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Kanpur News: शहर में नकली सीमेंट का हर महीने पांच करोड़ का पहुंच गया कारोबार
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कानपुर। शहर में नकली सीमेंट का करीब चार से पांच करोड़ रुपये महीना हो गया है। इसमें कंपनी के स्टाकिस्टों की भी भूमिका होती है जो खराब सीमेंट की बोरियों को नकली सीमेंट बनाने वालों को बेच देते हैं। जानकारों का कहना है कि लालच में ऐसे लोग इमारतों की नींव को खोखली कर रहे हैं।
शहर में अलग-अलग कंपनियों की सीमेंट दो तरह से आती है। रेलवे की रैक से रोज करीब 53-54 हजार बोरी आती है। इसके अलावा कंपनियां बड़े-बड़े ट्रक और ट्राला के जरिए 53-54 हजार बोरी की सप्लाई करवाती हैं। शहर में प्रतिदिन एक लाख सीमेंट बोरी की खपत है। सीमेंट की बोरियों में 3-4 प्रतिशत बोरियां आने-जाने में फट जाती हैं। इससे निकली सीमेंट को स्टाकिस्ट कालाबाजारियों को चोरी-छिपे बेच देते हैं। कई कंपनियां इनकी नीलामी भी करती हैं। इसके जरिये भी अच्छी सीमेंट नक्कालों को मिल जाती है और वह कंपनियों की बोरियों की पैकिंग में असली सीमेंट में नकली सीमेंट भरकर बाजार में खपा देते हैं।
एक सीमेंट कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि बड़ी कंपनियों की पैकिंग अलग होती है। इसमें कई लेयर की सिलाई की जाती है जो आम व्यक्ति नहीं जान पाता है। कंपनियों के नियम है कि खराब सीमेंट का इस्तेमाल जमीन के अंदर करें या फेंक दें। नकली कारोबार करने वाले इसे खरीदकर पिसाई करवाते हैं।
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उत्तर प्रदेश सीमेंट डीलर एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नवीन डरोलिया ने बताया कि कई कंपनियों के स्टाकिस्ट भी इस कारोबार में शामिल हैं जो गोदामों में फटी बोरियों की सीमेंट, नमी से खराब हुई सीमेंट को कालाबाजरियों को बेच देते हैं। वही लोग बड़ी-बड़ी कंपनियों की नकली पैकिंग तैयार करके नकली और असली सीमेंट को मिलाकर कानपुर समेत अन्य शहरों में बिक्री करते हैं। सालभर में यह कारोबार 50-60 करोड़ तक पहुंच गया है। शहर में अलग-अलग कंपनियों की सीमेंट मध्य प्रदेश, राजस्थान के अलावा रायबरेली और घाटमपुर स्थित सीमेंट के प्लांटों से आती है।
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नकली सीमेंट से होने वाले नुकसान
कमजोर इमारतें: मिलावटी या नकली सीमेंट की पकड़ (बाइंडिंग कैपेसिटी) बहुत कमजोर होती है। जिससे दीवारों में गहरी दरारें आ सकती हैं।
सीलन और रिसाव: इसमें मौजूद अघुलनशील सामग्री के कारण कंक्रीट में सूक्ष्म छिद्र रह जाते हैं। जिससे छतों और दीवारों से पानी का रिसाव होने लगता है।
सरिया में जंग: नमी अंदर जाकर पिलर और छतों के लोहे के सरियों को जंग लगा देती है। जिससे पूरी बिल्डिंग की मजबूती खतरे में पड़ सकती है।
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असली और नकली सीमेंट की पहचान ऐसे करें
1: वजन की जांच: भारत में सीमेंट की मानक बोरी का वजन 50 किलो होता है। नकली या मिलावटी बोरियों में वजन कम मिल सकता है।
2:हाथ से छूकर देखें: असली सीमेंट को उंगलियों से रगड़ने पर वह एकदम चिकना (टाल्क जैसा) महसूस होता है। खुरदरापन या कंक्रीट के कड़े टुकड़े होने पर गड़बडी की आशंका होती है।
3: ठंडापन: सीमेंट की बोरी में हाथ डालने पर यदि अंदर ठंडक महसूस हो, तो वह ताजी और अच्छी गुणवत्ता की है।
4: गिल्टियां : बोरी खोलने पर यदि उसमें कड़े गांठ या ढेले दिखें और वो आसानी से न टूटें, तो सीमेंट खराब या नकली हो सकती है।
5:पानी का परीक्षण: पानी से भरी बाल्टी में सीमेंट की थोड़ी सी मात्रा डालें। अच्छी गुणवत्ता का सीमेंट कुछ देर तैरता है, जबकि खराब या मिलावटी सीमेंट तुरंत नीचे बैठ जाता है या अलग प्रतिक्रिया देता है।
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शहर में अलग-अलग कंपनियों की सीमेंट दो तरह से आती है। रेलवे की रैक से रोज करीब 53-54 हजार बोरी आती है। इसके अलावा कंपनियां बड़े-बड़े ट्रक और ट्राला के जरिए 53-54 हजार बोरी की सप्लाई करवाती हैं। शहर में प्रतिदिन एक लाख सीमेंट बोरी की खपत है। सीमेंट की बोरियों में 3-4 प्रतिशत बोरियां आने-जाने में फट जाती हैं। इससे निकली सीमेंट को स्टाकिस्ट कालाबाजारियों को चोरी-छिपे बेच देते हैं। कई कंपनियां इनकी नीलामी भी करती हैं। इसके जरिये भी अच्छी सीमेंट नक्कालों को मिल जाती है और वह कंपनियों की बोरियों की पैकिंग में असली सीमेंट में नकली सीमेंट भरकर बाजार में खपा देते हैं।
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एक सीमेंट कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि बड़ी कंपनियों की पैकिंग अलग होती है। इसमें कई लेयर की सिलाई की जाती है जो आम व्यक्ति नहीं जान पाता है। कंपनियों के नियम है कि खराब सीमेंट का इस्तेमाल जमीन के अंदर करें या फेंक दें। नकली कारोबार करने वाले इसे खरीदकर पिसाई करवाते हैं।
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उत्तर प्रदेश सीमेंट डीलर एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नवीन डरोलिया ने बताया कि कई कंपनियों के स्टाकिस्ट भी इस कारोबार में शामिल हैं जो गोदामों में फटी बोरियों की सीमेंट, नमी से खराब हुई सीमेंट को कालाबाजरियों को बेच देते हैं। वही लोग बड़ी-बड़ी कंपनियों की नकली पैकिंग तैयार करके नकली और असली सीमेंट को मिलाकर कानपुर समेत अन्य शहरों में बिक्री करते हैं। सालभर में यह कारोबार 50-60 करोड़ तक पहुंच गया है। शहर में अलग-अलग कंपनियों की सीमेंट मध्य प्रदेश, राजस्थान के अलावा रायबरेली और घाटमपुर स्थित सीमेंट के प्लांटों से आती है।
नकली सीमेंट से होने वाले नुकसान
कमजोर इमारतें: मिलावटी या नकली सीमेंट की पकड़ (बाइंडिंग कैपेसिटी) बहुत कमजोर होती है। जिससे दीवारों में गहरी दरारें आ सकती हैं।
सीलन और रिसाव: इसमें मौजूद अघुलनशील सामग्री के कारण कंक्रीट में सूक्ष्म छिद्र रह जाते हैं। जिससे छतों और दीवारों से पानी का रिसाव होने लगता है।
सरिया में जंग: नमी अंदर जाकर पिलर और छतों के लोहे के सरियों को जंग लगा देती है। जिससे पूरी बिल्डिंग की मजबूती खतरे में पड़ सकती है।
असली और नकली सीमेंट की पहचान ऐसे करें
1: वजन की जांच: भारत में सीमेंट की मानक बोरी का वजन 50 किलो होता है। नकली या मिलावटी बोरियों में वजन कम मिल सकता है।
2:हाथ से छूकर देखें: असली सीमेंट को उंगलियों से रगड़ने पर वह एकदम चिकना (टाल्क जैसा) महसूस होता है। खुरदरापन या कंक्रीट के कड़े टुकड़े होने पर गड़बडी की आशंका होती है।
3: ठंडापन: सीमेंट की बोरी में हाथ डालने पर यदि अंदर ठंडक महसूस हो, तो वह ताजी और अच्छी गुणवत्ता की है।
4: गिल्टियां : बोरी खोलने पर यदि उसमें कड़े गांठ या ढेले दिखें और वो आसानी से न टूटें, तो सीमेंट खराब या नकली हो सकती है।
5:पानी का परीक्षण: पानी से भरी बाल्टी में सीमेंट की थोड़ी सी मात्रा डालें। अच्छी गुणवत्ता का सीमेंट कुछ देर तैरता है, जबकि खराब या मिलावटी सीमेंट तुरंत नीचे बैठ जाता है या अलग प्रतिक्रिया देता है।