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खुले में शौच को मजबूर कस्तूरबा गांधी डहिया की छात्राएं
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खुले में शौच को मजबूर कस्तूरबा गांधी डहिया की छात्राएं
दो साल से कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूल का शौचालय चोक, सुरक्षा का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
चायल। केंद्र और प्रदेश सरकार लोगों को खुले में शौच जाने के लिए रोक रही है। वहीं दूसरी तरफ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मिश्रपुर डहिया की छात्राएं खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। दो साल से शौचालय चोक पड़े हैं, इसके बाद भी विभाग के जिम्मेदार बेखबर बने हुए है। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
मिश्रपुर डहिया में वर्ष 2013 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बनाया गया है। भवन में कुल नौ शौचालय हैं, जिन्हें दो टैंक से जोड़ा गया है। आवासीय विद्यालय में कक्षा छह से लेकर आठ तक की 100 छात्राएं पढ़ती है। स्कूल की वार्डेन शीला देवी बताती हैं कि शौचालय का कनेक्शन पतले पाइप से टैंक में जोड़ा गया है। इसकी वजह से शौचालय शुरू से ही काम नहीं कर रहे थे। कई बार मरम्मत कराया गया लेकिन स्थित जस की तस बनी रही। जिसकी वजह से परिसर में रहने वाली छात्राओं को खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। मामले की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अफसरों को दी गई है। इसके बाद भी मरम्मत का काम शुरू नहीं कराया जा सका। एबीएसए अजीत सिंह ने मामले की जानकारी से इंकार किया है। उनका कहना है कि कार्यदायी संस्था के खिलाफ शिकायत की गई है। फिलहाल छात्राओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए पड़ोस स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल में बने शौचालयों को खुलवाया गया है।
फोटो-9
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दो साल से कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूल का शौचालय चोक, सुरक्षा का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
चायल। केंद्र और प्रदेश सरकार लोगों को खुले में शौच जाने के लिए रोक रही है। वहीं दूसरी तरफ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मिश्रपुर डहिया की छात्राएं खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। दो साल से शौचालय चोक पड़े हैं, इसके बाद भी विभाग के जिम्मेदार बेखबर बने हुए है। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
मिश्रपुर डहिया में वर्ष 2013 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बनाया गया है। भवन में कुल नौ शौचालय हैं, जिन्हें दो टैंक से जोड़ा गया है। आवासीय विद्यालय में कक्षा छह से लेकर आठ तक की 100 छात्राएं पढ़ती है। स्कूल की वार्डेन शीला देवी बताती हैं कि शौचालय का कनेक्शन पतले पाइप से टैंक में जोड़ा गया है। इसकी वजह से शौचालय शुरू से ही काम नहीं कर रहे थे। कई बार मरम्मत कराया गया लेकिन स्थित जस की तस बनी रही। जिसकी वजह से परिसर में रहने वाली छात्राओं को खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। मामले की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अफसरों को दी गई है। इसके बाद भी मरम्मत का काम शुरू नहीं कराया जा सका। एबीएसए अजीत सिंह ने मामले की जानकारी से इंकार किया है। उनका कहना है कि कार्यदायी संस्था के खिलाफ शिकायत की गई है। फिलहाल छात्राओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए पड़ोस स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल में बने शौचालयों को खुलवाया गया है।
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