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सीबीएसई बोर्ड परीक्षार्थियों का डाटा लीक होने का मामला: पुलिस ने मानी हार, बोर्ड से जांच कराने की सिफारिश
Mon, 21 Dec 2020 11:06 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 21 Dec 2020 11:06 AM IST
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यूपी पुलिस
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सीबीएसई के बोर्ड परीक्षार्थियों का डाटा बेचने के मामले में पुलिस ने हार मान ली है। सप्ताह भर तक जांच करने के बाद जांच अधिकारी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सके। पुलिस अब इसकी जांच बोर्ड से कराने की सिफारिश करेगी। जांच अधिकारी सीओ अनवरगंज ने जांच रिपोर्ट डीआईजी को सौंप दी है। रायपुरवा स्थित इंडीज कंपनी ने पांच हजार से ज्यादा बोर्ड परीक्षार्थियों का डाटा बेच दिया था।
मामले की जांच सीओ अनवरगंज मोहम्मद अकमल खान को दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक जांच में पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा। दरअसल, इंडीज कंपनी ने लखनऊ की एक कंपनी से डाटा खरीदा। लखनऊ की कंपनी ने गुजरात की कंपनी से। ये चेन काफी लंबी है। इस कारण पुलिस तह तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस की जांच में डाटा का इस्तेमाल किसी आपराधिक मामले में इस्तेमाल करने के साक्ष्य भी नहीं मिले। लिहाजा पुलिस ने इंडीज कंपनी चलाने वालों को क्लीन चिट दे दी है।
बोर्ड करे जांच तो शायद कुछ हाथ आए
परीक्षार्थियों का डाटा बोर्ड के पास उपलब्ध होता है। यानी एक बात तो साफ है कि सबसे पहले डाटा बोर्ड से ही लीक हुआ। यह डाटा वेबसाइट हैक कर लीक किया गया या बोर्ड से किसी ने लीक किया। सूत्रों के मुताबिक जांच में यही लिखा गया है कि पुलिस को जो जानकारी दी गई, उन तथ्यों से लीक करने वालों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। इसकी जांच बोर्ड की तरफ से की जाए तो उम्मीद है कि डाटा लीक व चोरी करने वालों तक पहुंचा जा सकता है। इसलिए पुलिस अब बोर्ड को पत्र लिखकर जांच करने की सिफारिश करेगी।
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आसानी से डाटा का हो जाएगा मिलान
जांच अधिकारी ने तमाम वेबसाइट खंगाली। पता चला कि दो दर्जन से अधिक वेबसाइट पर परीक्षार्थियों का डाटा उपलब्ध है। अब अगर पुलिस को ये पता करना हो कि ये डाटा छात्रों का ही है तो इसके लिए बोर्ड से डाटा मांगना पड़ेगा। यह प्रक्रिया लंबी है। वहीं अगर बोर्ड अगर इसकी जांच करेगा तो आसानी से इसका मिलान हो जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड की जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार केस पंजीकृत कर आगे की कार्रवाई करना आसान होगा।
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मामले की जांच सीओ अनवरगंज मोहम्मद अकमल खान को दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक जांच में पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा। दरअसल, इंडीज कंपनी ने लखनऊ की एक कंपनी से डाटा खरीदा। लखनऊ की कंपनी ने गुजरात की कंपनी से। ये चेन काफी लंबी है। इस कारण पुलिस तह तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस की जांच में डाटा का इस्तेमाल किसी आपराधिक मामले में इस्तेमाल करने के साक्ष्य भी नहीं मिले। लिहाजा पुलिस ने इंडीज कंपनी चलाने वालों को क्लीन चिट दे दी है।
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बोर्ड करे जांच तो शायद कुछ हाथ आए
परीक्षार्थियों का डाटा बोर्ड के पास उपलब्ध होता है। यानी एक बात तो साफ है कि सबसे पहले डाटा बोर्ड से ही लीक हुआ। यह डाटा वेबसाइट हैक कर लीक किया गया या बोर्ड से किसी ने लीक किया। सूत्रों के मुताबिक जांच में यही लिखा गया है कि पुलिस को जो जानकारी दी गई, उन तथ्यों से लीक करने वालों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। इसकी जांच बोर्ड की तरफ से की जाए तो उम्मीद है कि डाटा लीक व चोरी करने वालों तक पहुंचा जा सकता है। इसलिए पुलिस अब बोर्ड को पत्र लिखकर जांच करने की सिफारिश करेगी।
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आसानी से डाटा का हो जाएगा मिलान
जांच अधिकारी ने तमाम वेबसाइट खंगाली। पता चला कि दो दर्जन से अधिक वेबसाइट पर परीक्षार्थियों का डाटा उपलब्ध है। अब अगर पुलिस को ये पता करना हो कि ये डाटा छात्रों का ही है तो इसके लिए बोर्ड से डाटा मांगना पड़ेगा। यह प्रक्रिया लंबी है। वहीं अगर बोर्ड अगर इसकी जांच करेगा तो आसानी से इसका मिलान हो जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड की जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार केस पंजीकृत कर आगे की कार्रवाई करना आसान होगा।