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Kasganj News: आंबेडकर जयंती शोभायात्रा बवाल के दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
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कासगंज। सहावर थाना क्षेत्र के गांव चेहका गुनार में डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती की शोभायात्रा के दौरान हुए बवाल के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी भाइयों अंकित यादव उर्फ अंकित कुमार और अंशुल की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
सहावर थाना प्रभारी गोविंद वल्लभ शर्मा की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को गांव चेहका गुनार में प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर तय रूट से डॉ. भीमराव आंबेडकर की शोभायात्रा निकाली जा रही थी। आरोप है कि शोभायात्रा का साजिश के तहत बुग्गी, ट्रैक्टर-ट्राली और ई-रिक्शा लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया।
जब पुलिस ने रास्ता खुलवाने और लोगों को समझाने का प्रयास किया तो भीड़ उग्र हो गई। छतों और गलियों से पुलिस बल पर ईंट-पत्थर फेंके गए। पथराव में सिपाही अश्वनी मलिक का सिर फट गया और महिला सिपाही रेखा शर्मा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। पुलिस ने मौके से 18 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था, जबकि कई अन्य भाग निकले थे।
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मामले में आरोपी अंकित और अंशुल ने कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की। आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उन्हें गांव की गुटबाजी के कारण झूठा फंसाया गया है। आरोपी अंकित की पत्नी का पथरी का ऑपरेशन हुआ था और वे घटना के समय उनकी देखभाल कर रहे थे।
वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित थी, जिसमें एक सिपाही को सिर में फैक्चर जैसी प्राणघातक चोट आई है। केस डायरी में दोनों आरोपियों की सक्रिय संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।
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सहावर थाना प्रभारी गोविंद वल्लभ शर्मा की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को गांव चेहका गुनार में प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर तय रूट से डॉ. भीमराव आंबेडकर की शोभायात्रा निकाली जा रही थी। आरोप है कि शोभायात्रा का साजिश के तहत बुग्गी, ट्रैक्टर-ट्राली और ई-रिक्शा लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया।
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जब पुलिस ने रास्ता खुलवाने और लोगों को समझाने का प्रयास किया तो भीड़ उग्र हो गई। छतों और गलियों से पुलिस बल पर ईंट-पत्थर फेंके गए। पथराव में सिपाही अश्वनी मलिक का सिर फट गया और महिला सिपाही रेखा शर्मा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। पुलिस ने मौके से 18 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था, जबकि कई अन्य भाग निकले थे।
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मामले में आरोपी अंकित और अंशुल ने कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की। आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उन्हें गांव की गुटबाजी के कारण झूठा फंसाया गया है। आरोपी अंकित की पत्नी का पथरी का ऑपरेशन हुआ था और वे घटना के समय उनकी देखभाल कर रहे थे।
वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित थी, जिसमें एक सिपाही को सिर में फैक्चर जैसी प्राणघातक चोट आई है। केस डायरी में दोनों आरोपियों की सक्रिय संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।