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आईआईटीयंस पर चलेगा जांच का डंडा
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 22 Aug 2016 01:15 AM IST
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विवेकानंद समिति ने आईआईटी कानपुर में रविवार को मोटीवेशनल स्पीच का आयोजन किया। इसमें डॉ. ओपी शर्मा ने स्टूडेंटों को तनाव रहित जीवन शैली अपनाने की सलाह दी।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। मैटेरियल साइंस के रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) आलोक कुमार पांडेय की मौत के बाद आईआईटी में बवाल और प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंटों के खिलाफ जांच होगी। इस सिलसिले में निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने रविवार को पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। इसकी अध्यक्षता आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक प्रो. केएल चोपड़ा करेंगे। कमेटी एक महीने में जांच रिपोर्ट देगी, फिर आगे की कार्रवाई होगी। जांच की सूचना सभी स्टूडेंटों को रविवार को ही ई-मेल से दे दी गई है।
रिसर्च स्कॉलर की मौत के बाद स्टूडेंटों के आंदोलन को आईआईटी प्रशासन ने गैर कानूनी माना है। साफ कहा है कि सड़क, बिजली और पठन-पाठन की गतिविधि बंद करना ठीक नहीं है। इस मामले की जांच और प्रौद्योगिकी संस्थान की नियमावली के हिसाब से स्टूडेंटों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। इसी वजह से पूरे मामले की जांच एक्सटर्नल रिव्यू कमेटी को दी गई है। यह कमेटी जल्द ही जांच शुरू करेगी। भविष्य में इस तरह का आंदोलन न हो, इसका सुझाव भी कमेटी देगी। अनुशासनहीनता में कार्रवाई की नियमावली भी बनेगी। स्टूडेंटों का आंदोलन तीन दिन तक चला था। सूत्रों के मुताबिक आईआईटी प्रशासन के पास 72 घंटे की वीडियो क्लिप है। इससे आंदोलन करने वाले स्टूडेंटों की पहचान की जाएगी। इसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
यह था मामला
रिसर्च स्कॉलर आलोक कुमार पांडेय (रोल नंबर 10212061) की मौत 8 अगस्त को हुई थी। आरोप था कि आईआईटी कैंपस स्थित स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक की लापरवाही से मौत हुई। इस पर स्टूडेंट सड़क पर उतर आए। तीन दिन तक प्रदर्शन किया। हॉस्टल, एकेडमिक और आवासीय क्षेत्र की बिजली बंद कर दी। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना और उप निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी को घंटों बंधक बनाए रखा। इससे बैकफुट पर आए आईआईटी प्रशासन ने आरोपी चिकित्सक को निलंबित कर दिया। साथ ही आलोक कुमार पांडेय के परिजनों को आठ लाख रुपये का मुआवजा देने और मामले की जांच फैक्ट फाइडिंग कमेटी से कराने का एलान कर दिया।
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स्टूडेंट दहशतजदा
जांच कमेटी गठित होने से स्टूडेंट दहशतजदा हैं। स्टूडेंटों का कहना है कि आईआईटी प्रशासन ने दबाव बनाने की कोशिश की है, जो अनुचित है। स्टूडेंट चुप नहीं बैठेंगे। उत्पीड़न हुआ तो
दोबारा आंदोलन छेड़ा जाएगा। रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी करने वाले) ज्यादा सहमे हैं।
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रिसर्च स्कॉलर की मौत के बाद स्टूडेंटों के आंदोलन को आईआईटी प्रशासन ने गैर कानूनी माना है। साफ कहा है कि सड़क, बिजली और पठन-पाठन की गतिविधि बंद करना ठीक नहीं है। इस मामले की जांच और प्रौद्योगिकी संस्थान की नियमावली के हिसाब से स्टूडेंटों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। इसी वजह से पूरे मामले की जांच एक्सटर्नल रिव्यू कमेटी को दी गई है। यह कमेटी जल्द ही जांच शुरू करेगी। भविष्य में इस तरह का आंदोलन न हो, इसका सुझाव भी कमेटी देगी। अनुशासनहीनता में कार्रवाई की नियमावली भी बनेगी। स्टूडेंटों का आंदोलन तीन दिन तक चला था। सूत्रों के मुताबिक आईआईटी प्रशासन के पास 72 घंटे की वीडियो क्लिप है। इससे आंदोलन करने वाले स्टूडेंटों की पहचान की जाएगी। इसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
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यह था मामला
रिसर्च स्कॉलर आलोक कुमार पांडेय (रोल नंबर 10212061) की मौत 8 अगस्त को हुई थी। आरोप था कि आईआईटी कैंपस स्थित स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक की लापरवाही से मौत हुई। इस पर स्टूडेंट सड़क पर उतर आए। तीन दिन तक प्रदर्शन किया। हॉस्टल, एकेडमिक और आवासीय क्षेत्र की बिजली बंद कर दी। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना और उप निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी को घंटों बंधक बनाए रखा। इससे बैकफुट पर आए आईआईटी प्रशासन ने आरोपी चिकित्सक को निलंबित कर दिया। साथ ही आलोक कुमार पांडेय के परिजनों को आठ लाख रुपये का मुआवजा देने और मामले की जांच फैक्ट फाइडिंग कमेटी से कराने का एलान कर दिया।
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स्टूडेंट दहशतजदा
जांच कमेटी गठित होने से स्टूडेंट दहशतजदा हैं। स्टूडेंटों का कहना है कि आईआईटी प्रशासन ने दबाव बनाने की कोशिश की है, जो अनुचित है। स्टूडेंट चुप नहीं बैठेंगे। उत्पीड़न हुआ तो
दोबारा आंदोलन छेड़ा जाएगा। रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी करने वाले) ज्यादा सहमे हैं।