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मिट्टी में दबे दोनों युवकों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Fri, 15 Jul 2016 01:32 AM IST
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बिलखती अवधेश की पत्नी और उसके तीनों बच्चे।
- फोटो : amarujala
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सरसौल। महाराजपुर के चांदनपुर गांव में बुधवार शाम ट्यूबवेल के कुएं में गिरे अवधेश (28) और उसके बटाईदार पुतान (23) की आखिरकार मौत हो गई। पुलिस, प्रशासन और सेना के जवानों ने 11 घंटे की मशक्कत के बाद जेसीबी की मदद से उनका शव मिट्टी के ढेर से निकाला। शव निकलते ही गांव में कोहराम मच गया।
बुधवार शाम चार बजे अवधेश की भैंस बोरवेल में गिर गई थी। जिसे निकालने के लिए शाम सात बजे अवधेश अपने बटाईदार पुतान को लेकर बोरवेल के बगल में खोदे गए दूसरे गड्ढे में उतरा था। हालांकि भैंस मर चुकी थी। उसे ऊपर खींचने के प्रयास में ही मिट्टी का टीला धंसा और ऊपर से प्रताप, अभिमन्यु, सूरज भी नीचे गिरकर मिट्टी में दब गए। ऊपर से गिरने वाले तीनों लोगों को तो किसी तरह बाहर निकाल लिया गया था, लेकिन अवधेश और पुतान मिट्टी में ही दबे रहे। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे जब खुदाई करती मशीन के साथ एक कटा हाथ लोगों के सामने आया तो सभी के होश फाख्ता हो गए। मिट्टी धसकने की वजह से बोर में उतरना किसी के बूते की बात नहीं थी, लिहाजा फंसे हुए लोगों के परिजनों की सहमति के बाद आखिर में जेसीबी से ही उन्हें बाहर निकालने का फैसला लिया गया। लगभग 20 मिनट बाद मशीन ने दोनों के क्षत विक्षत शव बाहर निकाले तो परिजनों में चीख पुकार मच गई। एसडीएम विनीत सिंह ने परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष और पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
मायके छोड़कर साथ छोड़ गए
तीन मासूम बच्चों के साथ फतेहपुर मायके से लौटी अवधेश की पत्नी रश्मि चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी मंगलवार को ही तो पति मायके छोड़कर आए थे। क्या पता था कि जिंदगी भर का साथ ही छोड़ जाएंगे। अवधेश की शादी 3 साल पहले हुई थी।
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बेटा घर पर थाली सजी रखी है
पुतान की मां फूलकुमारी भी बेटे के शव को पीट पीट कर कह रही थी, उठो लौटकर खाना खाने को बोलकर गए थे, चलो घर थाली सजी रखी है। फूल का रोना देखकर गांव की महिलाएं भी रो पड़ी।
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बुधवार शाम चार बजे अवधेश की भैंस बोरवेल में गिर गई थी। जिसे निकालने के लिए शाम सात बजे अवधेश अपने बटाईदार पुतान को लेकर बोरवेल के बगल में खोदे गए दूसरे गड्ढे में उतरा था। हालांकि भैंस मर चुकी थी। उसे ऊपर खींचने के प्रयास में ही मिट्टी का टीला धंसा और ऊपर से प्रताप, अभिमन्यु, सूरज भी नीचे गिरकर मिट्टी में दब गए। ऊपर से गिरने वाले तीनों लोगों को तो किसी तरह बाहर निकाल लिया गया था, लेकिन अवधेश और पुतान मिट्टी में ही दबे रहे। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे जब खुदाई करती मशीन के साथ एक कटा हाथ लोगों के सामने आया तो सभी के होश फाख्ता हो गए। मिट्टी धसकने की वजह से बोर में उतरना किसी के बूते की बात नहीं थी, लिहाजा फंसे हुए लोगों के परिजनों की सहमति के बाद आखिर में जेसीबी से ही उन्हें बाहर निकालने का फैसला लिया गया। लगभग 20 मिनट बाद मशीन ने दोनों के क्षत विक्षत शव बाहर निकाले तो परिजनों में चीख पुकार मच गई। एसडीएम विनीत सिंह ने परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष और पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
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मायके छोड़कर साथ छोड़ गए
तीन मासूम बच्चों के साथ फतेहपुर मायके से लौटी अवधेश की पत्नी रश्मि चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी मंगलवार को ही तो पति मायके छोड़कर आए थे। क्या पता था कि जिंदगी भर का साथ ही छोड़ जाएंगे। अवधेश की शादी 3 साल पहले हुई थी।
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बेटा घर पर थाली सजी रखी है
पुतान की मां फूलकुमारी भी बेटे के शव को पीट पीट कर कह रही थी, उठो लौटकर खाना खाने को बोलकर गए थे, चलो घर थाली सजी रखी है। फूल का रोना देखकर गांव की महिलाएं भी रो पड़ी।