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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Two day Ramayana Conclave begins at CSJM University

CSJMU: दो दिवसीय रामायण कॉन्क्लेव का हुआ शुभारंभ, जगतगुरु रामभद्राचार्य बोले- 2047 तक भारत बनेगा विश्वगुरु

Tue, 28 Mar 2023 12:35 AM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, कानपुर
माई सिटी रिपोर्टर, कानपुर Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 28 Mar 2023 12:35 AM IST
सार

जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर रामायण के मूल्यों को समझाया। उन्होंने रामायण को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। कहा कि रामायण राष्ट्र की धरोहर है।

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Two day Ramayana Conclave begins at CSJM University
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में रामायण कॉन्क्लेव का शुभारंभ - फोटो : Twitter/@CSJM_University

विस्तार

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय रामायण कॉन्क्लेव में सोमवार को राम-सीता, भरत, लक्ष्मण, हनुमान जैसे ही रैंप पर उतरे तो पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। रैंप वॉक करते समय बॉलीवुड गानों की जगह पूरा हॉल जयश्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। सर्वेश्वर मंदिर से यूआईईटी हॉल तक शोभायात्रा निकाली गई।

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विवि के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में रामायण कॉन्क्लेव का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विशिष्ट अतिथि स्वामी मिथिलेश नंदनी शरण, कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमेश चिंतक ने किया। इस दौरान अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. लवकुश द्विवेदी और सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने करार पर हस्ताक्षर किए।

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ऑनलाइन जुड़े जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने रामायण के मूल्यों को समझाया। उन्होंने रामायण को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। कहा कि रामायण राष्ट्र की धरोहर है। गंगोत्री से गंगासागर तक, कश्मीर से कन्याकुमारी तक राम हर मानव के मन में हैं। मुख्य अतिथि सतीश महाना ने कहा कि श्रीराम के जीवन से विनम्रता, शीतलता, शिष्यों का अपने गुरु के प्रति समर्पण और परंपरा की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विश्वगुरु बनेगा।

इस कार्यक्रम में सिया राम रूप, भक्ति गायन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। सियाराम रूप प्रतियोगिता में सिया के रूप में आईना कपूर, राम के रूम में प्रियंवदा, सौम्या, ऋषभ यादव व अनुराग शुक्ला, लक्ष्मण के रूम में अभय दीक्षित, हुनमान के रूप में अंश गुप्ता प्रतिभाग किया। कॉन्क्लेव में रामायण गान, भजन, निबंध प्रतियोगिताएं भी हुईं।

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रामायण की जगह मूर्ख लेखकों की किताबें अधिक पढ़ी जातीं
स्वामी मिथिलेश नंदिनी ने युवाओं को वाल्मिकी रामायण से आत्मसात होने की बात कही। कहा कि दुख होता है कि देश में रामायण की जगह मूर्ख लेखकों की किताबों को ज्यादा पढ़ा जाता है। उनकी किताबों को बेस्ट सेलिंग का खिताब मिलता है, जबकि उनके पास कोई अधिकारिक ज्ञान नहीं है। रामायण मनुष्य की सभी गुणों को असाधारण तरीके से अपने भीतर समाहित किए हुए है। उन्होंने छात्रों को भारत की संस्कृति की ओर मुड़ने को कहा। विद्या मनुष्य को मनुष्य बनाती है।

इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमेश चिंतक ने कहा कि शिक्षा और विद्या में अंतर होता है। विद्या मनुष्य को मनुष्य बनाती है। विद्यालय का अर्थ छात्रों को संस्कार देना, आत्मा को परमात्मा से जोड़ना होता है। शिक्षण संस्थानों में अभी तक दी जाने वाली शिक्षा से छात्रों को केवल धनोपार्जन करना ही सिखाया जाता है। विवि की इस अनूठी पहल ने संस्थान को वास्तव में विद्यालय बना दिया।

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