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लड़ रहे धुरंधर, जो जीता वही सिकंदर
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लड़ रहे धुरंधर, जो जीता वही सिकंदर
कोई पूर्व मंत्री व चार बार का विधायक तो कोई तीन मर्तबा रह चुका है सांसद
कौशाम्बी संसदीय पर भाजपा के लिए पिछला प्रदर्शन बरकार रखने की चुनौती
सपा-बसपा गठबंधन व जनसत्ता दल के लिए करो या मरो का हुआ चुनाव
फोटो नं-01,विनोद सोनकर, 02-शैलेंद्र कुमार, 03- इंद्रजीत सरोज
रवींद्र अग्रहरि
मंझनपुर। कौशाम्बी संसदीय सीट पर 2014 में भाजपा को एकतरफा जीत मिली थी। लेकिन इस बार परिस्थितियां कुछ अलग हैं। इस सीट पर न सिर्फ जबर्दस्त त्रिकोणीय मुकाबला है, बल्कि राजनीति के धुरंधर आमने-सामने हैं। भाजपा ने अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं निवर्तमान सांसद विनोद सोनकर को मैदान में उतारा है। गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज दो मर्तबा प्रदेश सरकार के मंत्री और चार बार विधायक रह चुके हैं। जबकि जनसत्ता दल उम्मीदवार शैलेंद्र कुमार भी एक बार प्रदेश के मंत्री व तीन मर्तबा सांसद रह चुके हैं। कुल मिलाकर कोई पूर्व मंत्री तो कोई पूर्व सांसद हैं। लिहाजा किसके सिर पर ताज होगा और कौन मलेगा हाथ? यह तय करेंगे संसदीय क्षेत्र के 18 लाख वोटर। फिलहाल मतदाता हवा का रुख भांपते हुए चुप्पी साधे हैं।
भाजपा और जनसत्ता पार्टी के प्रत्याशी तो इससे पहले भी आमने-सामने रह चुके हैं। जबकि सपा-बसपा गठबंधन उम्मीदवार सदर विधानसभा से चार बार विधायक चुने जाने के साथ ही दो मर्तबा प्रदेश के मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में तीनों प्रत्याशियों की जनता तक सीधी पकड़ है। संसदीय क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में तीनों की अपनी-अपनी गहरी पैठ है। तीनों प्रत्याशी विकास के साथ-साथ जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं। सदर विधानसभा क्षेत्र के रमेश गुप्ता, दिवाकर त्रिपाठी, रामधीन, संतोष रैदास, गंगा सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव में उतरे तीनों प्रत्याशी क्षेत्र के लिए अनजान चेहरा नहीं हैं। जनता तीनों के कामकाज का तरीका देख चुकी है। अब बस तय करना है कि इनमें से कौन आम जनता के लिए बेहतर काम करने वाला है। इसका फैसला अंतिम समय में कर लिया जाएगा। चायल क्षेत्र के अनिल दीक्षित, दीपेंद्र सिंह, राजकुमार, पप्पू वैद्य श्याम सोनी आदि का कहना है कि सबको देख लिया, समझ लिया। जनता के हित में कौन कितना काम कर रहा है। किसानों, बेराजगारों और व्यापारियों के हित में काम करने वाले को ही मौका दिया जाएगा। ऐसे में जबर्दस्त त्रिकोणीय मुकाबले के बीच भाजपा के लिए पिछला प्रदर्शन बरकार रखने की चुनौती तो सपा-बसपा गठबंधन व जनसत्ता दल के प्रत्यशियों के लिए चुनाव करो या मरो का हो गया है।
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कोई पूर्व मंत्री व चार बार का विधायक तो कोई तीन मर्तबा रह चुका है सांसद
कौशाम्बी संसदीय पर भाजपा के लिए पिछला प्रदर्शन बरकार रखने की चुनौती
सपा-बसपा गठबंधन व जनसत्ता दल के लिए करो या मरो का हुआ चुनाव
फोटो नं-01,विनोद सोनकर, 02-शैलेंद्र कुमार, 03- इंद्रजीत सरोज
रवींद्र अग्रहरि
मंझनपुर। कौशाम्बी संसदीय सीट पर 2014 में भाजपा को एकतरफा जीत मिली थी। लेकिन इस बार परिस्थितियां कुछ अलग हैं। इस सीट पर न सिर्फ जबर्दस्त त्रिकोणीय मुकाबला है, बल्कि राजनीति के धुरंधर आमने-सामने हैं। भाजपा ने अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं निवर्तमान सांसद विनोद सोनकर को मैदान में उतारा है। गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज दो मर्तबा प्रदेश सरकार के मंत्री और चार बार विधायक रह चुके हैं। जबकि जनसत्ता दल उम्मीदवार शैलेंद्र कुमार भी एक बार प्रदेश के मंत्री व तीन मर्तबा सांसद रह चुके हैं। कुल मिलाकर कोई पूर्व मंत्री तो कोई पूर्व सांसद हैं। लिहाजा किसके सिर पर ताज होगा और कौन मलेगा हाथ? यह तय करेंगे संसदीय क्षेत्र के 18 लाख वोटर। फिलहाल मतदाता हवा का रुख भांपते हुए चुप्पी साधे हैं।
भाजपा और जनसत्ता पार्टी के प्रत्याशी तो इससे पहले भी आमने-सामने रह चुके हैं। जबकि सपा-बसपा गठबंधन उम्मीदवार सदर विधानसभा से चार बार विधायक चुने जाने के साथ ही दो मर्तबा प्रदेश के मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में तीनों प्रत्याशियों की जनता तक सीधी पकड़ है। संसदीय क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में तीनों की अपनी-अपनी गहरी पैठ है। तीनों प्रत्याशी विकास के साथ-साथ जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं। सदर विधानसभा क्षेत्र के रमेश गुप्ता, दिवाकर त्रिपाठी, रामधीन, संतोष रैदास, गंगा सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव में उतरे तीनों प्रत्याशी क्षेत्र के लिए अनजान चेहरा नहीं हैं। जनता तीनों के कामकाज का तरीका देख चुकी है। अब बस तय करना है कि इनमें से कौन आम जनता के लिए बेहतर काम करने वाला है। इसका फैसला अंतिम समय में कर लिया जाएगा। चायल क्षेत्र के अनिल दीक्षित, दीपेंद्र सिंह, राजकुमार, पप्पू वैद्य श्याम सोनी आदि का कहना है कि सबको देख लिया, समझ लिया। जनता के हित में कौन कितना काम कर रहा है। किसानों, बेराजगारों और व्यापारियों के हित में काम करने वाले को ही मौका दिया जाएगा। ऐसे में जबर्दस्त त्रिकोणीय मुकाबले के बीच भाजपा के लिए पिछला प्रदर्शन बरकार रखने की चुनौती तो सपा-बसपा गठबंधन व जनसत्ता दल के प्रत्यशियों के लिए चुनाव करो या मरो का हो गया है।
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