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एक हैंडपंप, कैसे बुझे 500 परिवारों की प्यास
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Wed, 20 May 2015 01:35 AM IST
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मंझनपुर (ब्यूरो)। सदर ब्लाक क्षेत्र के मलियनपुर (थांभा अलावलपुर) दलित बस्ती में महीने भर से पानी के लिए हाहाकार मचा है। बस्ती में लगे दो में से एक हैंडपंप महीनों से ध्वस्त पड़े हैं। ऐसे में एक हैंडपंप से पांच सौ परिवारों के सामने लाइन लगाकर पानी भरने की मजबूरी है। आरोप है कि शिकायत के बाद भी जल निगम के अफसर हैंडपंप की मरम्मत नहीं करा रहे हैं।
जल निगम विभाग के अफसरों की अनदेखी का खामियाजा गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। मंझनपुर ब्लाक के मलियनपुर (थांभा अलावलपुर) दलित बस्ती में पेयजल के लिए दो हैंडपंप लगाए गए हैं। बस्ती के रहने वाले लल्लू प्रसाद, श्याम लाल, छत्तूलाल, पंचूलाल, जज्जू, संतोष कुमार का कहना है कि एक हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है। ऐसे में लोगों को आस-पास के गांव और निजी नलकूपों से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ रही है। लोगों ने बताया कि हैंडपंप खराब होने की शिकायत कई बार ग्राम प्रधान और खंड विकास अधिकारी के अलावा जलनिगम के अफसरों से भी की गई।
इसके बाद भी खराब पड़े हैंडपंप को ठीक नहीं कराया जा रहा है। इसे लेकर दलित बस्ती के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को वे तहसील दिवस में इसकी शिकायत अब सीधे जिलाधिकारी से करेंगे। इसके बाद भी यदि बस्ती में पानी की समस्या का समाधान नहीं कराया गया तो वे कलेक्ट्रेट में पूरे परिवार के साथ धरना-प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
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जल निगम विभाग के अफसरों की अनदेखी का खामियाजा गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। मंझनपुर ब्लाक के मलियनपुर (थांभा अलावलपुर) दलित बस्ती में पेयजल के लिए दो हैंडपंप लगाए गए हैं। बस्ती के रहने वाले लल्लू प्रसाद, श्याम लाल, छत्तूलाल, पंचूलाल, जज्जू, संतोष कुमार का कहना है कि एक हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है। ऐसे में लोगों को आस-पास के गांव और निजी नलकूपों से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ रही है। लोगों ने बताया कि हैंडपंप खराब होने की शिकायत कई बार ग्राम प्रधान और खंड विकास अधिकारी के अलावा जलनिगम के अफसरों से भी की गई।
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इसके बाद भी खराब पड़े हैंडपंप को ठीक नहीं कराया जा रहा है। इसे लेकर दलित बस्ती के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को वे तहसील दिवस में इसकी शिकायत अब सीधे जिलाधिकारी से करेंगे। इसके बाद भी यदि बस्ती में पानी की समस्या का समाधान नहीं कराया गया तो वे कलेक्ट्रेट में पूरे परिवार के साथ धरना-प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
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