विश्व डायबिटीज दिवस: हर दसवें कनपुरिये का बढ़ा है शुगर लेवल, बिगड़ी लाइफ स्टाइल के अलावा प्रदूषण डाल रहा असर
युवाओं में नशे की लत, स्ट्रेस और नींद पूरी न होने समेत तमाम वजहों से इसकी दिक्कत हो रही है। प्रदूषण भी अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज बढ़ाने का कारण है।
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डायबिटीज रोगियों का दायरा बढ़ता जा रहा है। हर दसवें शहरी का ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ है। इनमें कुछ डायबिटीज की बॉर्डर लाइन पर हैं। जरा सी गड़बड़ी से ये डायबिटीज की लक्ष्मण रेखा पार कर जाते हैं। बिगड़ी लाइफ स्टाइल, खानपान में गड़बड़ी और प्रदूषण डायबिटीज बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के यहां हुए सैंपल सर्वे से पता चला है कि हर दसवां शहरी डायबिटीज के दायरे में है। इनमें 40 प्रतिशत को अपना रोग पता ही नहीं होता है। डायबिटीज रोगियों का आयु वर्ग घट गया है। अमूमन 40 साल उम्र के बाद डायबिटीज होने का खतरा माना जाता रहा है, लेकिन अब 20 साल के बाद ही युवा इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। डायबिटीज के रोगियों का ग्राफ बढ़ रहा है। यूपी डायबिटीज एसोसिएशन (यूडीए) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन ने बताया कि वर्ष 2015 में घर-घर जाकर सर्वे किया गया था। तब शहर की आबादी में 8.8 प्रतिशत डायबिटीज के रोगी थे।
ताजा सैंपलिंग सर्वे में इनका संख्या तकरीबन 10 फीसदी हो गई है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बाद जो लोग डायबिटीज की बॉर्डर लाइन पर रहे हैं, उनमें 20 फीसदी डायबिटिक हो गए हैं। इसके अलावा युवाओं में नशे की लत, स्ट्रेस और नींद पूरी न होने समेत तमाम वजहों से इसकी दिक्कत हो रही है। प्रदूषण भी अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज बढ़ाने का कारण है। कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी का कहना है कि युवाओं में स्ट्रेस अधिक होने, खानपान में लापरवाही के कारण इंसुलिन रिसेस्टेंट बढ़ रहा है। सबसे मुश्किल यह है कि 80 फीसदी रोगी डायबिटीज का इलाज देर में लेते हैं। किसी और मर्ज होने पर जांच किए जाने पर पता चलता है।
मानक
खाली पेट
100 मिली खून में 70 ले 100 मिग्रा शुगर तो सामान्य
100 मिली खून में 100 से 125 मिग्रा शुगर बॉर्डर तो लाइन
100 मिली खून में 126 मिग्रा या इससे अधिक शुगर तो डायबिटीज
100 मिली खून में 140 मिग्रा के नीचे शुगर तो सामान्य
100 मिली खून में 140 से 200 मिग्रा शुगर तो बॉर्डर लाइन
100 मिली खून में 200 मिग्रा के ऊपर शुगर तो डायबिटीज
डायबिटीज से बढ़े दूसरे रोग
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के कारण गुर्दा रोग, लिवर रोग, हृदय रोग, न्यूरो रोग, नसों की बीमारियां बढ़ गई हैं। डायबिटीज के बाद सबसे पहले असर गुर्दों पर आ रहा है। इन रोगियों में पांच साल के अंदर 50 फीसदी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 45 फीसदी लिवर के रोगी बढ़ गए हैं। हार्टअटैक और ब्रेनअटैक में 10 फीसदी वृद्धि हुई है।
ऐसे करें बचाव
- तली-भुनी चीजों, जंक फूड से परहेज करें।
- फल, सलाद और मिश्रित अनाज का सेवन करें।
- नींद पूरी लें, इसके साथ ही खुश रहें, स्ट्रेस से दूर रहें।
- प्रदूषित स्थानों पर मास्क लगाकर जाएं।
- नियमित कसरत करें।
- नाश्ता भरपूर करें और डिनर हल्का लें।
- खाने के तुरंत बाद मत सोएं।
- डिनर सोने के एक से डेढ़ घंटे पहले करें।