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गंगा प्रदूषण रोकने के लिए अब शुरू होगा ‘टेंडर’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 03 Nov 2016 10:29 PM IST
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गंगा में गिर रहे नालों को मोड़ने के लिए टेंडर नोटिस तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया
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कानपुर की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने गंगा में गिर रहे नालों को मोड़ने के लिए टेंडर नोटिस तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। वहां से ग्रीन सिग्नल मिलते ही टेंडर जारी कर दिए जाएंगे।
गंगा में गिर रहे सबसे बड़े नाले (सीसामऊ नाला) के साथ ही ज्यौरा, म्योर मिल सहित छह नालों को डायवर्ट करते हुए इनका गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ले जाने के लिए जल संसाधन मंत्रालय ने 63 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को नाले डायवर्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस इकाई के महाप्रबंधक एके गुप्ता ने बताया कि इस कार्य के लिए टेंडर प्रपत्र तैयार हो गया है। इसे जल संसाधन मंत्रालय भेजा गया है। वहां से जल्द ही इसे स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। ऐसा होते ही टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। सबसे पहले सीसामऊ नाले का डायवर्ट किया जाएगा।
सीसामऊ नाले से ही गंगा में रोज लगभग 14.50 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में जा रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में मामला उठने के बाद केंद्र सरकार ने इन नाले के साथ ही गंगा में गिर रहे अन्य प्रमुख नालों को मोड़कर एसटीपी तक ले जाने की योजना स्वीकृत की है।
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गंगा में गिर रहे सबसे बड़े नाले (सीसामऊ नाला) के साथ ही ज्यौरा, म्योर मिल सहित छह नालों को डायवर्ट करते हुए इनका गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ले जाने के लिए जल संसाधन मंत्रालय ने 63 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को नाले डायवर्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस इकाई के महाप्रबंधक एके गुप्ता ने बताया कि इस कार्य के लिए टेंडर प्रपत्र तैयार हो गया है। इसे जल संसाधन मंत्रालय भेजा गया है। वहां से जल्द ही इसे स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। ऐसा होते ही टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। सबसे पहले सीसामऊ नाले का डायवर्ट किया जाएगा।
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सीसामऊ नाले से ही गंगा में रोज लगभग 14.50 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में जा रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में मामला उठने के बाद केंद्र सरकार ने इन नाले के साथ ही गंगा में गिर रहे अन्य प्रमुख नालों को मोड़कर एसटीपी तक ले जाने की योजना स्वीकृत की है।
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