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पीडब्ल्यूडी समेत 21 विभागों को नहीं मिली फूटी कौड़ी
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:51 AM IST
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मंझनपुर। डिप्टी सीएम एवं प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री केशव मौर्या के गृह जनपद कौशाम्बी में बजट का संकट है। वित्तीय वर्ष के आठ माह बाद भी जिला योजना के तहत स्वीकृत पीडब्ल्यूडी समेत 21 विभागों को फूटी कौड़ी नहीं मिल सकी। इससे सड़क एवं पुल आदि परियोजनाओं पर काम नहीं शुरू हो पा रहा है। अब तक 16 विभागों को ही करीब 112.44 करोड़ अवमुक्त हो सका है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले के चहुंमुखी विकास के लिए विभिन्न विभागों ने तकरीबन 224.73 करोड़ की योजना तैयार की गई थी। शासकीय स्वीकृति मिलने के बाद अब विभागों को बजट का इंतजार है। मगर चालू वित्तीय वर्ष के आठ महीने गुजरने के बावजूद चिकित्सा, शिक्षा, पेयजल, पर्यावरण, पर्यटन, सड़क समेत 21 महत्वपूर्ण विभागों को फूटी कौड़ी नहीं मुहैया कराई जा सकी है। सबसे हैरानी वाली बात ये है कि सूबे के डिप्टी सीएम एवं लोक निर्माण मंत्री केशव मौर्या का गृह जनपद होने के बावजूद उनके ही विभाग से जिला योजना को धेले भर की रकम नहीं मिली। जबकि उनके विभाग ने विभिन्न सड़कों एवं पुलों के निर्माण के लिए लगभग 10.08 करोड़ वाली परियोजनाएं जिला योजना में शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ 129.39 करोड़ की लागत से प्रस्तावित कृषि, पशुपालन, वन, लघु सिंचाई, एकीकृत ग्राम्य विकास समेत 16 विभागों की परियोजनाओं के लिए 112.44 करोड़ रुपये अवमुक्त करा दिया गया। संबंधित विभागों ने रकम मिलने के बाद काम भी प्रारंभ करा दिया है।
जिला योजना में ग्रामीण स्वच्छता के लिए इस बार तकरीबन 6568 लाख रुपये की कार्ययोजना को शामिल किया गया था। शासन की ओर से बगैर किसी रोकटोक के परियोजना स्वीकृत कर दी। इतना ही नहीं इस मद में सरकार ने खर्च की सीमा निर्धारित करने के बजाय खजाने का मुंह खोल दिया है। अपर सांख्यिकी अधिकारी सुभाष चंद्र स्वर्णकार ने बताया कि ग्रामीण स्वच्छता के लिए अब तक 8405 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं। जो निर्धारित बजट से 1837 लाख अधिक है। वित्तीय वर्ष के अभी चार महीने बाकी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस मद पर सरकार जिले को और रकम अवमुक्त कर सकती है। जिला योजना में 45 विभाग शामिल किए जाने का प्रावधान है। इस मर्तबा इनमें से मत्स्य पालन, उद्यान, प्राविधिक शिक्ष, बाल विकास पुष्टाहार, सेवायोजन, खेलकूद, लोहिया आवास समेत आठ विभागों ने अपनी कार्ययोजना ही नहीं दी थी। 37 विभागों की कार्ययोजनाएं शामिल की गई थी। इनमें से 16 को स्वीकृत बजट मिल चुका है।
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वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले के चहुंमुखी विकास के लिए विभिन्न विभागों ने तकरीबन 224.73 करोड़ की योजना तैयार की गई थी। शासकीय स्वीकृति मिलने के बाद अब विभागों को बजट का इंतजार है। मगर चालू वित्तीय वर्ष के आठ महीने गुजरने के बावजूद चिकित्सा, शिक्षा, पेयजल, पर्यावरण, पर्यटन, सड़क समेत 21 महत्वपूर्ण विभागों को फूटी कौड़ी नहीं मुहैया कराई जा सकी है। सबसे हैरानी वाली बात ये है कि सूबे के डिप्टी सीएम एवं लोक निर्माण मंत्री केशव मौर्या का गृह जनपद होने के बावजूद उनके ही विभाग से जिला योजना को धेले भर की रकम नहीं मिली। जबकि उनके विभाग ने विभिन्न सड़कों एवं पुलों के निर्माण के लिए लगभग 10.08 करोड़ वाली परियोजनाएं जिला योजना में शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ 129.39 करोड़ की लागत से प्रस्तावित कृषि, पशुपालन, वन, लघु सिंचाई, एकीकृत ग्राम्य विकास समेत 16 विभागों की परियोजनाओं के लिए 112.44 करोड़ रुपये अवमुक्त करा दिया गया। संबंधित विभागों ने रकम मिलने के बाद काम भी प्रारंभ करा दिया है।
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जिला योजना में ग्रामीण स्वच्छता के लिए इस बार तकरीबन 6568 लाख रुपये की कार्ययोजना को शामिल किया गया था। शासन की ओर से बगैर किसी रोकटोक के परियोजना स्वीकृत कर दी। इतना ही नहीं इस मद में सरकार ने खर्च की सीमा निर्धारित करने के बजाय खजाने का मुंह खोल दिया है। अपर सांख्यिकी अधिकारी सुभाष चंद्र स्वर्णकार ने बताया कि ग्रामीण स्वच्छता के लिए अब तक 8405 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं। जो निर्धारित बजट से 1837 लाख अधिक है। वित्तीय वर्ष के अभी चार महीने बाकी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस मद पर सरकार जिले को और रकम अवमुक्त कर सकती है। जिला योजना में 45 विभाग शामिल किए जाने का प्रावधान है। इस मर्तबा इनमें से मत्स्य पालन, उद्यान, प्राविधिक शिक्ष, बाल विकास पुष्टाहार, सेवायोजन, खेलकूद, लोहिया आवास समेत आठ विभागों ने अपनी कार्ययोजना ही नहीं दी थी। 37 विभागों की कार्ययोजनाएं शामिल की गई थी। इनमें से 16 को स्वीकृत बजट मिल चुका है।
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