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बिकरू कांड : बेटे का साथ बना परिवार की बर्बादी का कारण
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बेटे का विकास दुबे से साथ बना परिवार की बर्बादी का कारण
- एनकाउंटर में मारे गए प्रवीण दुबे के बुजुर्ग माता-पिता ने बया किया दर्द
फोटो 14 डीएचटीबीएलआरपी 1 परिचय- बेटे को खोने के बाद गांव-घर के खराब हुए हालात बयां करते बुर्जुग दंपति
संवाद न्यूज एजेंसी
चौबेपुर(बिल्हौर)। बिकरू कांड के बाद कुख्यात विकास दुबे व उसके साथियों को भले ही उनके किए की सजा मिल चुकी हो, पर उनकी करनी का खामियाजा अब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। पुलिस के हाथों एनकाउंटर में मारे गए प्रवीण उर्फ बउआ दुबे के वृद्ध माता-पिता भी परिवार की बर्बादी के लिए हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को दोषी ठहरा रहे हैं।
विकास दुबे की कोठी के ठीक बगल में रहने वाले ओम प्रकाश दुबे के दो बेटों में बउआ छोटा था। बड़ा बेटा विपिन पत्नी गौरी और दो बच्चों के साथ दिल्ली में रहता था। वहीं प्रवीण उर्फ बउआ गांव में ही रहकर माता-पिता के साथ खेती किसानी में हाथ बंटाता था। वृद्ध पिता ओमप्रकाश व मां पूर्णिमा की मानें तो बउआ को विकास की संगत का खामियाजा भुगतना पड़ा। छोटे बेटे की मौत के पश्चात खेती किसानी का काम अब उनके वश का नहीं रह गया है। अब सारे खेत उन्होंने बटाई में उठा दिए हैं। मकर संक्रांति पर्व पर घर की चौखट पर बैठे बुजुर्ग माता-पिता बड़े बेटे विपिन के आने की राह तक रहे थे। बूढ़े माता-पिता ने बताया कि घटना के बाद विपिन दिल्ली से नौकरी छोड़कर अब कल्याणपुर में रह रहा है। तीज त्योहार पर वह कुछ समय निकालकर गांव आ जाता है।
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- एनकाउंटर में मारे गए प्रवीण दुबे के बुजुर्ग माता-पिता ने बया किया दर्द
फोटो 14 डीएचटीबीएलआरपी 1 परिचय- बेटे को खोने के बाद गांव-घर के खराब हुए हालात बयां करते बुर्जुग दंपति
संवाद न्यूज एजेंसी
चौबेपुर(बिल्हौर)। बिकरू कांड के बाद कुख्यात विकास दुबे व उसके साथियों को भले ही उनके किए की सजा मिल चुकी हो, पर उनकी करनी का खामियाजा अब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। पुलिस के हाथों एनकाउंटर में मारे गए प्रवीण उर्फ बउआ दुबे के वृद्ध माता-पिता भी परिवार की बर्बादी के लिए हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को दोषी ठहरा रहे हैं।
विकास दुबे की कोठी के ठीक बगल में रहने वाले ओम प्रकाश दुबे के दो बेटों में बउआ छोटा था। बड़ा बेटा विपिन पत्नी गौरी और दो बच्चों के साथ दिल्ली में रहता था। वहीं प्रवीण उर्फ बउआ गांव में ही रहकर माता-पिता के साथ खेती किसानी में हाथ बंटाता था। वृद्ध पिता ओमप्रकाश व मां पूर्णिमा की मानें तो बउआ को विकास की संगत का खामियाजा भुगतना पड़ा। छोटे बेटे की मौत के पश्चात खेती किसानी का काम अब उनके वश का नहीं रह गया है। अब सारे खेत उन्होंने बटाई में उठा दिए हैं। मकर संक्रांति पर्व पर घर की चौखट पर बैठे बुजुर्ग माता-पिता बड़े बेटे विपिन के आने की राह तक रहे थे। बूढ़े माता-पिता ने बताया कि घटना के बाद विपिन दिल्ली से नौकरी छोड़कर अब कल्याणपुर में रह रहा है। तीज त्योहार पर वह कुछ समय निकालकर गांव आ जाता है।
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