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Kasganj News: आम के पेड़ों में बौर के साथ वानस्पतिक वृद्धि से उत्पादन में कमी की आशंका
Sat, 21 Mar 2026 12:19 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:19 AM IST
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फोटो33विकास भवन सभागार में आयोजित प्रशिक्षण में जानकारी देते डीपीआरओ राजेश चौरसिया। संवाद
- फोटो : फुरसतगंज स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।
मोहनपुरा। आम के बागों में इस समय पेड़ों पर बौर लग रही है। अधिकांश बागों में पेड़ों पर बौर के साथ-साथ नए पत्ते और शाखाएं एक साथ बन रही हैं। सामान्यतः बौर आने की प्रक्रिया के दौरान पेड़ों की वानस्पतिक वृद्धि नहीं होती है। लेकिन बागों में प्रकृति का इस वर्ष अनोखा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ उद्यानिकी डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि फलन की प्रक्रिया के दौरान पेड़ अपनी सारी ऊर्जा फूलों और फलों के निर्माण में लगाते हैं। किंतु फलन के समय यदि पेड़ों में वानस्पतिक वृद्धि होती है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि अचानक तापमान में तेज वृद्धि होने पर पेड़ों में बौर और नए पत्ते एक साथ निकल आते हैं। इससे आम के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ है। इस वर्ष उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है। ऐसी स्थिति में इस वर्ष आम के उत्पादन में करीब 20 से 40 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका है। बागवान उचित समय पर विशेषज्ञों से संपर्क और बागों की नियमित निगरानी बनाए रखें। जिला उद्यान अधिकारी रवि प्रकाश जयसवार ने बताया कि इस वर्ष बड़ी संख्या में आम के पेड़ गमोसिस और स्टेम बोरर कीट से प्रभावित हुए ।
जनपद के आंकड़े
आम के बागों का क्षेत्रफल - करीब 1715 हेक्टेयर
प्रमुख प्रजातियां - दशहरी, चौंसा और लंगड़ा
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कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ उद्यानिकी डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि फलन की प्रक्रिया के दौरान पेड़ अपनी सारी ऊर्जा फूलों और फलों के निर्माण में लगाते हैं। किंतु फलन के समय यदि पेड़ों में वानस्पतिक वृद्धि होती है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि अचानक तापमान में तेज वृद्धि होने पर पेड़ों में बौर और नए पत्ते एक साथ निकल आते हैं। इससे आम के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ है। इस वर्ष उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है। ऐसी स्थिति में इस वर्ष आम के उत्पादन में करीब 20 से 40 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका है। बागवान उचित समय पर विशेषज्ञों से संपर्क और बागों की नियमित निगरानी बनाए रखें। जिला उद्यान अधिकारी रवि प्रकाश जयसवार ने बताया कि इस वर्ष बड़ी संख्या में आम के पेड़ गमोसिस और स्टेम बोरर कीट से प्रभावित हुए ।
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जनपद के आंकड़े
आम के बागों का क्षेत्रफल - करीब 1715 हेक्टेयर
प्रमुख प्रजातियां - दशहरी, चौंसा और लंगड़ा