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Kasganj News: तिल-तिल कर जी रहे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण, बढ़ीं दुश्वारियां
Thu, 10 Sep 2026 11:43 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:43 PM IST
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फोटो 30- मूंझखेड़ा में बाढ़ के पानी से घिरी झोपड़ी। स्रोत संवाद
कासगंज। बाढ़ के साथ ग्रामीण तरह-तरह की चिंताओं से घिरे हैं। वह तिल-तिल कर दिन गुजारने को मजबूर हैं। जलस्तर बढ़ने के साथ साथ उनकी दुश्वारियां भी बढ़ रही हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसल तो बर्बाद हो ही रही है, पशुपालन पर भी संकट मंडरा रहा है। पशुपालन करने वाले ग्रामीणों के यहां से दूध का समय से उठान नहीं हो पा रहा है। दूध के कारोबारियों को बाढ़ के पानी की दुश्वारियां झेलते हुए दूध लेने जाना पड़ रहा है। ऐसे में जान का जोखिम बना हुआ है।
बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पटियाली के आठ गांवों में है। यहां के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। मक्का, बाजरा, उड़द, मूंग के अलावा सब्जी की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। गांवों में पानी भरा होने के कारण फसलों की बर्बादी का आकलन नहीं हो पा रहा है। पशुपालन से ही ग्रामीण अपनी आजीविका चलाने को विवश हैं, लेकिन बाढ़ के कारण पशुपालन भी प्रभावित है। पशुओं को हरा चारा नहीं मिल पा रहा इसका असर दुग्ध उत्पादन पर आ रहा है। समय से दूध उठान में भी दिक्कत हो रही है। गांव के मार्गों में पानी भरा होने और सड़कों के कटने से दूध लेने के दूधिया भी जोखिम उठाकर गांवों में पहुंच पा रहे हैं। पशुओं को सूखे स्थानों पर बांधने की भी समस्या है।
नगला दुर्जन के ग्रामीण महिपाल ने बताया कि बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरा है वहीं चारागाहों में पानी है। ऐसे में पशुओं के लिए हरा चारा काटकर नहीं ला पा रहे। ऐसे में पशुओं का एक से दो किलो दूध का उत्पादन कम हो गया है। बाढ़ का प्रकोप नगला जैली, नगला दिपी, नगला जयकिशन, पनसोती नगला, मूंझखेड़ा, नगला नरपत सहित अन्य इलाकों में बना हुआ है। नगला दुर्जन के उर्वेश का कहना है कि गांव में पानी और बढ़ गया है। बाढ़ का प्रकोप लंबे समय से बना होने के कारण हर कोई परेशान हो गया है।
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बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 81514 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 75833 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 105633 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.63 मीटर के निशान पर
वर्जन -
- नरौरा बैराज से पानी का प्रवाह बढ़ने के कारण जलस्तर में वृद्धि हुई है। अब बैराजों से प्रवाह कम होगा। सिंचाई विभाग अलर्ट पर है। - शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता सिंचाई
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बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पटियाली के आठ गांवों में है। यहां के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। मक्का, बाजरा, उड़द, मूंग के अलावा सब्जी की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। गांवों में पानी भरा होने के कारण फसलों की बर्बादी का आकलन नहीं हो पा रहा है। पशुपालन से ही ग्रामीण अपनी आजीविका चलाने को विवश हैं, लेकिन बाढ़ के कारण पशुपालन भी प्रभावित है। पशुओं को हरा चारा नहीं मिल पा रहा इसका असर दुग्ध उत्पादन पर आ रहा है। समय से दूध उठान में भी दिक्कत हो रही है। गांव के मार्गों में पानी भरा होने और सड़कों के कटने से दूध लेने के दूधिया भी जोखिम उठाकर गांवों में पहुंच पा रहे हैं। पशुओं को सूखे स्थानों पर बांधने की भी समस्या है।
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नगला दुर्जन के ग्रामीण महिपाल ने बताया कि बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरा है वहीं चारागाहों में पानी है। ऐसे में पशुओं के लिए हरा चारा काटकर नहीं ला पा रहे। ऐसे में पशुओं का एक से दो किलो दूध का उत्पादन कम हो गया है। बाढ़ का प्रकोप नगला जैली, नगला दिपी, नगला जयकिशन, पनसोती नगला, मूंझखेड़ा, नगला नरपत सहित अन्य इलाकों में बना हुआ है। नगला दुर्जन के उर्वेश का कहना है कि गांव में पानी और बढ़ गया है। बाढ़ का प्रकोप लंबे समय से बना होने के कारण हर कोई परेशान हो गया है।
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बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 81514 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 75833 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 105633 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.63 मीटर के निशान पर
वर्जन -
- नरौरा बैराज से पानी का प्रवाह बढ़ने के कारण जलस्तर में वृद्धि हुई है। अब बैराजों से प्रवाह कम होगा। सिंचाई विभाग अलर्ट पर है। - शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता सिंचाई

फोटो 30- मूंझखेड़ा में बाढ़ के पानी से घिरी झोपड़ी। स्रोत संवाद

फोटो 30- मूंझखेड़ा में बाढ़ के पानी से घिरी झोपड़ी। स्रोत संवाद