फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Verdict on Behmai case came after 43 years one got life imprisonment one acquitted Phoolan Devi murdered 20 pe

फूलन देवी ने की थी 20 लोगों की हत्या: बेहमई कांड पर 43 साल बाद आया फैसला, एक को उम्रकैद, एक बरी

Wed, 14 Feb 2024 07:49 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 14 Feb 2024 07:49 PM IST
सार

बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को दस्यु फूलन देवी ने सामूहिक नरसंहार की घटना को अंजाम दिया था। जिसमें 20 लोगों को मौत हो गई थी। वहीं छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 

विज्ञापन
Verdict on Behmai case came after 43 years one got life imprisonment one acquitted Phoolan Devi murdered 20 pe
बेहमई कांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बहुचर्चित बेहमई कांड से 43 साल बाद कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया। एंटी डकैती कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अमित मालवीय की अदालत ने दोषी श्यामबाबू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं एक अन्य आरोपी विश्वनाथ को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। इतनी लंबी न्यायिक कार्यवाही के दौरान कई आरोपियों और गवाहों की मौत हो चुकी है जबकि फैसले के इंतजार में वादी मुकदमा भी दम तोड़ चुका है। फरार तीन आरोपियों को आज तक पुलिस गिरफ्तार ही नहीं कर सकी है। 

विज्ञापन

सिकंदरा के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को दस्यु फूलन देवी ने सामूहिक नरसंहार की घटना को अंजाम दिया था। जिसमें 20 लोगों को मौत हो गई थी। वहीं छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मामले में गांव के ही वादी राजाराम ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसकी सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे के अनुसार 24 नवंबर 1982 तक मामले में 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी उनके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिए गए थे। मामले में कुछ आरोपियों के मध्य प्रदेश की जेल में बंद होने के कारण इस मुकदमे में उनकी हाजिरी न होने के कारण लंबे समय तक आरोपियों पर आरोप तय नहीं हो सके थे। इससे मुकदमे की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। 

विज्ञापन

इसी दौरान कुछ आरोपियों की मौत हो गई तो कुछ जमानत हो जाने पर फरार हो गए थे। वर्ष 2007 में आरोपी राम सिंह, रतीराम, भीखा व बाबूराम के खिलाफ पहली बार आरोप तय हुए थे। वहीं 2012 में आरोपी पोसा, विश्वनाथ व श्यामबाबू के अलावा राम सिंह और भीखा पर दोबारा आरोप तय हुए थे। इसके बाद मामले में हाजिर आ रहे सिर्फ पांच आरोपियों पर सुनवाई आगे बढ़ी थी। 24 सितंबर 2012 को मुकदमा वादी राजाराम की पहली बार कोर्ट में गवाही हुई। 

इसके बाद अभियोजन ने मामले में 2015 तक कुल 15 गवाह पेश किए। इसके बाद कानूनी पेंचीदगियों में उलझे इस मुकदमे में फैसला आने में नौ साल लग गए। इस दौरान एक-एक कर सभी अभियुक्तों की मौत हो गई। सिर्फ श्यामबाबू और विश्वनाथ ही बचे थे। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने श्यामबाबू को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि घटना के समय किशोर रहे विश्वनाथ को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed