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Kasganj News: खूबसूरती के लिए मशहूर हैं सहावर के ताजिए
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फोटो53सहावर में ताजिए बनाते लोग।संवाद
सहावर। कस्बे में 26 जून को यौम-ए-आशूरा यानी मुहर्रम का त्योहार अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा। कस्बा अपनी खूबसूरती और बेजोड़ नक्काशी वाले मशहूर ताजिए के लिए पूरे क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखता है, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। इस बार चांद की 9 तारीख (25 जून) की शाम को सभी ताजिए अपने-अपने मुकर्रर (तय) स्थानों पर जियारत के लिए रख दिए जाएंगे। इसके बाद चांद की 10 तारीख यानी 26 जून को दोपहर के बाद मातमी धुन और या हुसैन की सदाओं के बीच पांच भव्य ताजियों का जुलूस निकाला जाएगा।
मुहर्रम की रात को कस्बे के पांचों प्रमुख ताजिए मोहल्ला अंसारीयान, मोहल्ला कुरैशीयान, मोहल्ला मुगल, मोहल्ला काजी और मोहल्ला झंडा पीर एक साथ मोहल्ला काजी स्थित इमामबाड़े में इकट्ठे होंगे। यहां से सभी ताजिए मिलकर कस्बे के निर्धारित रूटों पर पारंपरिक गश्त के लिए निकलेंगे, जहां अकीदतमंद ताजिए का दीदार कर फातिहा पढ़वाएंगे। पूरी रात गश्त करने के बाद अगली सुबह (27 जून) इन ताजिए को कर्बला में पूरी अकीदत के साथ सुपुर्दे-खाक किया जाएगा।
मशहूर ताजिया कारीगर मास्टर उस्मान अहमद और जावेद अंसारी पिछले लगभग 50 वर्षों से इस हुनर को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बदलते वक्त के साथ आए बदलावों को साझा करते हुए बताया कि पहले ताजिए काफी ऊंचे और तीन अलग-अलग हिस्सों में बनाए जाते थे, जिन्हें जोड़ना और संभालना एक बड़ा काम होता था, लेकिन अब सुरक्षा और सहूलियत को देखते हुए ताजिए को एक ही हिस्से में तैयार किया जाता है।
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मुहर्रम की रात को कस्बे के पांचों प्रमुख ताजिए मोहल्ला अंसारीयान, मोहल्ला कुरैशीयान, मोहल्ला मुगल, मोहल्ला काजी और मोहल्ला झंडा पीर एक साथ मोहल्ला काजी स्थित इमामबाड़े में इकट्ठे होंगे। यहां से सभी ताजिए मिलकर कस्बे के निर्धारित रूटों पर पारंपरिक गश्त के लिए निकलेंगे, जहां अकीदतमंद ताजिए का दीदार कर फातिहा पढ़वाएंगे। पूरी रात गश्त करने के बाद अगली सुबह (27 जून) इन ताजिए को कर्बला में पूरी अकीदत के साथ सुपुर्दे-खाक किया जाएगा।
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मशहूर ताजिया कारीगर मास्टर उस्मान अहमद और जावेद अंसारी पिछले लगभग 50 वर्षों से इस हुनर को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बदलते वक्त के साथ आए बदलावों को साझा करते हुए बताया कि पहले ताजिए काफी ऊंचे और तीन अलग-अलग हिस्सों में बनाए जाते थे, जिन्हें जोड़ना और संभालना एक बड़ा काम होता था, लेकिन अब सुरक्षा और सहूलियत को देखते हुए ताजिए को एक ही हिस्से में तैयार किया जाता है।
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