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बारिश के बाद बढ़ी उमस, गर्मी से लोग बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:44 AM IST
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दोआबा में झमाझम बारिश के बाद अचानक उमस भरी गर्मी बढ़ गई है। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। यहां तक कि घरों में गर्मी से राहत दिलाने के लिए लगे कूलर, पंखे और एसी सब फेल नजर आ रहे हैं। तीन दिन से पड़ रही गर्मी से लोग परेशान हो चुके हैं।
दोआबा में बुधवार की भोर से शुरू हुई झमाझम बरसात शुक्रवार की दोपहर तक रह-रहकर हुई। इससे जिले वासियों को चिलचिलाती धूप की तपिश से राहत मिल गई। मौसम सुहाना होते ही लोगों के चेहरे खिल उठे। शुक्रवार की दोपहर हुई बरसात के बाद मौसम अचानक साफ हो गया।
चटख धूप होते ही भूमि की गर्मी निकलकर हवा में समाहित होने लगी। इससे जिले भर में उमस फैल गई। उमस भरी गर्मी पड़ने से लोगों का जीना मुहाल हो गया। शुक्रवार की रात लोग पसीने से तरबतर रहे। इस गर्मी से बचने के लिए लोगों को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। लोगों के घरे में लगे पंखे, कूलर, एसी सब फेल नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उसम भरी गर्मी से बचने के लिए दोपहर में बगीचों की शरण ले रहे हैं लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिल रही।
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बारिश के बाद पड़ रही गर्मी से लोगों की नींद तो हराम है ही बदन में दाने निकलने शुरू हो गए हैं। गर्मी के चलते सिर, बांह और पीठ पर निकल रहे दानों ने लोगों की बेचैनी को और बढ़ा दिया है। लोग डाक्टरों के पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं तो वह भी कोई ठोस उपाय नहीं बता पा रहे हैं। चिकित्सक बदन में निकल रहे दानों को कम करने के लिए पाउडर के इस्तेमाल के बारे बता रहे हैं। उनका कहना है कि मौसम के ठंडा होते ही यह दाने अपने आप ठीक हो जाएंगे।
दोआबा में तीन दिन से लगातार चटख धूप और उमस के चलते लोगों में बीमारी ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। गर्मी से व्याकुल लोग उल्टी, दस्त, जुकाम, बुखार जैसी मौसमी बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। यह बीमारियां ज्यादातर गांवों की उन मलिन बस्तियों में फैल रही हैं जहां सफाई का अभाव है। बारिश के बाद गंदगी से उत्पन्न हो रही बदबू और तालाबों के किनारे रहने वाले लोगों में मौसमी बीमारियों का असर अधिक देखने को मिल रहा है। मरीजों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे से जिले की सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल तक में दवा लेने के लिए भीड़ जुट रही है।
अप्रैल माह से शुरू हुई भीषण गर्मी जून के तीसरे सप्ताह तक पड़ी। तपिश और गर्मी से जिले वासियों को बुधवार की भोर झमाझम बारिश के साथ राहत मिली लेकिन शुक्रवार की रात से पड़ रही उमस भरी गर्मी ने तीन माह का दर्द भुला दिया। लोगों का कहना है कि तीन माह की तपिश से इतना कष्ट लोगों को नहीं हुआ जितना कि तीन दिन की गर्मी ने लोगों को व्याकुल कर दिया है। ऐसे में अब लोगों को घनघोर बारिश ही उमस भरी गर्मी से राहत दिला सकेगी। दोआबा वासियों को बारिश का अब बेसब्री से इंतजार है।
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दोआबा में बुधवार की भोर से शुरू हुई झमाझम बरसात शुक्रवार की दोपहर तक रह-रहकर हुई। इससे जिले वासियों को चिलचिलाती धूप की तपिश से राहत मिल गई। मौसम सुहाना होते ही लोगों के चेहरे खिल उठे। शुक्रवार की दोपहर हुई बरसात के बाद मौसम अचानक साफ हो गया।
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चटख धूप होते ही भूमि की गर्मी निकलकर हवा में समाहित होने लगी। इससे जिले भर में उमस फैल गई। उमस भरी गर्मी पड़ने से लोगों का जीना मुहाल हो गया। शुक्रवार की रात लोग पसीने से तरबतर रहे। इस गर्मी से बचने के लिए लोगों को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। लोगों के घरे में लगे पंखे, कूलर, एसी सब फेल नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उसम भरी गर्मी से बचने के लिए दोपहर में बगीचों की शरण ले रहे हैं लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिल रही।
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बारिश के बाद पड़ रही गर्मी से लोगों की नींद तो हराम है ही बदन में दाने निकलने शुरू हो गए हैं। गर्मी के चलते सिर, बांह और पीठ पर निकल रहे दानों ने लोगों की बेचैनी को और बढ़ा दिया है। लोग डाक्टरों के पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं तो वह भी कोई ठोस उपाय नहीं बता पा रहे हैं। चिकित्सक बदन में निकल रहे दानों को कम करने के लिए पाउडर के इस्तेमाल के बारे बता रहे हैं। उनका कहना है कि मौसम के ठंडा होते ही यह दाने अपने आप ठीक हो जाएंगे।
दोआबा में तीन दिन से लगातार चटख धूप और उमस के चलते लोगों में बीमारी ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। गर्मी से व्याकुल लोग उल्टी, दस्त, जुकाम, बुखार जैसी मौसमी बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। यह बीमारियां ज्यादातर गांवों की उन मलिन बस्तियों में फैल रही हैं जहां सफाई का अभाव है। बारिश के बाद गंदगी से उत्पन्न हो रही बदबू और तालाबों के किनारे रहने वाले लोगों में मौसमी बीमारियों का असर अधिक देखने को मिल रहा है। मरीजों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे से जिले की सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल तक में दवा लेने के लिए भीड़ जुट रही है।
अप्रैल माह से शुरू हुई भीषण गर्मी जून के तीसरे सप्ताह तक पड़ी। तपिश और गर्मी से जिले वासियों को बुधवार की भोर झमाझम बारिश के साथ राहत मिली लेकिन शुक्रवार की रात से पड़ रही उमस भरी गर्मी ने तीन माह का दर्द भुला दिया। लोगों का कहना है कि तीन माह की तपिश से इतना कष्ट लोगों को नहीं हुआ जितना कि तीन दिन की गर्मी ने लोगों को व्याकुल कर दिया है। ऐसे में अब लोगों को घनघोर बारिश ही उमस भरी गर्मी से राहत दिला सकेगी। दोआबा वासियों को बारिश का अब बेसब्री से इंतजार है।