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यूपी चुनाव 2017 : एक गांव में एक वोट पड़ा दूसरे में एक भी नहीं, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 19 Feb 2017 09:41 PM IST
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कानपुर देहात में वाेटिंग बहिष्कार करने वाले ग्रामीणाें काे समझाते प्रशासनिक अधिकारी
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भोगनीपुर विधानसभा के 462 मतदाता संख्या वाले असुवापुर गांव में सिर्फ एक व्यक्ति ने मतदान किया। 275 मतदाता वाले नगवां गांव में किसी ने भी मतदान नहीं किया। दोनों गांवों में बिजली, पानी और सड़क आदि समस्याओं को लेकर मतदान का बहिष्कार किया गया। प्रशासनिक अधिकारी घंटों मान मनौव्वल करते रहे पर किसी ने नहीं सुनी। अधिकारियों के दबाव में असवापुर में एक कोटेदार ने वोट डाला।
भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र के असुवापुर गांव में ग्रामीणों ने सुबह ही मतदेय स्थल पहुंचने के रास्ते पर चूना डालकर लाइन खींच दी थी। गांव के लोगों को उसे पार न करने की कसम खिलाई गई थी। वहीं बहिष्कार का बैनर लगाकर महिलाओं ने भी मोर्चा संभाल लिया। गांव के राम मनोहर, विपिन सिंह, सीमा देवी, शांती देवी, नीरजा, आशा, मुन्नी देवी, रामश्री, शिव कुमारी, धीरज, दीपक, केदारनाथ का कहना था कि आजादी के सात दशक होने के हैं, लेकिन गांव में अभी तक विद्युतीकरण तक नहीं हुआ है। 462 मतदाता संख्या वाले गांव में सिर्फ एक हैंडपंप लगा है। प्राथमिक विद्यालय में भी हैंडपंप नहीं है।
पीठासीन अधिकारी सत्यनारायण अवस्थी, एसडीएम आरपी त्रिपाठी, डीएसपी डीके सिंह, कोतवाल राधामोहन दुबे के समझाने पर भी लोग मतदान के लिए राजी नहीं हुए। जद्दोजहद के बाद कोटेदार उमाशंकर पांडेय ने मतदान किया। कोटेदार को मतदान से रोकने के प्रयास में पुलिस ने सुरेश कुमार को हिरासत में ले लिया, जिस पर महिलाएं उत्तेजित हो गईं और सुरेश को पुलिस हिरासत से जीप से उतारकर ले गईं।
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इसी तरह यमुना बीहड़ पट्टी के नगवां गांव में 275 मतदाताओं में से किसी ने भी मतदान नहीं किया। यहां प्रशासनिक अधिकारियों के मतदाताओं को मनाने के सारे प्रयास विफल रहे। प्रधान अंजू देवी के पति रामनरेश ने बताया कि गांव में पेयजल, सिंचाई और आवागमन की समस्याएं हैं। चुनाव के दौरान प्रत्याशी समाधान का आश्वासन देते रहे, लेकिन इसके बाद नेताओं ने कोई पहल नहीं की। इसीलिए मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया था।
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भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र के असुवापुर गांव में ग्रामीणों ने सुबह ही मतदेय स्थल पहुंचने के रास्ते पर चूना डालकर लाइन खींच दी थी। गांव के लोगों को उसे पार न करने की कसम खिलाई गई थी। वहीं बहिष्कार का बैनर लगाकर महिलाओं ने भी मोर्चा संभाल लिया। गांव के राम मनोहर, विपिन सिंह, सीमा देवी, शांती देवी, नीरजा, आशा, मुन्नी देवी, रामश्री, शिव कुमारी, धीरज, दीपक, केदारनाथ का कहना था कि आजादी के सात दशक होने के हैं, लेकिन गांव में अभी तक विद्युतीकरण तक नहीं हुआ है। 462 मतदाता संख्या वाले गांव में सिर्फ एक हैंडपंप लगा है। प्राथमिक विद्यालय में भी हैंडपंप नहीं है।
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पीठासीन अधिकारी सत्यनारायण अवस्थी, एसडीएम आरपी त्रिपाठी, डीएसपी डीके सिंह, कोतवाल राधामोहन दुबे के समझाने पर भी लोग मतदान के लिए राजी नहीं हुए। जद्दोजहद के बाद कोटेदार उमाशंकर पांडेय ने मतदान किया। कोटेदार को मतदान से रोकने के प्रयास में पुलिस ने सुरेश कुमार को हिरासत में ले लिया, जिस पर महिलाएं उत्तेजित हो गईं और सुरेश को पुलिस हिरासत से जीप से उतारकर ले गईं।
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इसी तरह यमुना बीहड़ पट्टी के नगवां गांव में 275 मतदाताओं में से किसी ने भी मतदान नहीं किया। यहां प्रशासनिक अधिकारियों के मतदाताओं को मनाने के सारे प्रयास विफल रहे। प्रधान अंजू देवी के पति रामनरेश ने बताया कि गांव में पेयजल, सिंचाई और आवागमन की समस्याएं हैं। चुनाव के दौरान प्रत्याशी समाधान का आश्वासन देते रहे, लेकिन इसके बाद नेताओं ने कोई पहल नहीं की। इसीलिए मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया था।