{"_id":"5ace00b74f1c1b1c3d8b485d","slug":"81523450039-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं हुआ अल्ट्रासाउंड, बैरंग लौटे दर्जनों मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं हुआ अल्ट्रासाउंड, बैरंग लौटे दर्जनों मरीज
Updated Wed, 11 Apr 2018 06:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय की व्यवस्था पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को अल्ट्रासाउंड नहीं किया गया। इसकी वजह से कई मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड लौटना पड़ गया। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिला अस्पताल में कभी चिकित्सक नहीं बैठते तो कभी रेडियोलॉजिस्ट या टेक्नीशियन गायब हो जाते हैं। बुधवार को रेडियोलॉजिस्ट कक्ष के दरवाजे पर जरूरी काम से कोर्ट जाने की नोटिस चस्पा कर पूरे दिन नहीं आए। इसकी वजह से अल्ट्रासाउंड कराने आए करारी के जाहिद, मंझनपुर की आबिदा, समदा की नसीमा, सरायअकिल के जुनैद सहित तमाम मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही लौटना पड़ा। मरीजों ने बताया कि अक्सर अल्ट्रासाउंड सेवा ठप रहती है। इससे परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की एक मशीन है। एक रेडियोलॉजिस्ट हैं। बताया जाता है कि एक दिन में वह 20 से अधिक मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सकता। जबकि करीब 40 मरीज आते हैं। ऐसे में कइयों को रोज बैरंग लौटना पड़ता है। इसके कारण मरीज मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेते हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी होता है। वहीं सीएमएस डॉ. दीपक सेठ का कहना है कि जिले में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट हैं। वह आकस्मिक अवकाश पर चले गए। इन्हें रोका भी नहीं जा सकता था। इस वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल में कभी चिकित्सक नहीं बैठते तो कभी रेडियोलॉजिस्ट या टेक्नीशियन गायब हो जाते हैं। बुधवार को रेडियोलॉजिस्ट कक्ष के दरवाजे पर जरूरी काम से कोर्ट जाने की नोटिस चस्पा कर पूरे दिन नहीं आए। इसकी वजह से अल्ट्रासाउंड कराने आए करारी के जाहिद, मंझनपुर की आबिदा, समदा की नसीमा, सरायअकिल के जुनैद सहित तमाम मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही लौटना पड़ा। मरीजों ने बताया कि अक्सर अल्ट्रासाउंड सेवा ठप रहती है। इससे परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की एक मशीन है। एक रेडियोलॉजिस्ट हैं। बताया जाता है कि एक दिन में वह 20 से अधिक मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सकता। जबकि करीब 40 मरीज आते हैं। ऐसे में कइयों को रोज बैरंग लौटना पड़ता है। इसके कारण मरीज मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेते हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी होता है। वहीं सीएमएस डॉ. दीपक सेठ का कहना है कि जिले में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट हैं। वह आकस्मिक अवकाश पर चले गए। इन्हें रोका भी नहीं जा सकता था। इस वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका।
विज्ञापन