{"_id":"6ae2326dbc905739cc0c8b57","slug":"students-protest-at-university-over-decision-not-to-designate-dc-law-college-as-a-self-center-2026-10-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कानपुर: डीसी लॉ कॉलेज को स्वकेंद्र न बनाने पर विवि में छात्रों का प्रदर्शन, कुलपति बोले-बहकावे में न आएं छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर: डीसी लॉ कॉलेज को स्वकेंद्र न बनाने पर विवि में छात्रों का प्रदर्शन, कुलपति बोले-बहकावे में न आएं छात्र
Wed, 28 Oct 2026 11:18 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:18 PM IST
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर डीसी लाॅ कॉलेज के छात्रों ने दिया धरना
- फोटो : अमर उजाला
डीसी लॉ कॉलेज को परीक्षा केंद्र न बनाए जाने पर छात्रों ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। विधि छात्र मोर्चा के बैनर तले जुटे छात्रों ने विश्वविद्यालय के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने होम सेंटर की बहाली समेत चार प्रमुख मांगें उठाईं। छात्रों का कहना था कि कॉलेज में दिव्यांग छात्र भी हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन की खींचतान में उन्हें दिक्कत होगी।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने छात्रों से किसी बहकावे में न आने को कहा। उन्होंने बताया कि कॉलेज में प्रवेश की अनियमितताओं की जांच चल रही है। कॉलेज जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं होगी, तब तक केंद्र नहीं बनेगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डीसी लॉ के छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर भेजा जाएगा।
मूल्यांकन के बाद भी कॉपियों को स्कैन कर छात्रों को भेजा जाएगा। छात्र नेता अनुज त्रिपाठी ने कहा कि यह आंदोलन व्यवस्था में सुधार के लिए है। छात्रों ने होम सेंटर के अलावा एआई से पेपर बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना पूर्व परीक्षण के ऐसी व्यवस्था उचित नहीं है। कुलपति ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र केवल एआई से नहीं बन रहे हैं।
विज्ञापन
इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। विशेषज्ञ ही पेपर तैयार करेंगे और एआई केवल सहायक के रूप में काम करेगा। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने प्रति कुलपति सुधांशु पांडिया को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में अनस साहू, कुशाग्र द्विवेदी, वैभव द्विवेदी, श्रेयश, अभिषेक, सचिन, आकाश, प्रज्ञा, कोमल, सुमित आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने छात्रों से किसी बहकावे में न आने को कहा। उन्होंने बताया कि कॉलेज में प्रवेश की अनियमितताओं की जांच चल रही है। कॉलेज जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं होगी, तब तक केंद्र नहीं बनेगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डीसी लॉ के छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर भेजा जाएगा।
विज्ञापन
मूल्यांकन के बाद भी कॉपियों को स्कैन कर छात्रों को भेजा जाएगा। छात्र नेता अनुज त्रिपाठी ने कहा कि यह आंदोलन व्यवस्था में सुधार के लिए है। छात्रों ने होम सेंटर के अलावा एआई से पेपर बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना पूर्व परीक्षण के ऐसी व्यवस्था उचित नहीं है। कुलपति ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र केवल एआई से नहीं बन रहे हैं।
विज्ञापन
इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। विशेषज्ञ ही पेपर तैयार करेंगे और एआई केवल सहायक के रूप में काम करेगा। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने प्रति कुलपति सुधांशु पांडिया को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में अनस साहू, कुशाग्र द्विवेदी, वैभव द्विवेदी, श्रेयश, अभिषेक, सचिन, आकाश, प्रज्ञा, कोमल, सुमित आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
समर्थ पोर्टल और पाठ्यक्रम पर किया जाए विचार
प्रथम वर्ष के छात्रों के भविष्य को देखते हुए समर्थ पोर्टल पर फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की गई। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय को डीसी लॉ कॉलेज में प्रवेश के दौरान आरक्षण व मेरिट का ध्यान न रखने की शिकायत मिली थी। जांच पूरी होने तक समर्थ पोर्टल पर फॉर्म सबमिशन प्रक्रिया नहीं खुलेगी। छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 90 दिन की अनिवार्य अकादमिक कक्षाओं के मानदंड का पालन कराने की भी मांग उठाई। इस पर विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग विचार कर रहा है कि देर से नामांकन वाले स्थानों पर पाठ्यक्रम कैसे पूरा कराया जाए।
प्रथम वर्ष के छात्रों के भविष्य को देखते हुए समर्थ पोर्टल पर फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की गई। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय को डीसी लॉ कॉलेज में प्रवेश के दौरान आरक्षण व मेरिट का ध्यान न रखने की शिकायत मिली थी। जांच पूरी होने तक समर्थ पोर्टल पर फॉर्म सबमिशन प्रक्रिया नहीं खुलेगी। छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 90 दिन की अनिवार्य अकादमिक कक्षाओं के मानदंड का पालन कराने की भी मांग उठाई। इस पर विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग विचार कर रहा है कि देर से नामांकन वाले स्थानों पर पाठ्यक्रम कैसे पूरा कराया जाए।