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10 लाख की रंगदारी मांगने वाले धरे गए
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:23 AM IST
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मौके पर जांच करती पुलिस
- फोटो : amar ujala
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कानपुर। प्राइवेट क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के अधिकारी से 10 लाख रुपये रंगदारी मांगने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने बुधवार को धर दबोचा। रंगदारी न मिलने पर दोनों अधिकारी के नाती को उठाने की फिराक में अर्मापुर नहर के पास छिपे थे। एक आरोपी दादानगर निवासी अजय श्रीवास्तव है, जबकि दूसरा उसकी बहन का देवर नेहरू नगर नई दिल्ली निवासी मनीष श्रीवास्तव है। एसपी पश्चिम सचिंद्र पटेल ने बताया कि पनकी स्वराज नगर निवासी कृष्णराम वर्मा के पास 10 जुलाई को खाड़ी देश के नंबर से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई।
शिकायत मिलने पर कृष्णराम वर्मा के घर सादे कपड़े में पुलिस तैनात कर दी गई और नंबर को सर्विलांस व लिसनिंग पर लिया गया। इसी से पता चला कि आरोपी कृष्णराम के नाती का अपहरण करने के लिए अर्मापुर नहर के पास खड़े हैं। थानाध्यक्ष आशीष मिश्रा ने टीम के साथ पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया। इनके पास से तीन मोबाइल फोन और रेकी में इस्तेमाल की जाने वाली बाइक भी बरामद हुई है। मुख्य आरोपी अजय पहले कृष्णराम वर्मा की टीम में काम करता था। उनके घर भी आना जाना था। इस वजह से वह उनकी आर्थिक स्थिति से परिचित था। नौकरी छोड़ने के बाद अजय ने बैंक से लोन लेकर दादानगर में प्लास्टिक फैक्ट्री डाली थी लेकिन किस्त न दे पाने के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। इसके बाद ही उसने रंगदारी वसूलने की साजिश रची और मनीष को अपने साथ जोड़ा।
इंटर पास मनीष मुंबई में नौकरी कर चुका है। इस कारण वह वहां के लहजे में बात भी कर लेता था। पुलिस के अनुसार वीओआईपी (वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल) का इस्तेमाल कर मनीष ने कृष्णराम को फोन किया और खुद को अंडरवर्ल्ड का डॉन बताकर रंगदारी मांगी। वीओआईपी की वजह से कृष्णराम वर्मा को अपने मोबाइल पर खाड़ी देश का नंबर नजर आया। पुलिस हिरासत में आरोपियों ने बताया कि दोनों बेरोजगार थे। इसलिए रंगदारी मांगने का प्लान बनाया था। रंगदारी मिलने पर उनका इरादा था कि 10 परसेंट रकम से सुंदरकांड कराते।
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शिकायत मिलने पर कृष्णराम वर्मा के घर सादे कपड़े में पुलिस तैनात कर दी गई और नंबर को सर्विलांस व लिसनिंग पर लिया गया। इसी से पता चला कि आरोपी कृष्णराम के नाती का अपहरण करने के लिए अर्मापुर नहर के पास खड़े हैं। थानाध्यक्ष आशीष मिश्रा ने टीम के साथ पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया। इनके पास से तीन मोबाइल फोन और रेकी में इस्तेमाल की जाने वाली बाइक भी बरामद हुई है। मुख्य आरोपी अजय पहले कृष्णराम वर्मा की टीम में काम करता था। उनके घर भी आना जाना था। इस वजह से वह उनकी आर्थिक स्थिति से परिचित था। नौकरी छोड़ने के बाद अजय ने बैंक से लोन लेकर दादानगर में प्लास्टिक फैक्ट्री डाली थी लेकिन किस्त न दे पाने के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। इसके बाद ही उसने रंगदारी वसूलने की साजिश रची और मनीष को अपने साथ जोड़ा।
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इंटर पास मनीष मुंबई में नौकरी कर चुका है। इस कारण वह वहां के लहजे में बात भी कर लेता था। पुलिस के अनुसार वीओआईपी (वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल) का इस्तेमाल कर मनीष ने कृष्णराम को फोन किया और खुद को अंडरवर्ल्ड का डॉन बताकर रंगदारी मांगी। वीओआईपी की वजह से कृष्णराम वर्मा को अपने मोबाइल पर खाड़ी देश का नंबर नजर आया। पुलिस हिरासत में आरोपियों ने बताया कि दोनों बेरोजगार थे। इसलिए रंगदारी मांगने का प्लान बनाया था। रंगदारी मिलने पर उनका इरादा था कि 10 परसेंट रकम से सुंदरकांड कराते।
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