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बेनामी संपत्ति को जब्त करेगी सरकार

Sat, 16 Jul 2016 01:39 AM IST
प्रदीप अवस्थी/ कानपुर
प्रदीप अवस्थी/ कानपुर Updated Sat, 16 Jul 2016 01:39 AM IST
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The government will freeze the assets Anonymous
जानकारी देतीं सीबीडीटी की सदस्य रानी सिंह नायर - फोटो : amar ujala
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स डिपार्टमेंट की सदस्य एवं वरिष्ठ आईआरएस अफसर रानी सिंह नायर बोर्ड के अध्यक्ष पद की दौड़ में भी शामिल हैं। कालाधन निकलवाने, नीतियां बनाने और करदाताओं में राष्ट्रभावना पैदा करने में इन्हें माहिर माना जाता है। कई राज्यों की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त रहने के बाद वर्ष 2014 में सीबीडीटी की सदस्य बनीं।
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आर्थिक मोर्चे पर विदेशों में भी इनके नाम का डंका बजता है। शुक्रवार को शहर के रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में इनकम डिक्लेरेशन स्कीम पर करदाताओं से बात करने के बाद अमर उजाला से खास बातचीत में भविष्य की नीतियों का खुलासा किया। पेश है प्रमुख संवाददाता से बातचीत।
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वर्ष 1988 में बेनामी संपत्ति रोकथाम अधिनियम बना था। इसके बावजूद 28 वर्ष बाद इनकम डिक्लेरेशन स्कीम की जरूरत पड़ रही है। कहां चूक हो गई सरकार से? 
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बेनामी संपत्ति रोकथाम अधिनियम में कुछ खामियां महसूस की गईं। अब नए सिरे से इसमें संशोधन किया गया है। कैबिनेट की अगली बैठक में इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस संशोधित एक्ट के लागू होते ही बेनामी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा। जो लोग इनकम डिक्लेरेशन स्कीम में बेनामी संपत्ति अपने नाम कराकर उसे घोषित नहीं करेंगे, सरकार उनकी संपत्ति जब्त कर लेगी। 

कैसे तय होगा कौन सी बेनामी संपत्ति है? 
कोई व्यक्ति किसी संपत्ति का उपयोग कर रहा है लेकिन न तो उसके पास दस्तावेज हैं न खरीद के रिकार्ड। संपत्ति उस व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों के नाम भी नहीं है तो वह बेनामी संपत्ति की श्रेणी में आएगी। किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति गिफ्ट में मिली है तो वह उसे अपने या पत्नी अथवा बच्चों के नाम ही करा सकता है। रिश्तेदार के नाम कराई संपत्ति भी बेनामी मानी जाएगी। 

किसी व्यक्ति ने वर्ष 2000 में 10 लाख की जमीन खरीदी। अब उसकी कीमत एक करोड़ रुपये है। इसे घोषित करने पर उसे 45 लाख रुपये देने होंगे। ऐसे में खरीदी कीमत से ज्यादा टैक्स जमा करने का विरोध हो रहा है? क्या कोई रियायत मिल सकती है?
बिलकुल नहीं। इस मामले में विभाग की नीति स्पष्ट है। वर्ष 2000 में किस संपत्ति का क्या मूल्य घोषित किया गया इसका हमारे पास कोई सबूत नहीं होगा। इसलिए एक जून 2016 की कीमत के आधार पर मूल्याकंन होगा। हम आम तौर पर कम से कम 25 या 35 फीसदी टैक्स तो देते  हैं। इतनी बड़ी राहत देने के नाम पर 10 या 20 फीसदी ही तो ज्यादा लिया जा रहा है। 

इनकम डिक्लेरेशन स्कीम सिर्फ उनके लिए है जो रिटर्न दाखिल करते हैं, लेकिन लाखों की संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो रिटर्न दाखिल नहीं करते और करोड़ों के मालिक हैं? उन पर कैसे शिकंजा कसेंगी? 
सीबीडीटी पहले से अधिक स्मार्ट हो गया है। ऐसे लोगों का पता लगाने के लिए डाटा माइनिंग की जा रही है। सैकड़ों सोर्स से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। कौन विदेश घूमने जा रहा, कौन कितने गहने खरीद रहा, कितना बैंक में जमा है, सब पता चल रहा है। इसी वजह से दो लाख से अधिक नकद खरीद पर एक फीसदी टीसीएस लिया जा रहा है। टीसीएस के जरिये सूचनाएं विभाग के पास आएंगी। इससे वह विभाग के दायरे में आएंगे। 


कितने करदाता हर साल टैक्स नहीं जमा कर रहे? 
एक सर्वे में ऐसे करदाताओं की संख्या चार से पांच लाख आंकी गई है। इन सबके रिकार्ड जुटाए जा रहे हैं। अगले कुछ वर्षों तक विभाग के पास बहुत काम है। टैक्स प्रणाली को बहुत सशक्त बनाना है।  

करदाताओं की सहूलियत को क्या व्यवस्थाएं हुईं? 
करदाताओं की सहूलियत के लिए ही सरकार ने बजट में प्रेजेम्टिव टैक्स की व्यवस्था की है। यानी निर्धारित टैक्स जमा करके कोई भी व्यक्ति दस्तावेजों के रखरखाव से मुक्ति पा सकता है। ऐसा नहीं करने की स्थिति में सालों तक कागजात संभाल कर रखने होते हैं। रिफंड, अपील, ई-फाइलिंग समेत कई व्यवस्थाएं नहीं लागू की गई हैं तो कई में संशोधन किया गया है। 
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