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कानपुर: तापमान में उतार-चढ़ाव से फ्लू के मरीज बढ़े, निमोनिया से एक बच्चे समेत तीन की मौत
Mon, 10 Feb 2020 05:50 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 10 Feb 2020 05:50 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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मौसम में बदलाव से फ्लू के रोगी बढ़ रहे हैं। कानपुर के हैलट और उर्सला अस्पताल में फ्लू, इंफ्लूएंजा और सांस की एलर्जी के मरीजों की भरमार है। सोमवार को सांस के पांच रोगियों को गंभीर हालत में हैलट इमरजेंसी में भर्ती किया गया।
वहीं एक बच्चा समेत तीन मरीजों की निमोनिया से मौत हो गई। इंफ्लूएंजा के संक्रमण के बाद मरीजों को निमोनिया हो गया। जिससे वे एक्यूट रेस्टपेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) में चले गए और मौत हो गई।
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वहीं एक बच्चा समेत तीन मरीजों की निमोनिया से मौत हो गई। इंफ्लूएंजा के संक्रमण के बाद मरीजों को निमोनिया हो गया। जिससे वे एक्यूट रेस्टपेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) में चले गए और मौत हो गई।
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तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने से मरीजों को ब्रेन अटैक भी पड़ रहा है। बिधनू के राम प्रकाश पासवान के डेढ़ साल के बच्चे को फ्लू हो गया। तीन दिन पहले उन्होंने बच्चे को बालरोग अस्पताल की ओपीडी में दिखाया।
इसके बाद रविवार रात उसकी तबियत बिगड़ गई। निमोनिया से सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही कल्याणपुर के विनोद कुमार (55) की भी निमोनिया से जान चली गई।
इसके बाद रविवार रात उसकी तबियत बिगड़ गई। निमोनिया से सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही कल्याणपुर के विनोद कुमार (55) की भी निमोनिया से जान चली गई।
सांस की दिक्कत होने पर उन्होंने डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल में जांच कराई थी। रावतपुर के राजेश गुप्ता (64) की भी निमोनिया से मौत हो गई। उन्हें अस्थमा की भी दिक्कत थी।
सोमवार शाम तबियत बिगड़ी तो घरवाले हैलट इमरजेंसी ले गए लेकिन जान नहीं बची। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि तापमान में बदलाव से फ्लू के रोगी बढ़े हैं। जुकाम-बुखार और गले में जकड़न के मरीज आ रहे हैं।
सोमवार शाम तबियत बिगड़ी तो घरवाले हैलट इमरजेंसी ले गए लेकिन जान नहीं बची। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि तापमान में बदलाव से फ्लू के रोगी बढ़े हैं। जुकाम-बुखार और गले में जकड़न के मरीज आ रहे हैं।