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आज से सरकारी विभागों में तीन दिन नहीं होेंगे काम, पढ़ाई भी ठप
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 29 Aug 2018 04:41 PM IST
सार
- पेंशन बहाली समेत नौ मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी, शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मचारी करेंगे कार्य बहिष्कार
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विस्तार
पुरानी पेंशन नीति बहाल करने समेत नौ मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी, शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मचारी बुधवार से तीन दिन के लिए कार्य बहिष्कार पर रहेंगे। इस कारण सरकारी विभागों में तीन दिन तक काम नहीं होंगे। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठप रहेगी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच उत्तर प्रदेश के बैनर तले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में चॉक डाउन हड़ताल रहेगी। वहीं सात टीमें बनाई गई हैं जो कार्य बहिष्कार की निगरानी करेंगी। शहर में करीब एक लाख के आसपास राज्य कर्मचारी, शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारी हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2004 से और प्रदेश सरकार ने 2005 से पुरानी पेंशन बंद कर दी है। जो नई पेंशन नीति लाई गई है, वह कर्मचारियों और शिक्षकों के हित में नहीं है। पुरानी पेंशन नीति बहाल करने के लिए ही आंदोलन किया जा रहा है। 29 से 31 अगस्त तक कार्य बहिष्कार रहेगा। इससे पहले नौ अगस्त को कानपुर समेत पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन किया गया था। सरकार ने अभी तक वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में अब आंदोलन ही विकल्प बचा है। मंच के चेयरमैन प्रभात मिश्रा ने बताया कि इस कार्य बहिष्कार में परिषद से संबद्ध सभी कर्मचारी संगठन शामिल हो रहे हैं। प्राथमिक, माध्यमिक शिक्षकों के अलावा शिक्षणेतर कर्मचारी भी शामिल हैं।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2004 से और प्रदेश सरकार ने 2005 से पुरानी पेंशन बंद कर दी है। जो नई पेंशन नीति लाई गई है, वह कर्मचारियों और शिक्षकों के हित में नहीं है। पुरानी पेंशन नीति बहाल करने के लिए ही आंदोलन किया जा रहा है। 29 से 31 अगस्त तक कार्य बहिष्कार रहेगा। इससे पहले नौ अगस्त को कानपुर समेत पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन किया गया था। सरकार ने अभी तक वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में अब आंदोलन ही विकल्प बचा है। मंच के चेयरमैन प्रभात मिश्रा ने बताया कि इस कार्य बहिष्कार में परिषद से संबद्ध सभी कर्मचारी संगठन शामिल हो रहे हैं। प्राथमिक, माध्यमिक शिक्षकों के अलावा शिक्षणेतर कर्मचारी भी शामिल हैं।
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इन विभागों में नहीं होगा काम
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श्रम विभाग, सेवायोजन कार्यालय, आरटीओ, विकास भवन, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य विभाग, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, कृषि, कोषागार, वाणिज्यकर विभाग, बांट-माप विभाग, सिंचाई विभाग आदि। वहीं कलक्ट्रेट में काम होगा। इसके अलावा पहली से 12वीं तक के स्कूलों में पढ़ाई नहीं होगी।
रोडवेज, नगर निगम, केडीए में होगा काम
इन तीनों विभागों के कर्मचारी इस बहिष्कार में शामिल नहीं होंगे। क्योंकि ये तीनों विभाग स्ववित्तपोषी हैं। मतलब ये विभाग अपनी आय खुद ही जुटाते हैं। इनकी रेगुलेटिंग अथॉरिटी तो प्रदेश सरकार है लेकिन ये पूरी तरह से सरकार के अधीन नहीं आते। इनके अपने नियम कायदे होते हैं।
ये हैं मांगे
- पुरानी पेंशन नीति बहाल हो
- कै शलेस इलाज की सुविधा जल्द शुरू हो
- वेतन विसंगतियां दूर की जाएं
- केंद्रीय कर्मचारियों की तरह राज्य कर्मचारियों को मिले भत्ता
- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती हो
- सभी विभागों में खाली पड़े पदों को भरा जाए
- फील्ड में कार्य कर रहे कर्मचारियों को वाहन भत्ता मिले
- छठवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने को किए गए निर्णयों का पालन किया जाए।
- अनिवार्य सेवानिवृत्त व्यवस्था वापस ली जाए।
रोडवेज, नगर निगम, केडीए में होगा काम
इन तीनों विभागों के कर्मचारी इस बहिष्कार में शामिल नहीं होंगे। क्योंकि ये तीनों विभाग स्ववित्तपोषी हैं। मतलब ये विभाग अपनी आय खुद ही जुटाते हैं। इनकी रेगुलेटिंग अथॉरिटी तो प्रदेश सरकार है लेकिन ये पूरी तरह से सरकार के अधीन नहीं आते। इनके अपने नियम कायदे होते हैं।
ये हैं मांगे
- पुरानी पेंशन नीति बहाल हो
- कै शलेस इलाज की सुविधा जल्द शुरू हो
- वेतन विसंगतियां दूर की जाएं
- केंद्रीय कर्मचारियों की तरह राज्य कर्मचारियों को मिले भत्ता
- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती हो
- सभी विभागों में खाली पड़े पदों को भरा जाए
- फील्ड में कार्य कर रहे कर्मचारियों को वाहन भत्ता मिले
- छठवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने को किए गए निर्णयों का पालन किया जाए।
- अनिवार्य सेवानिवृत्त व्यवस्था वापस ली जाए।
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काम नहीं तो वेतन नहीं
परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने बताया कि सरकार से मान्यता प्राप्त संगठन 1979 नियमावली के तहत अपनी मांग आदि के समर्थन में आंदोलन कर सकते हैं। इस संबंध में शासन को आंदोलन से पहले नोटिस दी जाती है। वैसे तो काम नहीं वेतन नहीं का नियम लागू होता है। हालांकि सरकार पर निर्भर करता है कि वह कर्मचारियों का वेतन काटती है या समझौते के तहत कर्मचारी को छुट्टी पर मानकर राहत देती है।
आरटीओ में चलते रहेंगे जरूरी काम
कानपुर। बुधवार से शुरू हो रहे कार्य बहिष्कार में आरटीओ कर्मचारी भी शामिल रहेंगे। इससे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहनों की फिटनेस और टैक्स जमा करने का काम प्रभावित नहीं होगा। दरअसल, इन कार्यों की जिम्मेदारी एक एजेंसी पहले से ही संभाल रही है। ऐसे में एजेंसी के कर्मचारी रोजाना की तरह काम करते रहेंगे।
परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने बताया कि सरकार से मान्यता प्राप्त संगठन 1979 नियमावली के तहत अपनी मांग आदि के समर्थन में आंदोलन कर सकते हैं। इस संबंध में शासन को आंदोलन से पहले नोटिस दी जाती है। वैसे तो काम नहीं वेतन नहीं का नियम लागू होता है। हालांकि सरकार पर निर्भर करता है कि वह कर्मचारियों का वेतन काटती है या समझौते के तहत कर्मचारी को छुट्टी पर मानकर राहत देती है।
आरटीओ में चलते रहेंगे जरूरी काम
कानपुर। बुधवार से शुरू हो रहे कार्य बहिष्कार में आरटीओ कर्मचारी भी शामिल रहेंगे। इससे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहनों की फिटनेस और टैक्स जमा करने का काम प्रभावित नहीं होगा। दरअसल, इन कार्यों की जिम्मेदारी एक एजेंसी पहले से ही संभाल रही है। ऐसे में एजेंसी के कर्मचारी रोजाना की तरह काम करते रहेंगे।