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जिसे जेल भेजा, उसके नाना की खून देकर बचाई जान
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:44 AM IST
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मंझनपुर। आईजीआरएस सेल में तैनात आरक्षी ने सात साल पहले जिसे जेल भेजा था। सोमवार को उसी के नाना की खून देकर जान भी बचा ली। आरक्षी के इस काम की महकमे में खूब सराहना हो रही है। आम लोग भी खूब तारीफ कर रहे हैं।
आरक्षी विजय कुमार सिंह की जिले में वर्ष 2011 में तैनाती हुई थी। उस वक्त सूबे में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी। सपाई आंदोलन कर रहे थे। पुलिस उन्हें पकड़कर जेल भेज रही थी। तभी कोखराज क्षेत्र के चकमाहपुर पांडेयमऊ निवासी सपा कार्यकर्ता नीरज यादव को आरक्षी विजय ने पकड़कर सलाखों के पीछे डाला था। इसी के बाद नीरज विजय से परिचित हो गया। विजय के मुताबिक सोमवार सुबह नीरज ने फोन किया और नाना रामनेवाज की तबीयत खराब होने की बात कहते हुए खून की मांग की। इसके बाद विजय फौरन जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने एक यूनिट खून दिया। बतादें कि रामनेवाज को तीन दिन पहले तेज बुखार आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि खून नहीं मिलता तो जान जा सकती थी।
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आरक्षी विजय कुमार सिंह की जिले में वर्ष 2011 में तैनाती हुई थी। उस वक्त सूबे में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी। सपाई आंदोलन कर रहे थे। पुलिस उन्हें पकड़कर जेल भेज रही थी। तभी कोखराज क्षेत्र के चकमाहपुर पांडेयमऊ निवासी सपा कार्यकर्ता नीरज यादव को आरक्षी विजय ने पकड़कर सलाखों के पीछे डाला था। इसी के बाद नीरज विजय से परिचित हो गया। विजय के मुताबिक सोमवार सुबह नीरज ने फोन किया और नाना रामनेवाज की तबीयत खराब होने की बात कहते हुए खून की मांग की। इसके बाद विजय फौरन जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने एक यूनिट खून दिया। बतादें कि रामनेवाज को तीन दिन पहले तेज बुखार आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि खून नहीं मिलता तो जान जा सकती थी।
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