर की बावत पूछा तो उसने बताया कि साहब, खाना तो यहां चूल्हे पर बनता है। इसके लिए उसे लकड़ी इकट्ठा करनी पड़ती है।
तो कहां निरीक्षण करते हैं एबीएसए
बीएसएस दलसिंगार यादव ने सभी एबीएसए को विद्यालयों का निरीक्षण करने का आदेश दे रखा है। ऐसे में अगर एबीएसए निरीक्षण करते हैं तो फिर विद्यालयों में अव्यवस्था का माहौल कैसे है, इसे आसानी से समझा जा सकता है। जाहिर है कि एबीएसए का दबाव शिक्षकों पर नहीं है।
ग्राम प्रधान भी बने लापरवाह
ग्राम पंचायत का मुखिया प्रधान होता है। औपचारिक रूप से प्रधान की उसकी ग्राम पंचायत में शिक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही होनी चाहिए। मगर प्रधान खुद ही लापरवाही करते हैं। नतीजा है कि शिक्षक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्राम प्रधान को शिक्षकों की मनमानी की शिकायत एबीएसए और बीएसए से करनी चाहिए। मगर ऐसा हो नहीं रहा है।